रिलेशनशिप एडवाइज- मुझे सच्चा प्यार नहीं मिला: न कोई शाहरुख खान आया, न पेट में तितलियां उड़ीं, क्या मैं कुछ ज्यादा ही फिल्मी हूं

31 मिनट पहले

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सवाल: मैं 27 साल की हूं, दिल्ली यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर हूं और अभी सिंगल हूं। इससे पहले मैं तीन रिलेशनशिप में रही, लेकिन हर बार लगा कि ये प्यार नहीं है। मुझे कभी वो फीलिंग ही नहीं मिली, जो प्यार में महसूस होती है। न पेट में तितलियां, न बैकग्राउंड म्यूजिक, न बालों को उड़ाती ठंडी-धीमी हवा….।

मैंने प्यार को हमेशा उसी रोमांटिक, ड्रीमी तरीके से सोचा है, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है, लेकिन मुझे कभी महसूस नहीं हुआ। जब मैंने ये बात दोस्तों से कहती हूं तो वे बोलते हैं कि मैं प्यार को बहुत फिल्मी तरीके से देखती हूं।

क्या सच में मैं प्यार को गलत नजरिए से देख रही हूं? क्या फिल्मों ने मेरे मन में प्यार की एक ऐसी छवि बना दी है जिसे असल रिश्ते पूरा नहीं कर पाते? या फिर मुझे अब तक बस सही इंसान नहीं मिला? मुझे कैसे समझ आएगा कि जो मेरे सामने है, वह सच्चा प्यार है या सिर्फ साथ होने की आदत है?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब: सबसे पहले ये समझिए कि आपने जो लिखा, वो मौजूदा समय में 60-70% से ज्यादा यंग लड़के-लड़कियां अपने दोस्तों को वॉट्सऐप पर टाइप करके डिलीट कर देते हैं। आपने पूछ लिया, मतलब आपमें हिम्मत है। आपको इस बात की शाबाशी भी मिलनी चाहिए।

आप कह रही हो कि प्यार में कभी आपके पेट में तितलियां नहीं उड़तीं, ठंडी हवा नहीं चलती, गाना नहीं बजता। क्या आपको पता है कि आप ये सब नहीं महसूस कर रही हैं और ये नॉर्मल है। चलिए आपकी समस्या को एक-एक करके समझते हैं।

प्यार का फिल्मी चश्मा उतारिए

बचपन से हमने अपने आसपास प्यार कभी देखा-सुना नहीं होता है। मम्मी-पापा ने एक-दूसरे को आई लव यू नहीं कहा होता है, बस चाय बनाकर रख दी।

हमने समझा प्यार चाय बनाना नहीं, चांद तोड़कर लाना है। फिर फिल्मों में शाहरुख-काजोल को देखा। हमने मान लिया, प्यार का मतलब है ट्रेन के दरवाजे पर लटकना। पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक का बजना। अब दिमाग में एक चेकलिस्ट बन गई-

  • प्यार मिलने पर दिल धक-धक करेगा।
  • आंखों में आंखें डालते ही दुनिया गायब हो जाएगी।
  • हर बार मिलने पर नया सरप्राइज मिलेगा।

आप प्यार को जिस तरह से देख रही हैं, उस हिसाब से आप अपने पिछले तीन रिलेशनशिप में इसी तरह की चेकलिस्ट लेकर गई थीं। चेकबॉक्स खाली रह गया तो आपको लगा कि ये प्यार नहीं है।

वास्तव में प्यार में इससे बहुत अलग महसूस होता है-

तितलियां उड़ने का मतलब एंग्जाइटी, प्यार नहीं है

साइंस की मानें तो प्यार में पेट में तितलियां उड़ना प्यार नहीं है, बल्कि यह एंग्जाइटी और एक्साइटमेंट के कारण होता है।

