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Women Empowerment Story: राजधानी पटना के सरस मेला में इन दिनों महिला उद्यमियों का जमावड़ा लगा हुआ है. जीविका से जुड़कर अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहीं महिलाओं में शेखपुरा जिले की रहने वाली कृष्णा देवी की कहानी बेहद प्रेरणादायक है. दरअसल, शादी के बाद पति की नौकरी के चलते चेन्नई गई कृष्णा देवी ने अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर न सिर्फ खुद की अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने पति को भी अपने कारोबार में साझेदार बना लिया. उनकी सफलता ऐसी रही कि पति ने चेन्नई की नौकरी छोड़ दी. अब दोनों बिहार में रहकर ही महज कुछ ही दिनों में लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.
लोकल 18 से बातचीत में कृष्णा देवी बताती हैं कि शादी के बाद उनके पति चेन्नई में काम करते थे, इसलिए वह भी उनके साथ चेन्नई चली गई. पति के ड्यूटी पर चले जाने के बाद वह दिनभर अकेली रहती थी. अकेलापन दूर करने के लिए उन्होंने आसपास की महिलाओं के साथ मिलकर वहां की प्रसिद्ध स्थानीय पेंटिंग तंजौर आर्ट सीखनी शुरू की.

जब घर में कोई नहीं होता था, तब वह खुद ही पेंटिंग बनाया करती थी. इसी दौरान लॉकडाउन लग गया और पूरा परिवार वापस बिहार लौट आया. बिहार आने के बाद उन्हें जीविका से जुड़ने का मौका मिला. जो पेंटिंग उन्होंने शौक के तौर पर सीखी थी, वही उनकी कमाई का जरिया बन गई. कृष्णा देवी बताती हैं कि वह साल 2020 से लगातार तंजौर पेंटिंग बना रही हैं और 2022 से सरस मेला से जुड़ी हुई हैं. तब से हर साल वह सरस मेला में अपने उत्पादों के साथ हिस्सा लेती आ रही हैं.

कृष्णा देवी द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स की कीमत हजारों से लेकर लाखों रुपये तक होती है. इन पेंटिंग्स की कीमत अधिक होने की वजह यह है कि इन्हें 22 कैरेट सोने और प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता है. उनके काउंटर पर 6 हजार रुपये से लेकर 2 लाख 55 हजार रुपये तक की पेंटिंग्स उपलब्ध हैं.लोकल 18 से बातचीत में कृष्णा देवी बताती हैं कि इन पेंटिंग्स का निर्माण प्लाई बोर्ड पर किया जाता है. सबसे पहले प्लाई पर कपड़ा चिपकाया जाता है. इसके बाद इमली के बीज का पाउडर, अरबी का गोंद और फेविकोल को मिलाकर उस पर कोटिंग की जाती है.
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कोटिंग सूखने के बाद जिस आकृति की पेंटिंग बनानी होती है, उसका स्केच तैयार किया जाता है और उसी दौरान स्टोन भी सेट कर दिए जाते हैं. इसके बाद 22 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है. फिर बेहद बारीकी से सभी स्टोन्स को उभारा जाता है. अंत में सब्जियों से तैयार किए गए प्राकृतिक रंगों से पेंटिंग को रंगा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के बाद तंजौर पेंटिंग पूरी तरह तैयार होती है.

कृष्णा देवी बताती हैं कि सरस मेला में आने से उनके रोजगार को पंख मिल गए हैं. यहां आने वाले आम से लेकर खास तक, सभी लोग उनकी पेंटिंग्स की जमकर तारीफ कर चुके हैं. वह बताती हैं कि शेखपुरा के जिलाधिकारी को भी उन्होंने तंजौर पेंटिंग बनाना सिखाया है. सीएम नीतीश कुमार भी इसकी तारीफ कर चुके हैं.इसके अलावा, वह 10 से 12 अन्य महिलाओं को भी इस कला का प्रशिक्षण दे रही हैं. सभी महिलाएं उनके साथ जुड़कर काम कर रही हैं. कृष्णा देवी कहती हैं कि वह अपनी पेंटिंग्स के साथ देशभर में लगने वाले अलग-अलग मेलों और आयोजनों में जाती हैं, जहां उन्हें अच्छा कारोबार मिलता है.

कृष्णा देवी की तंजोर पेंटिंग्स की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. साल 2024 में पटना के गांधी मैदान में आयोजित सरस मेला के दौरान बालाजी की एक पेंटिंग साढ़े तीन लाख रुपये में बिकी. इसी मेले में लक्ष्मी जी की एक पेंटिंग 2 लाख 65 हजार रुपये में खरीदी गई. इतना ही नहीं, पिछले साल स्मॉल साइज की पेंटिंग्स की बिक्री भी 3 लाख रुपये से अधिक रही. कुल मिलाकर 2024 में इन्होंने सरस मेले से 12 से 15 लाख रूपये तक का कारोबार किया.

वहीं 2025 में दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित मेले में उनकी एक पेंटिंग 2 लाख 65 हजार रुपये में बिकी, जबकि स्मॉल साइज की एक पेंटिंग 3 लाख रुपये में खरीदी गई. इसके अलावा दिल्ली के नोएडा हाट में भी बालाजी और लक्ष्मी जी की दो पेंटिंग्स 2 लाख 65 हजार रुपये प्रति पेंटिंग के हिसाब से बिकीं, जिन्हें खरीदने वाले ग्राहक इन्हें अपने साथ अमेरिका ले गए. इस साल के सरस मेला में भी लोगों का अच्छा रिस्पांस मिल रहा है.
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