High triglycerides in children: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान हमारी सेहत पर कितना प्रतिकूल असर डाल रही है, ये किसी से छिपा नहीं है. लेकिन, अगर इसका प्रभाव बच्चों पर भी दिखने लगे तो चिंता का विषय जरूर है. खराब खानपान के चलते तमाम तरह की बीमारियां बचपन से ही सताने लगती हैं. इसकी एक बानगी हाल ही में हुए रिसर्च में देखने को मिली. बच्चों की सेहत को लेकर आई इस सरकारी रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 5 से 9 साल की उम्र के हर तीन में से एक बच्चा हाई ट्राइग्लिसराइड्स से जूझ रहा है. यह समस्या बच्चों में शुरुआती उम्र से ही हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है.
बंगाल में प्रभावित बच्चों का प्रतिशत सबसे अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, इस उम्र वर्ग में सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल में मिले हैं, जहां 67 प्रतिशत बच्चों में हाई ट्राइग्लिसराइड्स पाए गए. इसके बाद सिक्किम (64 प्रतिशत), असम (57 प्रतिशत), नागालैंड (55 प्रतिशत) और मणिपुर (54.7 प्रतिशत) का नंबर आता है. वहीं, केरल (16.6 प्रतिशत) में यह अनुपात सबसे कम है. देश का औसत देखें तो 34 प्रतिशत बच्चे हाई ट्राइग्लिसराइड्स से प्रभावित हैं, यानी हर तीन में से एक बच्चा इस समस्या का सामना कर रहा है.
10 से 19 साल के किशोरों में ट्राइग्लिसराइड्स
अगर बात करें कि, 10 से 19 साल के किशोरों की, तो वहां ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर ज़्यादा मामलों में नहीं पाया गया. भारत में इस उम्र-ग्रुप के सिर्फ़ 16% किशोरों का ट्राइग्लिसराइड लेवल अधिक पाया गया, और 4% से भी कम में उच्च LDL कोलेस्ट्रॉल था. इस उम्र वर्ग में, गोवा और केरल में उच्च LDL होने वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई जो 15.3% और 14.9% है.
बात करें किशोरों की तो, ट्राइग्लिसराइड्स अधिक पाए जाने की बातों में, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मामले सामने आए. यहां बच्चे जो 10-19 साल की उम्र के हैं, उनमें 42.5% में उच्च ट्राइग्लिसराइड्स पाई गई. उसके बाद सिक्किम (39.4%) और मणिपुर (38%) थे, जबकि महाराष्ट्र में सबसे कम 6.4% बच्चों में इसके लक्षण पाए गए.
ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या बढ़ने की वजह
– खराब खानपान
– कम शारीरिक एक्टिविटी
– फ्राइड खाने की लत
– मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड फूड
– खेल के समय मोबाइल चलाने की लत
– फिजिकल खेल में दूरी
ट्राइग्लिसराइड्स से कैसे करें बचाव
एक्सपर्ट के मुताबिक, ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या से बच्चों को बचाने के लिए माता-पिता को सतर्कता बरतनी होगी. ऐसे में ध्यान रखें कि, बचपन से ही बच्चों में हेल्दी खाने की आदतें डालें. ताजे फल, सब्जियां, सूखे मेवे और नियमित फिजिकल एक्टिविटी को लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं. जितनी जल्दी ये सब बदलाव करेंगे, उतनी जल्दी बच्चे हेल्दी जीवन जी सकेंगे.