मर्द और औरत में बीपी का क्या है हिसाब, कितना है नॉर्मल रेंज, चार्ट से सब कुछ चल जाएगा पता

Normal range of BP in Men and Women: भारत में 4 में से एक वयस्क व्यक्ति को किसी न किसी तरह से ब्लड प्रेशर की बीमारी है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का तनाव और बिगड़ता खान-पान हमें एक ऐसी बीमारी की ओर धकेल रहा है जिसे हमारे लिए साइलेंट किलर की तरह काम करता है. चौंकाने वाली बात यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग 1.28 अरब लोग बढ़े हुए बीपी के शिकार हैं, लेकिन इनमें से 46 प्रतिशत को तो यह पता भी नहीं है कि वे इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं. ऐसे में मर्द और औरतों में कितना नॉर्मल बीपी होना चाहिए, यह जानना जरूरी है.

ब्लड प्रेशर क्या है?
ब्लड प्रेशर दो पैमानों पर मापा जाता है. ऊपर वाले नंबर को सिस्टोलिक कहते हैं, जो तब मापा जाता है जब दिल धड़कता है और खून को धमनियों में पंप करता है. नीचे वाले नंबर को डायस्टोलिक कहते हैं, जो दिल के दो धड़कनों के बीच आराम के समय का दबाव होता है. अक्सर हम 120/80 को आदर्श मानते हैं, लेकिन शोध बताते हैं कि यह उम्र और जेंडर (लिंग) के हिसाब से बदलता रहता है.

उम्र और जेंडर के हिसाब से सही रेंज
महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक संरचना और हार्मोनल बदलावों के कारण उनके बीपी की रेंज अलग-अलग हो सकती है. नीचे दिए गए चार्ट से आप अपनी सही स्थिति जान सकते हैं. 21 साल से 25 उम्र के बीच एक हेल्दी औरत में 115.5 से 70.5 के बीच बीपी होना चाहिए जबकि 31 से 35 साल के बीच यह कम होने लगता है. इस उम्र में औरतों का बीपी 110.5 और नीचे का 72.5 के बीच होना चाहिए.

                            महिला और पुरुष में उम्र के हिसाब से सही बीपी
उम्र                          पुरुष               महिला
18-39 साल              119/70           110/68
40-59 साल              124/77           122/74
60 साल से ज्यादा       133/69            139/68

बीपी के संकेतों को पहचानें
ब्लड प्रेशर का बढ़ना या घटना शरीर में कई छोटे-छोटे बदलाव लाता है जिन्हें हम अक्सर थकान या काम का बोझ समझकर टाल देते हैं. यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत जांच कराएं:

  • सुबह सोकर उठने के बाद सिर में हल्कापन या चक्कर आना.
  • अचानक नाक से खून आना .
  • लगातार सिरदर्द बने रहना या नजर में धुंधलापन.
  • हाथों-पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट.
  • सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ.
  • डब्ल्यूएचओ का कहना है कि करीब 70 करोड़ लोग इलाज इसलिए नहीं कराते क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि उनका बीपी हाई है. यही अनदेखी आगे चलकर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और किडनी फेलियर का कारण बनती है.

पुरुषों और महिलाओं में बीपी अलग  
पुरुषों में अक्सर 31 से 35 साल के बीच बीपी 114.5/75.5 के आसपास रहता है, लेकिन 40 की उम्र पार करते ही इसमें तेजी से उछाल आने लगता है. वहीं महिलाओं में गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान बीपी में काफी उतार-चढ़ाव देखा जाता है. महिलाओं में हाई बीपी होने पर आंखों के पास लाल धब्बे या स्किन पर रेशेज जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं.

बीपी को कंट्रोल करने के 5 अचूक तरीके

यदि आपका बीपी चार्ट में दी गई रेंज से बाहर जा रहा है, तो दवाओं के साथ-साथ लाइफस्टाइल में ये बदलाव करें.

  1. नमक और चीनी पर लगाम: ज्यादा नमक (सोडियम) धमनियों में पानी रोकता है जिससे दबाव बढ़ता है. प्रोसेस्ड फूड और पैकेट बंद चिप्स से तौबा करें.
  2. रोजाना एक्सरसाइज: कम से कम 30 मिनट की पैदल सैर या योग दिल की मांसपेशियों को बनाता है.
  3. सिगरेट और शराब से दूरी: ये दोनों चीजें रक्त वाहिकाओं को संकुचित करती हैं, जिससे बीपी तुरंत शूट करता है.
  4. तनाव प्रबंधन : गहरी सांस लेने वाले व्यायाम और मेडिटेशन को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
  5. नियमित जांच: घर पर एक डिजिटल बीपी मशीन रखें और सप्ताह में कम से कम एक बार अपनी रीडिंग नोट करें.

ब्लड प्रेशर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे ठीक न किया जा सके, लेकिन यह कोई ऐसी बीमारी भी नहीं जिसे नजरअंदाज किया जाए. अपने डॉक्टर से नियमित परामर्श लें और ऊपर दिए गए चार्ट के अनुसार अपनी सेहत का आकलन करें. याद रखें, एक स्वस्थ दिल ही लंबे जीवन की कुंजी है.

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