हरदा जिला मुख्यालय स्थित गुर्जर छात्रावास में रविवार को भुआणा प्रांतीय गुर्जर महासभा की एक बैठक हुई। इस दौरान समाज ने अपने बेटों के विवाह में दहेज न लेने वाले 75 अभिभावकों को सम्मानित किया। यह पहल समाज में दहेज प्रथा को समाप्त करने की दिशा में एक महत
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मीडिया प्रभारी एडवोकेट अशोक गुर्जर ने बताया कि सम्मानित किए गए अभिभावकों ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने अपनी बेटी को लक्ष्मी के रूप में सौंपा है, उनसे कागजी या आर्थिक लक्ष्मी लेना पाप के समान है। उनके लिए बहू के रूप में बेटी मिलना ही सबसे बड़ी लक्ष्मी है।
गुर्जर समाज के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण दुगाया ने बताया कि समाज की मंशा है कि अधिक से अधिक परिवार बिना दहेज के विवाह करें। इसी उद्देश्य से इन 75 परिवारों को सम्मानित किया गया है, ताकि समाज के अन्य लोग और गैर-गुर्जर समाज के सदस्य भी इससे प्रेरणा ले सकें।
संगठन के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश मोरछले ने जानकारी दी कि बैठक में समाज के बच्चों की शिक्षा और अन्य सामाजिक उत्थान के कार्यों के लिए एक कोष गठित करने का भी निर्णय लिया गया। यह कोष भूमिदान करने वाले दानदाताओं की मदद से बनाया जाएगा और भविष्य में समाज हित के कार्यों में सहायक होगा।
इस अवसर पर विधायक डॉ. आर.के. दोगने ने कहा कि गुर्जर समाज हमेशा से ही क्षेत्र को दिशा देने के लिए नई पहल करता आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य समाज भी इससे प्रेरणा लेकर आगे आएंगे। बैठक में नयाखेड़ा गुर्जर सभा के अध्यक्ष हरिप्रसाद मुकाती, संरक्षक एच.एन. गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष हरगोविंद मुकाती, ठाकुर लाल मोरछले सहित विभिन्न इकाइयों की महिला मंडल की अध्यक्ष और अन्य सामाजिक बंधु व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष की बैठक में भी गुर्जर समाज ने शादी के दौरान डीजे बजाने और सड़क पर महिलाओं के डांस पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। कार्यक्रम का मंच संचालन संजय बिजगावने ने किया।
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