गुणवत्ता सुधार: पीडब्ल्यूडी के नए एसओआर में तकनीक पर जोर, 2022 में सिर्फ दरों में हुआ था सुधार – Bhopal News

मप्र लोक निर्माण विभाग की ओर से लागू किए गए शेड्यूल ऑफ रेट (एसओआर) में पहली बार ऐसी तकनीकों को भी जोड़ा गया है, जिनके इस्तेमाल से गुणवत्ता में सुधार के दावे किए जा रहे हैं। इनमें भूजल स्तर में सुधार के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग और लोक सरोवर जैसी व्यव

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प्लास्टिक वेस्ट से सड़कों के निर्माण और बैंबू क्रश बैरियर के इस्तेमाल को भी एसओआर में शामिल किया है। इससे पहले वर्ष 2022 में पीडब्ल्यूडी ने एसओआर में बदलवा किया था। तब सिर्फ दरों में सुधार किया गया, पर अब एसओआर के आइटम 309 से बढ़ाकर 817 कर दिए गए हैं। ये दरें भी मौजूदा बाजार भाव के आधार पर सुधारी गई हैं।

ईएनसी केपीएस राणा का कहना है कि एसओआर केवल इंजीनियरिंग दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक विजन है। इससे प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूती आएगी और लोगों का कहीं आने-जाने में काफी वक्त भी बचेगा। यह विजन 2047 की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम भी है, जिसे पर्यावरणीय सुधार, गुणवत्ता नियंत्रण के उपाय और नई तकनीक के आधार पर शुरू किया जा रहा है।

भास्कर एक्सक्लूसिव…भूजल स्तर सुधारा जाएगा, इससे पीने योग्य जल स्रोतों पर निर्भरता घटे

पर्यावरणीय सुधार के प्रावधान रेन वाटर हार्वेस्टिंग: (आइटम 10.53–10.57) भूजल स्तर में तेजी से हो रही गिरावट को रोकने के लिए यह व्यवस्था अहम है। सड़क किनारे और फ्लाई ओवर ड्रेनेज से पानी इकट्ठा कर भूजल स्तर सुधारा जाएगा। इससे पीने योग्य जल स्रोतों पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय जल संकट से राहत मिलेगी।

वृक्षारोपण व ट्रांसप्लांटेशन (आइटम 11.9, 11.23) शहरी क्षेत्रों की हरियाली को संरक्षित करने के लिए पुराने पेड़ों को काटने की बजाय स्थानांतरित किया जाएगा। यह जलवायु संतुलन, वायु गुणवत्ता सुधार व ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद करेगा। लोक सरोवर सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई मिट्टी निकालने से बने गड्ढों को जल संग्रहण केंद्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इससे वर्षा जल संचयन, मवेशियों के लिए जल स्रोत व ग्राम पंचायतों को स्थायी उपयोग के लिए जल निकाय मिलेंगे।

गुणवत्ता नियंत्रण के उपाय ट्रायल लेंथ व लेबोरेटरी परीक्षण: निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाती है। इससे खराब सामग्री या घटिया काम की पहचान शुरू में ही हो जाती है। इससे लंबे समय तक सड़कों की गुणवत्ता मजबूत बनी रहेगी। बिटुमिन सरकारी रिफाइनरी से ही: एसओआर में ही प्रावधान कर दिया गया है कि गुणवत्ता युक्त बिटुमिन अब केवल सरकारी रिफाइनरी से ही खरीदा जाएगा। कोई भी कॉन्ट्रेक्टर बाहर या निजी कंपनियों के बिटुमिन का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। इससे सड़कों की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

नई तकनीक प्लास्टिक वेस्ट: (आइटम 5.22) प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण प्रदूषण में कमी आती है और सड़कें अधिक मजबूत बनती हैं। प्लास्टिक निस्तारण की समस्या भी सुलझती है। फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (आइटम 4.19) पुरानी सड़कों की सामग्री दोबारा इस्तेमाल में लाई जा सकती हैं। इससे लागत में बचत होती है और ट्रैफिक कम बाधित होता है। व्हाइट टॉपिंग: यह सतह पर मजबूत कंक्रीट की परत बनाता है, जो भारी ट्रैफिक और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों के लिए आदर्श है। इससे सड़कें लंबे समय तक सही स्थिति में रहती हैं। बैंबू क्रश बैरियर (आइटम 8.54) प्रदेश के बालाघाट, छिंदवाड़ा जैसे उन क्षेत्रों में जहां बांस की पैदावार ज्यादा है, वहां यह एक किफायती विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो सकता है। यह अर्ध-शहरी सड़कों पर लगाए जा सकते हैं। जीएफआरपी बार्स (आइटम 12.34) यह लोहे की जगह इस्तेमाल किया जाता है, जो जंग नहीं पकड़ता। इससे ब्रिज व संरचनाएं टिकाऊ बनती हैं और मेंटेनेंस खर्च भी कम होता है।

एक्सपर्ट बोले… केवल एसओआर में बदलाव से गुणवत्ता नहीं सुधरेगी

^सिर्फ एसओआर में बदलाव करने से निर्माण की गुणवत्ता नहीं सुधारी जा सकती। इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है। रेगुलर एसओआर में नई तकनीक या रीसाइकलिंग प्रोसेस को शामिल करना अच्छा है। रही बात वाटर हार्वेस्टिंग की तो यह स्थान के आधार पर निर्भर करता है। यानी कहीं जमीन पथरीली है तो कहीं कुछ और भी बाधाएं हो सकती हैं। – अखिलेश अग्रवाल, पूर्व ईएनसी पीडब्ल्यूडी

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