असल में जब आप किसी को पसंद करने लगते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन और नॉरएपीनेफ्रिन नाम के हॉर्मोन तेजी से बढ़ते हैं। यही केमिकल तब भी बनते हैं, जब हम रोलर-कोस्टर पर बैठते हैं। यानी डर और उत्साह का एक साथ एहसास, जिसे हम रोमांटिक समझ लेते हैं। जबकि सच्चा प्यार इससे अलग होता है।

असली प्यार में शरीर में ऑक्सीटोसिन बढ़ता है, वही हॉर्मोन जो मां के बच्चे को गोद में लेते समय रिलीज होता है। इसका एहसास परेशान करने वाला नहीं होता है, बल्कि शांति और सुरक्षा देता है।

जब आप खुद से ये सवाल पूछेंगे तो आपको खुद ही समझ में आएगा कि ये प्यार है या नहीं।

प्यार और आदत में फर्क समझें

प्यार और आदत में फर्क एहसास की गहराई से समझ आता है। आदत वह है, जहां आप किसी की मौजूदगी के आदी हो जाते हैं- जैसे रोज बात करना, साथ समय बिताना और अचानक उससे दूरी होने पर खालीपन महसूस होना। लेकिन उसमें भावनात्मक समझ और सम्मान हमेशा नहीं होता है।

वहीं सच्चा प्यार सिर्फ साथ रहने की आदत नहीं, बल्कि साथ रखने की इच्छा है। प्यार में आप सामने वाले के भले के बारे में सोचते हैं, उसकी खुशियों, परेशानियों और विकास में खुद को शामिल महसूस करते हैं। आदत में बस कमी खलती है, जबकि प्यार में उपस्थित होना सुकून देता है। आदत पकड़ कर रखती है, प्यार आजादी देता है, फिर भी दिल को जोड़कर रखता है।

अब तक सही इंसान नहीं मिला या आप तैयार नहीं थीं?

कई बार सवाल यह नहीं होता कि सही इंसान नहीं मिला, बल्कि यह कि हम खुद उस प्यार को समझने और ग्रहण करने के लिए तैयार थे या नहीं। रिश्ते उम्र से नहीं, भावनात्मक परिपक्वता से चलते हैं।

आपके पहले के रिश्तों में हो सकता है कि आप प्यार को किसी फिल्मी एहसास की तरह ढूंढ रही थीं। कुछ बड़ा, नाटकीय, दिल को हिला देने वाला।

इसलिए शांत, स्थिर और असली जुड़ाव नजर नहीं आया। यह भी संभव है कि सामने वाले लोग आपकी भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने वाले न रहे हों। सच यह है कि प्यार तब आता है जब दोनों लोग तैयार, ईमानदार और सच में एक-दूसरे से जुड़ने को इच्छुक हों। इसलिए खुद को दोष न दें। आप सीख रही थीं, समझ रही थीं और अब शायद पहले से ज्यादा तैयार हैं।

अब क्या करें, सुकून वाला प्यार ढूंढने का तरीका

पहली बात तो अपने पुराने प्यार के पैमाने फाड़ दें। पेट में तितलियां उड़ने वाली लिस्ट को छोड़कर एक नई लिस्ट बनाइए। इसमें खुदे से पूछिए कि

  • क्या मैं इसके साथ वैसी हूं, जैसी होना चाहती हूं?
  • अगले 30 दिन का सुकून एक्सपेरिमेंट करें।
  • किसी नए व्यक्ति को तुरंत जज न करें।

महसूस करें कि-

  • उसके साथ 10 मिनट रहने पर सांस हल्की होती है या भारी?
  • उसकी बातें दिल को शांत करती हैं या थका देती हैं?

अगर सुकून मिले, तो यह वही शख्स है, जिसके साथ रहा जा सकता है। रिश्ते की शुरुआत दोस्ती से करें, बिना लेबल के साथ समय बिताएं। हर हफ्ते कहीं लिखें कि आपको सबसे सुरक्षित कब महसूस हुआ। कुछ महीने बाद पैटर्न साफ दिखेगा। सच्चा प्यार वही है, जहां शांति मिलती है। उसके सामने किसी भी चीज की एक्टिंग नहीं करनी पड़ती है।

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