World Obesity Day 2026: सैकड़ों बीमारियों की जड़ है मोटापा, शरीर कर देता है खोखला

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World Obesity Day 2026: हर साल 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य लोगों को मोटापे के बारे में जागरूक करना है. डॉक्टर्स की मानें तो मोटापे से हार्ट डिजीज, डायबिटीज, लिवर डिजीज समेत कई गंभीर बीमारियां पैदा हो सकती हैं. वक्त रहते वजन कंट्रोल करना जरूरी होता है. मोटापा इस वक्त विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है.

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मोटापा हार्ट डिजीज, डायबिटीज और फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण है.

World Obesity Day 2026: आज के दौर में मोटापा दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है. करोड़ों की तादाद में लोग इससे जूझ रहे हैं और यह कई गंभीर बीमारियों का कारण है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोटापा शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देने वाली सैकड़ों बीमारियों की जड़ है. मोटापा हमारे शरीर के अंगों के कामकाज की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देता है और जब तक इसके स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक शरीर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है. समय रहते वजन को कंट्रोल करना न केवल बेहतर दिखने के लिए, बल्कि एक स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए जरूरी होता है.

नोएडा एक्सटेंशन के यथार्थ हॉस्पिटल के मिनिमल एक्सेस, बेरियाट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. कपिल कोचर ने बताया कि पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी शरीर के भीतर एक साइलेंट किलर की तरह काम करती है. यह चर्बी इंसुलिन की प्रक्रिया को बाधित करती है, जिससे व्यक्ति धीरे-धीरे डायबिटीज की चपेट में आ जाता है. इतना ही नहीं, बढ़ा हुआ वजन दिल की नसों पर भारी दबाव डालता है, जो बिना किसी चेतावनी के हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इसके अलावा लिवर में चर्बी का जमा होना और शरीर में बनी रहने वाली सूजन किडनी और जोड़ों को बुरी तरह प्रभावित करती है, जिससे पूरा शरीर बीमारियों का घर बन जाता है. कई तरह के कैंसर का खतरा भी मोटापे से बढ़ सकता है.

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डॉक्टर ने साफ कहा कि रातोंरात वजन कम करने के चक्कर में बिना विशेषज्ञ की सलाह के इंजेक्शन लेना या अत्यधिक कम कैलोरी वाली क्रैश डाइट अपनाना घातक हो सकता है. ऐसी कोशिशें शरीर में पानी और नमक का संतुलन बिगाड़ देती हैं, जिससे दिल की धड़कन अनियमित होना, मांसपेशियों में कमजोरी और पाचन तंत्र की खराबी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. डॉक्टर की निगरानी में वजन घटाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बहुत तेजी से कम किया गया वजन अक्सर दोबारा वापस आ जाता है. मोटापा एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका समाधान वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से ही होना चाहिए.

नोएडा के सेक्टर 110 स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की गायनी डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रगति जैन ने बताया कि ओपीडी में अनियमित माहवारी और गर्भधारण में देरी के मामलों में 25 से 35% की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण बढ़ा हुआ वजन ही है. पीसीओएस से जूझ रही लगभग 70-80% महिलाएं मोटापे का शिकार हैं. तनाव, देर रात तक जागना और बाहर का खान-पान इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. चिंता की बात यह है कि जो समस्याएं पहले परिपक्व उम्र में दिखती थीं, वे अब 16 से 20 साल की कम उम्र की लड़कियों में भी तेजी से देखी जा रही हैं. अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते वजन को संतुलित कर लिया जाए, तो रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी समस्याओं और लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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