दावोस के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बहुत से लोगों ने भाषण दिये. उसमें अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप भी थे. और भी कई राष्ट्रप्रमुख, नेता, बिजनेस तायकून लेकिन अगर किसी ने सबसे ज्यादा बाजी मारी तो ये कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हैं. जिन्होंने इस मंच से ना केवल ट्रंप का विरोध करने की हिम्मत जुटाई बल्कि ये कहने की हिम्मत जुटाई कि पुरानी विश्व व्यवस्था अब दरक रही है. नए व्यवस्था की जरूरत है. इसके लिए उन्होंने देशों को एकजुट होने की अपील की.
मार्क कार्नी का दावोस भाषण वैश्विक व्यवस्था में बदलाव पर केंद्रित था, जिसमें उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व वाली व्यवस्था के कमजोर होने की चेतावनी दी. ये भाषण मध्यम शक्तियों की एकजुटता पर जोर देता है.
जब मार्क कार्नी पिछले साल कनाडा के प्रधानमंत्री बने, तो उन्हें मुख्य तौर पर तकनीकी रूप से कुशल केंद्रीय बैंकर के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने वैश्विक वित्त की दुनिया में सफलता हासिल की थी. लेकिन स्विट्जरलैंड के दावोस से लौटने के बाद वह वैश्विक राजनीतिक सितारे बन गए.
देर तक बजती रहीं तालियां
भाषण करीब 15-20 मिनट लंबा था, जो वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुख्य प्लेनरी सेशन में 20 जनवरी दिया गया. ये भाषण मुख्य रूप से बिना टेलीप्रॉम्प्टर के दिया गया. बोलने का तरीका एकदम स्पष्ट, धीमी गति के साथ उच्चारण वाला था और जटिल वैश्विक मुद्दों पर समझाने वाला. जब वह भाषण दे रहे थे तो वह आत्मविश्वास से भरे हुए थे. बगैर किसी हिचकिचाहट के ट्रंप नीतियों पर प्रहार किया.
अरबपतियों, निवेशकों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और राजनेताओं के इस वार्षिक सम्मेलन में आमतौर पर शांत रहने वाले श्रोताओं ने कार्नी के जोशीले भाषण के अंत में असाधारण रूप से खड़े होकर तालियां बजाईं.
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी (Photo : AP)
इस भाषण की 5 मुख्य बातें
1. अमेरिका के नेतृत्व वाली व्यवस्था अब टूट रही है, जो बदलाव से आगे बढ़कर विघटन की ओर है; मध्यम शक्तियां अब नियमों पर निर्भर नहीं रह सकतीं.
2. भारत, चीन, यूरोपीय यूनियन जैसे देशों को एकजुट होकर नया गठबंधन बनाना चाहिए.
3. बगैर नाम लिए उन्होंने ट्रंप की नीतियों की आलोचना की. बिना नाम लिए अमेरिका पर प्रहार. ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया.
4. कनाडा सहित मध्यम देशों को घरेलू लचीलापन बढ़ाना होगा. नए गठबंधन और संस्थाएं बनानी चाहिए, पुरानी व्यवस्था वापस नहीं आ सकती.
5. भारत की भूमिका को उन्होंने नए वैश्विक क्रम में महत्वपूर्ण माना. कनाडा के साथ FTA और चीन-कतर जैसे साझेदारियां बढ़ाने का उल्लेख किया.
कार्नी साफ बोलते हैं
कार्नी की इस बात के लिए प्रशंसा की गई कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा वैश्विक व्यवस्था में पैदा किए गए भूचाल और दरारों का साफतौर पर आकलन किया. मध्यम शक्तियों यानि दुनिया की महाशक्तियों से अलग देशों से एक विशिष्ट मार्ग अपनाने में कनाडा का साथ देने का आग्रह किया. दुनिया के ज्यादातर नेता या तो ट्रंप की चापलूसी करते हैं या उन्हें उकसाने के डर से चुप रहते हैं. लेकिन कार्नी साफतौर पर बोलते हैं.
“कनाडा अमेरिका की वजह से ज़िंदा नहीं है”: कार्नी ने ट्रंप पर पलटवार किया
नई ऊर्जा भरने की कोशिश
कार्नी का भाषण ट्रंप के एक वर्ष के कामकाज से नाराज, थके हुए और भयभीत कनाडाई लोगों को आश्वस्त करने और उनमें ऊर्जा भरने का एक प्रयास लग रहा है. कार्नी ने मंगलवार को स्विट्जरलैंड में कहा, “हर दिन हमें यह याद दिलाया जाता है कि हम महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के युग में जी रहे हैं. नियमों पर आधारित व्यवस्था लुप्त हो रही है. शक्तिशाली अपनी मनमानी कर सकते हैं. कमजोरों को अपनी नियति का सामना करना पड़ता है.”
