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लिप्टस (नीलगिरी/सफेदा) के पत्ते अपने औषधीय गुणों के कारण सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसमें एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण होते हैं. जो सर्दी, खांसी, बंद नाक और सांस संबंधी समस्याओं में भाप या काढ़े के रूप में राहत दिलाते हैं. इसके तेल का उपयोग जोड़ों के दर्द, त्वचा संक्रमण को कम करने और मानसिक स्पष्टता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है.
डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि लिप्टस के पत्ते और तेल अपनी एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल और सूजन-रोधी गुणों के कारण सांस की समस्याओं जैसे सर्दी, खांसी, अस्थमा और जकड़न के लिए रामबाण माने जाते हैं. इसकी भाप या चाय का सेवन कफ को पतला कर बाहर निकालने में मदद करता है.
लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते और तेल में दर्द निवारक और सूजन-रोधी गुण होते हैं. जो जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और सूजन में बहुत प्रभावी हैं. इन्हें नारियल या जैतून के तेल में मिलाकर मालिश करने, गर्म पानी में डालकर भाप लेने या चाय के रूप में सेवन करने से राहत मिलती है.
लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते फ्लेवोनोइड्स और टैनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. जो शरीर को फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं. यह सूजन को कम करने, श्वसन रोगों (सर्दी-जुकाम), और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत मददगार है.
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लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने शक्तिशाली रोगाणुरोधी और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. यह मुँहासे, फंगल इन्फेक्शन को कम करने और घावों को भरने में मदद करते हैं. साथ ही त्वचा को नमी प्रदान कर उसे हाइड्रेटेड रखते हैं. इन्हें आमतौर पर भाप, काढ़े, या तेल (कैरियर ऑयल के साथ) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुणों के कारण मौखिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन हैं. ये मसूड़ों की बीमारी, कैविटी और दांतों की सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं. इनके उपयोग से सांसों की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़ों से खून आना भी कम हो सकता है.
लिप्टस (नीलगिरी) के पत्ते अपने जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों के कारण दांतों और मसूड़ों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. ये मसूड़ों से खून आना, प्लाक (पट्टिका) कम करने और कैविटी को रोकने में मदद कर सकते हैं. जिससे दांतों की मजबूती बनी रहती है. इसके एंटीसेप्टिक गुणों के कारण, इसका उपयोग मसूड़ों की सूजन और पायरिया जैसी समस्याओं के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है.
लिप्टस (नीलगिरी/सफेदा) के पत्तों में शक्तिशाली जीवाणुनाशक, रोगाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो मुख्य रूप से उनके आवश्यक तेल के कारण होते हैं। यह स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ते हैं, श्वसन संक्रमण, खांसी-जुकाम, साइनस, घावों को ठीक करने और त्वचा की समस्याओं में राहत देने के लिए उपयोगी होते हैं.