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Chole Bhature Cooking Tips: छोले भटूरे बनाते समय सही तैयारी और धैर्य बहुत जरूरी है. छोले को कम से कम आठ से दस घंटे भिगोना चाहिए ताकि वे अच्छे से गलें. भटूरे के आटे में मैदा के साथ सूजी और दही मिलाने से बेहतर टेक्सचर मिलता है. तेल का सही तापमान भटूरे को फूलाने की सबसे बड़ी कुंजी है. छोटी छोटी गलतियों को सुधारकर घर पर भी ढाबा स्टाइल छोले भटूरे बनाए जा सकते हैं.
Chole Bhature Cooking Tips: पहली बार जब कोई घर पर छोले भटूरे बनाने की सोचता है तो उत्साह भी होता है और थोड़ी सी टेंशन भी. यह सिर्फ एक डिश नहीं है, यह यादों से जुड़ा स्वाद है. कभी किसी ठेले वाले के फूले हुए गरम भटूरे याद आते हैं, तो कभी घर में रविवार की सुबह जब छोले की खुशबू पूरे घर में फैल जाती थी. बाहर से देखने में यह डिश आसान लगती है, लेकिन असली खेल बैलेंस का है.
छोले सही तरह गलने चाहिए, मसाला गाढ़ा और खुशबूदार होना चाहिए, और भटूरे ऐसे फूलें कि प्लेट पर आते ही दिल खुश हो जाए. अक्सर पहली कोशिश में छोले थोड़े कड़े रह जाते हैं, भटूरे पूड़ी जैसे बन जाते हैं या ज्यादा तेल पी लेते हैं. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. ये गलतियां आम हैं और थोड़ी समझ से आसानी से सुधारी जा सकती हैं.
सबसे पहली और सबसे बड़ी गलती है छोले को सही समय तक न भिगोना. काबुली चना जल्दी पकने वाली चीज नहीं है. उसे कम से कम आठ से दस घंटे तक पानी में भिगोना जरूरी है. कई लोग जल्दबाजी में गरम पानी डाल देते हैं या कम समय में काम चलाना चाहते हैं, लेकिन इससे छोले अंदर से सख्त रह जाते हैं. बेहतर है कि रात में ही भिगो दें ताकि सुबह तक वे अच्छे से फूल जाएं. उबालते समय चाहें तो चुटकी भर खाने का सोडा डाल सकते हैं, इससे छोले जल्दी नरम होते हैं, लेकिन ज्यादा डालने से स्वाद बिगड़ सकता है.
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दूसरी गलती है मसाले का बेस ठीक से तैयार न करना. छोले सिर्फ उबले हुए चने और बाजार के मसाले से अच्छे नहीं बनते. असली स्वाद प्याज, टमाटर, अदरक और लहसुन को अच्छे से भूनने में है. जब तक मसाला तेल न छोड़ दे, तब तक उसे धैर्य से पकाना चाहिए. जीरा, धनिया पाउडर, अमचूर और गरम मसाला सही मात्रा में डालने से छोले में गहराई आती है. अगर ढाबा जैसा गहरा रंग चाहिए तो छोले उबालते समय एक टी बैग डाल सकते हैं. इससे रंग अच्छा आता है और स्वाद पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता.
तीसरी बड़ी गलती भटूरे के आटे में सिर्फ मैदा का इस्तेमाल करना है. सिर्फ मैदा से भटूरे अक्सर चबाने में भारी या ज्यादा तेल सोखने वाले बन जाते हैं. आटे में थोड़ा सा सूजी और दही मिलाने से टेक्सचर बेहतर होता है और भटूरे अच्छे से फूलते हैं. आटा गूंथते समय उसे अच्छी तरह मलना चाहिए और कम से कम दो घंटे ढककर रखना चाहिए. जितना अच्छा आटा रेस्ट करेगा, उतने ही अच्छे भटूरे बनेंगे.
चौथी गलती तेल के तापमान को नजरअंदाज करना है. अगर तेल ठीक से गरम नहीं होगा तो भटूरा कढ़ाई के नीचे बैठ जाएगा और ज्यादा तेल पी लेगा. तेल इतना गरम होना चाहिए कि भटूरा डालते ही ऊपर आ जाए और तुरंत फूलने लगे. चेक करने के लिए आटे का छोटा टुकड़ा तेल में डालें. अगर वह तुरंत ऊपर आ जाए और बुलबुले बनने लगें तो तेल तैयार है.
पांचवीं गलती कढ़ाई में एक साथ कई भटूरे डाल देना है. जल्दी के चक्कर में लोग एक साथ दो तीन भटूरे डाल देते हैं जिससे तेल का तापमान गिर जाता है. इससे भटूरे ठीक से फूल नहीं पाते. बेहतर है कि एक बार में एक ही भटूरा तलें ताकि उसे फैलने और फूलने की पूरी जगह मिल सके.
छठी और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली गलती है अंतिम टच को भूल जाना. छोले भटूरे के साथ अचार वाली प्याज, हरी चटनी और नींबू का टुकड़ा हो तो पूरा स्वाद बदल जाता है. सिरके में नमक और हल्की सी चीनी मिलाकर प्याज भिगो दें. थोड़ी देर में वह हल्की गुलाबी और चटपटी हो जाएगी, जो छोले भटूरे के साथ कमाल लगती है.
घर पर छोले भटूरे बनाना थोड़ा मेहनत वाला जरूर है, लेकिन हर कोशिश के साथ आप बेहतर होते जाते हैं. पहली बार में अगर भटूरे पूरे न फूलें या छोले मनमुताबिक न बनें तो निराश न हों. अभ्यास से ही परफेक्ट प्लेट बनती है. धीरे धीरे आपको आटे का सही टेक्सचर, मसाले का संतुलन और तेल का तापमान खुद समझ आने लगेगा. और जिस दिन आपके भटूरे गोल और फूले हुए निकलेंगे, उस दिन की खुशी अलग ही होगी.
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