कार्नी ने साफ कहा कि अपने अस्तित्व के लिए देशों को अब ट्रंप के साथ “समझौता करने” का सिलसिला जारी नहीं रखना चाहिए. मध्यम शक्तियों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि अगर हम बातचीत की मेज पर नहीं होंगे, तो हम शिकार बन जाएंगे.”
ट्रंप अभी ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दे रहे हैं. कुछ महीने पहले उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कही थी, जिससे कनाडाई लोगों के बीच चिंता और आक्रोश पैदा हो गया था.
मार्क कार्नी ने कहा कि यह कनाडा के लिए एक अवसर है.
ट्रंप का पलटवार और जवाब
कार्नी के इस भाषण पर ट्रंप ने पलटवार भी कर दिया, “कनाडा को हमसे बहुत सी मुफ्त चीजें मिलती हैं. वैसे, उन्हें भी आभारी होना चाहिए, लेकिन वे नहीं हैं. मैंने कल आपके प्रधानमंत्री को देखा. वे इतने आभारी नहीं थे – कनाडा को तो हमारा आभारी होना चाहिए. कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है. मार्क, अगली बार जब आप बयान दें तो यह बात याद रखना.”
दावोस में दोनों व्यक्तियों की मुलाकात नहीं हुई. गुरुवार यानि 22 जनवरी को कार्नी ने वाक्पटुतापूर्ण पलटवार किया. उन्होंने कहा, “कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समृद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान में एक उल्लेखनीय साझेदारी बनाई है लेकिन कनाडा का अस्तित्व संयुक्त राज्य अमेरिका के कारण नहीं है. कनाडा इसलिए समृद्ध है क्योंकि हम कनाडाई हैं.
क्यों आधुनिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ भाषण माना जा रहा
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को इस भाषण के बाद स्टैंडिंग ओवेशन मिला. दुनिया भर में तारीफ हुई. लगातार हो रही है. क्योंकि यह स्पष्ट, ईमानदार और साहसिक था. कई लोगों ने इसे आधुनिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ भाषण बताया.
वह दुनिया के अन्य नेताओं से अलग इसलिए लगते हैं क्योंकि ईमानदार मूल्यांकन करते हैं. वह पहले ऐसे नेता हैं, जो सार्वजनिक तौर पर ये कहने का साहस रखते हैं कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब टूट रही है. वे मूल्यों पर आधारित विदेश नीति की बात करते हैं. व्यावहारिक तरीके से मध्य शक्तियों को एकजुट करने का सुझाव देते हैं ताकि वे अधीनस्थ न बनें.
वह कनाडा को एक स्वतंत्र पथ पर ले जाने की बात करते हैं, जो अन्य नेताओं की तुलना में अधिक बोल्ड लगता है. वह मध्य शक्तियों के गठबंधन को बढ़ावा देते हैं, जो उन्हें अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण लगाता है.
कनाडा में भी लोग कर रहे खूब तारीफ
कनाडा में मार्क कार्नी के दावोस के भाषण की प्रतिक्रिया बहुत सकारात्मक रही. बहुत से सोशल मीडिया पर लिखा, “आज मुझे कनाडाई होने पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है.” आखिरकार कोई नेता सच बोल रहा, डर नहीं रहा. उनके भाषण को बोल्ड, पॉवरफुल, ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कहा जा रहा.
कनाडा के बड़े मीडिया हाउसों CBC, CTV, Globe and Mail, Toronto Sun ने इसकी काफी प्रशंसा की. इसे बहुत ईमानदार” भाषण कहा. कई जगह कहा गया है कि कार्नी ने कनाडा को नया आत्मविश्वास और स्वतंत्र आवाज दी है.
मार्क कार्नी के बारे में पांच खास बातें
1. मार्क कार्नी कनाडा के 24वें प्रधानमंत्री हैं, जो वैश्विक वित्त जगत से सीधे राजनीति में आए. वह 2008-13 तक बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर रहे और 2013-20 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड के प्रमुख.
2. 2020 से वह संयुक्त राष्ट्र में जलवायु कार्रवाई और वित्त पर विशेष दूत रहे. ग्रीन फाइनेंस में अग्रणी भूमिका निभाई.
3. वह राजनीति में बहुत मंझे हुए खिलाड़ी नहीं हैं बल्कि नए ज्यादा हैं. वह जस्टिन ट्रूडो के उत्तराधिकारी के रूप में 2025 में लिबरल पार्टी नेता चुने गए, 85.9% वोटों से भारी जीत हासिल की.
4. मार्क कार्नी का व्यक्तित्व वैश्विक वित्तीय संकटों के दौरान शांत और रणनीतिक निर्णय लेने वाला रहा है. वह अनुभवी अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते हैं, जो जटिल मुद्दों को सरलता से प्रस्तुत करते हैं.
5. उनकी पत्नी भी अर्थशास्त्री हैं, जिससे उनकी मुलाकात ऑक्सफोर्ड में हुई थी. उनकी चार बेटियां हैं. परिवार आमतौर पर लोप्रोफाइल ही रहता है.
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