पाक की रगों में वायरस की तरह घुसा है तालिबान, तबाही के लिए बस एक इशारा काफी

Pakistan-Afghanistan War: पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है. इस तरह आतंकवादियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान आंतरिक के साथ बाहरी अस्थिरता के दौर से भी गुजर रहा है. अब सबसे बड़ी चुनौती सीमाओं के बाहर से भी खड़ी हो गई है. अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान की वैचारिक और रणनीतिक छाया अब पाकिस्तान के अंदर गहराई तक फैल चुकी है. सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रभाव किसी ‘वायरस’ की तरह देश की नसों में प्रवेश कर चुका है, जिसे रोकना इस्लामाबाद के लिए दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है. पाकिस्‍तान के रक्षा मंत्री ख्‍वाजा आसिफ ने तो तालिबान शासित अफगानिस्‍तान के खिलाफ खुल्‍लम-खुल्‍ला जंग का ऐलान कर दिया है. अब यदि तालिबान लीडरशिप ने एक इशारा कर दिया तो शाहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के देश के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा. जिस परमाणु बम के दम पर शाहबाज शरीफ चौड़े होकर घूमते हैं, वो बम तहखाने में ही धरे के धरे रह जाएंगे.

पाकिस्‍तान के लिए विशेष चिंता का विषय है Tehrik-i-Taliban Pakistan (टीटीपी), जिसने हाल के वर्षों में अपने हमलों की रफ्तार और तीव्रता दोनों बढ़ाई हैं. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांत में पुलिस चौकियों, सैन्य ठिकानों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले हो रहे हैं. पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशनों के बावजूद टीटीपी की संगठनात्मक क्षमता और भर्ती तंत्र कमजोर नहीं पड़ा है. उलटे अफगान सीमा पार सुरक्षित पनाहगाह मिलने के आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है. साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि नई हुकूमत उसके लिए रणनीतिक गहराई (स्ट्रैटेजिक डेप्थ) का साधन बनेगी, लेकिन जमीन पर तस्वीर उलट नजर आई. टीटीपी ने नई ऊर्जा के साथ अपने नेटवर्क को सक्रिय किया और कई इलाकों में समानांतर दबदबा बनाने की कोशिश की. पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच हुई वार्ताएं भी बेनतीजा रहीं, जिसके बाद हिंसा का ग्राफ फिर तेजी से ऊपर गया.

तालिबान के पास मौजूद हथियारों के बारे में स्‍पष्‍ट जानकारी नहीं, पर उनके पास भी कुछ खतरनाक वेपन होने की बात कही जाती है (फाइल फोटो/Ruters)

पाकिस्‍तान के लिए भस्‍मासुर

पाकिस्तान की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि दशकों तक जिन गैर-राज्य कारकों (Non State Actors) को ‘रणनीतिक संपत्ति’ समझा गया, वही अब आंतरिक के साथ बाहरी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. तालिबान और टीटीपी का फैलाव केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरी नेटवर्क, धार्मिक संगठनों और ऑनलाइन प्रचार तंत्र के जरिए व्यापक सामाजिक असर छोड़ रहा है. पाकिस्तान एक परमाणु शक्ति है और उसके पास दर्जनों परमाणु हथियार मौजूद हैं. लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों का तर्क है कि परमाणु बम पारंपरिक युद्ध में प्रतिरोधक (डिटरेंस) का काम तो कर सकते हैं, परंतु आतंरिक विद्रोह, गुरिल्ला हमलों और आत्मघाती आतंकवाद के खिलाफ वे लगभग निष्प्रभावी हैं. यदि राज्य की आंतरिक स्थिरता ही डगमगा जाए, तो परमाणु क्षमता भी व्यावहारिक रूप से बेअसर साबित हो सकती है.

दोनों देशों के बीच तनाव की ताजा स्थिति क्या है?
सीमा पार झड़पें तेज हो गई हैं. दोनों पक्ष भारी नुकसान का दावा कर रहे हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसे खुला युद्ध तक करार दिया है, जिससे हालात और गंभीर माने जा रहे हैं.

समग्र सैन्य क्षमता में कौन आगे है?
लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान की सैन्य ताकत अफगानिस्तान से कई गुना अधिक है. पाकिस्तान भर्ती, प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों के मामले में मजबूत स्थिति में है, जबकि तालिबान शासन की सैन्य क्षमता घटती बताई गई है.

पाकिस्तान की सैन्य संरचना कितनी बड़ी है?
पाकिस्तान के पास कुल 6.6 लाख सक्रिय सैनिक हैं. इनमें 5.6 लाख सेना में, 70 हजार वायुसेना में और 30 हजार नौसेना में तैनात हैं.

अफगानिस्तान की सैन्य संख्या कितनी है?
तालिबान के पास करीब 1.72 लाख सक्रिय सैन्यकर्मी हैं. हालांकि, उसने संख्या बढ़ाकर 2 लाख करने की योजना घोषित की है, लेकिन फिलहाल उसकी ताकत पाकिस्तान से काफी कम है.

जमीनी हथियारों और तोपखाने में तुलना कैसी है?
पाकिस्तान के पास 6,000 से अधिक बख्तरबंद लड़ाकू वाहन और 4,600 से ज्यादा तोपें हैं. अफगान बलों के पास सोवियत दौर के टैंक और बख्तरबंद वाहन तो हैं, लेकिन उनकी सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है.

वायुसेना की ताकत किसके पास अधिक है?
पाकिस्तान के पास 465 लड़ाकू विमान और 260 से अधिक हेलीकॉप्टर हैं. अफगानिस्तान के पास कोई आधुनिक लड़ाकू विमान नहीं है. उसके पास कम से कम छह पुराने विमान और 23 हेलीकॉप्टर बताए जाते हैं, जिनमें से कितने उड़ान योग्य हैं, यह स्पष्ट नहीं है.

परमाणु क्षमता में क्या स्थिति है?
पाकिस्तान एक परमाणु संपन्न देश है और उसके पास लगभग 170 परमाणु वारहेड हैं. अफगानिस्तान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं है.

आधुनिकीकरण की स्थिति क्या है?
पाकिस्तान अपने परमाणु कार्यक्रम, नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण में लगातार निवेश कर रहा है, जिसमें चीन उसका प्रमुख रक्षा साझेदार है. दूसरी ओर, तालिबान सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता न मिलने के कारण सैन्य आधुनिकीकरण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

आरोप-प्रत्‍यारोप के बाद अब जंग

आर्थिक संकट भी इस अस्थिरता को बढ़ा रहा है. महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक ध्रुवीकरण ने आम नागरिकों में असंतोष को जन्म दिया है. ऐसे माहौल में कट्टरपंथी संगठनों के लिए जमीन तैयार होती है, जहां वे व्यवस्था-विरोधी भावनाओं को अपने पक्ष में मोड़ सकें. राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार बदलते सत्ता समीकरणों ने भी सुरक्षा रणनीति में निरंतरता को प्रभावित किया है. इस्लामाबाद और काबुल के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच अब बात जंग तक पहुंच चुकी है. पाकिस्तान का कहना है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों के लिए हो रहा है, जबकि अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इस कूटनीतिक तनातनी ने आतंकवाद-रोधी समन्वय को और कमजोर किया है. हालांकि, पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऑपरेशन चला रही हैं और कई शीर्ष कमांडरों को मार गिराने का दावा भी करती रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. इसके लिए राजनीतिक संवाद, सीमा प्रबंधन, आर्थिक सुधार और चरमपंथ के वैचारिक प्रतिरोध की समग्र रणनीति जरूरी होगी.

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