राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में मंगलवार को कार्यपरिषद (ईसी) की बैठक हुई। इसमें वर्ष 2015-16 से 2023-24 तक की अवधि के हुए फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इस दौरान वित्तीय अनियमितताओं उजागर हुई। इनको ईसी मेंबर्स ने कहा कि
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प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच संभव नहीं है। इसलिए सीबीआई से कराने राज्य सरकार को सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा भेजी जाए। मध्यप्रदेश में संभवत: पहली बार ऐसा अवसर आया है जब किसी विवि के कार्यपरिषद सदस्यों ने वहां उजागर वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
दैनिक भास्कर ने 27 नवंबर के अंक में इस बात का खुलासा किया था कि फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में 116 करोड़ रुपए से अधिक की अनियमितता सामने आई हैं। वहीं ईसी बैठक के दौरान ईसी मेंबर्स ने पूछा कि आरजीपीवी ने कितनी एफडी कराई। इसको लेकर रजिस्ट्रार डॉ. मोहन सेन ने बताया कि विवि ने करीब 2246 एफडी कराई गईं। इनमें से करीब 800 एफडी ट्रेस नहीं हो पा रही हैं।
विवि में रिकॉर्ड उबलब्ध नहीं और बैंक भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। एक एफडी को ट्रेस करने में करीब 200 दिन लग जाते हैं। बार-बार पत्र लिखे जाने पर भी संबंधित बैंक से जवाब नहीं मिलता। इस पर ईसी मेंबर्स ने कहा कि लीगल नोटिस जारी करना चाहिए।
लेकिन राज्यपाल द्वारा नियुक्त ईसी मेंबर्स ने कहा कि पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। सीबीआई जांच करेगी तो बैंक दो घंटे में जानकारी उपलब्ध कराने लगेगी। बैंक अभी भी जानकारी नहीं दे रहे हैं तो वे आगे जानकारी देंगे, इस पर कैसे भरोसा कर सकते हैं। इससे मामला कोर्ट-कचहरी में और फंस जाएगा।
डॉ. एसके गांधी, डॉ. संजय दीक्षित, डॉ. संगीता चौहान, कुणाल जियानी, डॉ. सुधीर सिंह भदौरिया, डॉ. संजय सिलाकारी आदि ने उच्च स्तरीय जांच सीबीआई से कराने को कहा है। बैठक में 14 मेंबर मौजूद रहे। इस पर अन्य सदस्यों ने भी सहमति दी। बैठक की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. एससी चौबे ने की।
कार्यपरिषद की बैठक में रात 10 बजे मिनिट्स तैयार हुए
- वित्तीय वर्ष 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट को रिव्यू करने और सत्यापित डेटा न होने पर जिम्मेदार अधिकारियों/ऑडिटर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 की संशोधित रिपोर्ट को रिव्यू उपरांत सार्वजनिक करने की अनुमति दी ।
- फोरेंसिक ऑडिट के अधूरे कार्यों के लिए संबंधित एजेंसी को लीगल नोटिस जारी करने और अतिरिक्त फीस मामले पर नियमानुसार निर्णय करने के निर्देश।
- जिन एफडीआर की प्रतिलिपियां उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें बैंक से प्राप्त कर उचित नस्तियों में संधारित करने के लिए विश्वविद्यालय को निर्देशित किया गया।
- अनट्रेसेबल और अनियमितता वाली एफडीआर पर 15 दिन में सूचना न मिलने पर संबंधित बैंकों को लीगल नोटिस भेजने हेतु विश्वविद्यालय को अधिकृत किया गया।
- परीक्षा शाखा के 39.88 लाख रुपए की चेक क्लोनिंग से हुई हेराफेरी पर आवश्यक कार्रवाई और अलग नस्ती तैयार करने के निर्देश।
धरने पर एबीवीपी कार्यकर्ता बैठे रहे
इधर, बैठक शुरू होने से पहले एबीवीपी कार्यकर्ता आरजीपीवी पहुंचे और ईसी की बैठक खत्म होने तक वीसी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे रहे। एबीवीपी ने ईसी मेंबर्स और विवि प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर सीबीआई से जांच कराने की मांग रखी। ईसी की बैठक दोपहर 3 बजे शुरू हुई और शाम 6 बजे तक चली।
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