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Burhanpur Hospital Ground Report: बुरहानपुर के 32 करोड़ रुपये की लागत से बने जिला अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है. ईसीजी मशीन खराब होने और लिफ्ट बंद होने की शिकायतें सामने आई हैं. मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की कमी और संसाधनों के सही संचालन न होने से समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है. सिविल सर्जन ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है. जानिए बुरहानपुर जिला अस्पताल की जमीनी हकीकत पर पूरी रिपोर्ट.
Burhanpur News: मध्यप्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बुरहानपुर के जिला अस्पताल की हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है. 32 करोड़ रुपये की लागत से बना यह अस्पताल आज बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझता नजर आ रहा है. मरीजों का आरोप है कि यहां न तो समय पर जांच हो पा रही है और न ही जरूरी संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है.
ECG के लिए भटकते मरीज
जिला अस्पताल में ईसीजी कराने आए मरीजों को बार-बार लौटाया जा रहा है. मरीज मनोज वानखेड़े ने बताया कि वे उपचार के लिए आए थे, लेकिन ईसीजी मशीन कभी खराब तो कभी “चार्जिंग नहीं है” कहकर टाल दिया जाता है. कभी स्टाफ मीटिंग में होने का बहाना बना देता है. ऐसे में गंभीर मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है.
लिफ्ट बंद, मरीजों की बढ़ी मुश्किल
अस्पताल की लिफ्ट बंद होने से बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में दिक्कत हो रही है. बताया जा रहा है कि एक लिफ्ट लंबे समय से बंद है. डॉक्टरों की भी करीब 10 पदों पर कमी बताई जा रही है, जिससे समय पर इलाज प्रभावित हो रहा है.
सिविल सर्जन का जवाब
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके का कहना है कि एक लिफ्ट चालू कर दी गई है और दूसरी निर्माण कार्य के कारण बंद है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा. ईसीजी की समस्या की भी जांच कर समाधान किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि कोई लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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