लैला अपने दादा से पूछती है – अगर ये शहर मिट गया तो हमारी कहानियां कहां जाएंगी

गाजा शहर अविश्वसनीय रूप से पुराना है. दुनिया के सबसे पुराने शहरों में एक. 5000 साल पुराना. इसे 3000 ईसा पूर्व से 2500 ईसा पूर्व के बीच कांस्य युग में बसाया गया था. अब ये शहर उजड़ रहा है. इजरायल इसके हर भवन को ध्वस्त करने वाला है. उसकी फौजें शहर में कई दिनों पहले घुस गई हैं. शहर के लाखों लोग पलायन कर रहे हैं. किसी जमाने में इस शहर को कनान के रास्ते का रक्षक कहा जाता था. ये मिस्र साम्राज्य और एशिया के बीच बड़ा व्यापारिक केंद्र था. लेकिन इसके नामोनिशां ही अब मिट जाएगा. इसे मिटाना इतिहास के साथ अपराध ही है.

इस शहर की बहुत सी कहानियां अब बस कहानियां ही बन जाएंगी. करीब 15वीं सदी ईसा पूर्व में गाजा शहर मिस्र का एक प्रमुख शहर था. 12वीं ईसापूर्व में ये फिलिस्तीनियों के पांच प्रमुख शहरों में एक था. फिलिस्तीनियों ने यहां दागोन यानि मछली देवता का मंदिर बनवाया था. अलेक्जेंडर महान ने 332 ईसा पूर्व इस शहर पर डेरा डाला. उसे जीत लिया.

कभी ये था गज्जत यानि मूल्यवान शहर 

भूमध्य सागरों की लहरों पर चमकता ये शहर प्राचीन समय में कैनानाइट के नाम से जाना जाता था यानि “शक्ति” का प्रतीक. 4000 सालों से अधिक समय से ये मानव सभ्यता का गवाह रहा. प्राचीन मिस्र के फराओ थुटमोस तृतीय ने इसे “गज्जत” कहा यानि मूल्यवान शहर, क्योंकि ये व्यापारिक मार्गों का केंद्र था. यहां से मसाले, रेशम और विचारों का आदान-प्रदान होता था, जो मध्य पूर्व की सांस्कृतिक धारा को समृद्ध करता था.

गाजा भी कभी “मसालों का शहर” था, जहां से दालचीनी और लौंग यूरोप जाती थी. बीजान्टिन काल में, यह दर्शन का केंद्र था, जहां ईसाई और मुस्लिम विद्वान बहस करते. यहां के लोग, जो सदियों से संघर्ष करते आए, उनकी पहचान खो जाएगी. गाजा ने बेबीलोनियंस, पर्सियंस और मंगोलों के हमलों को झेला है लेकिन आज का विनाश अलग है – यह टेक्नोलॉजी से लैस है, जो हर अवशेष को मिटा सकता है.

वर्ष 1862 का पुराना गाजा शहर (विकी कामंस)

एशिया का एथेंस

फिलिस्तीनियों ने इसे अपना गढ़ बनाया. यहां उन्होंने लोहे के हथियार गढ़े. योद्धाओं की कहानियां बुनीं. जब सिकंदर ने इसे जीता तो इसे “एशिया का एथेंस” कहा जाने लगा – एक ऐसा केंद्र जहां दर्शन, कला और विविध संस्कृतियां मिलती थीं. अब ये शहर उजड़ रहा है बल्कि उजड़ने के बाद भी शहर फिर संवर जाते हैं, इसे तो पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है, यहां इतिहास के भी हर निशां इजरायली सेना द्वारा मिटाए जा रहे हैं.

यह शहर अब राख और मलबे का ढेर है. इजराइली टैंकों की गड़गड़ाहट और हवाई हमलों की गूंज से कांप रहा है. जो कुछ यहां हो रहा है उसे संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में “नरसंहार” करार दिया गया. हजारों नागरिकों की जानें जा चुकीं. अब तो इजरायल इस शहर से इसके हर बाशिंदे को ही खदेड़ देना चाहता है. ताकि यहां कोई नहीं रहे, क्योंकि इससे वह महफूज रहेगा.

मानव इतिहास का एक अध्याय खो जाएगा

इस शहर के नामोनिशान मिटने का मतलब है कि सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि मानव इतिहास का एक अध्याय हमेशा के लिए खो जाएगा. यहां 2000 ईसा पूर्व में कई किले और मंदिर बने. मिस्र के फराओ रामसेस द्वितीय ने इसे अपने साम्राज्य में शामिल किया. यहां से व्यापारियों के कारवां निकलते थे जो मेसोपोटामिया तक पहुंचते. बाइबिल की कई कहानियां यहां पैदा हुईं.

गाजा शहर की ऐतिहासिक मस्जिद जो पहले विश्व युद्ध में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. (विकी कामंस)
ऐसा माना जाता है कि यहीं से सेंट फिलोमेना (St. Porphyrius) ने ईसाई धर्म का प्रचार किया. यहां एक प्राचीन गिरजाघर अब भी मौजूद है. ये शहर क्रूसेडरों और मामलुक्स का भी शासन रहा. मामलुक काल में यहाँ कई सुंदर इमारतें, मस्जिदें और सार्वजनिक स्थल बने.

रोमन काल का संपन्न शहर 

रोमन काल में गाजा तब एक संपन्न शहर था, जहां हेरोद द ग्रेट ने महल बनवाए. ग्लैडिएटर ने लड़ाइयां लड़ीं. 635 ईस्वी में, राशिदुन खलीफा की सेना ने इसे इस्लामिक साम्राज्य में शामिल किया. ये इस्लामिक कानून का केंद्र बना. फिर ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा बना. पहले विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना ने इसपर कब्जा किया. 1948 में इजराइल के निर्माण के साथ, गाजा पट्टी और गाजा शहर का जन्म हुआ.

अब हर जगह मलबा है और भागते और उजड़ते हुए लोगों का कारवां. 16 सितंबर को इजरायल की आईडीएफ ने शहर के केंद्र में प्रवेश किया टैंकों और इन्फैंट्री के साथ. सड़कें भागते हुए लोगों से पटी पड़ी हैं. अहमद की पोती, लैला, जो 12 साल की है, पूछती है, “दादा, अगर यह शहर मिट गया, तो हमारी कहानियां कहां जाएंगी?”

सभ्यताओं का संग्रहालय

लैला की बात में सच्चाई है. गाजा सिर्फ ईंटों और मोर्टार का शहर नहीं. ये सभ्यताओं का संग्रहालय है. यहां की प्राचीन मस्जिद अल-ओमारी, जो 1344 में बनी, अब बमों से क्षतिग्रस्त है. शायद इसे भी पाट दिया जाएगा. शहर के पुरातात्विक स्थल जैसे तेल अल-मिन्तार अब टैंकों के नीचे दब चुके हैं. इनके मिटने का मतलब है मध्य पूर्व की व्यापारिक इतिहास की कड़ियों का टूट जाना.

गाजा शहर का पुराना गोल्ड मार्केट, जहां महिलाएं खूब खरीदारी करने के लिए जाया करती थीं. (विकी कामंस)
मध्य पूर्व का इतिहास अधूरा हो जाएगा. सिल्क रोड से जुडी़ं व्यापार मार्गों की कहानियां खो जाएंगी. लैला जैसी बच्चियां अपनी जड़ें भूल जाएंगी. तो क्या राख से फिर फीनिक्स उभरेगा.

गाजा शहर का आधुनिक इतिहास

ओटोमन साम्राज्य (16वीं से 20वीं शताब्दी) – गाजा करीब 400 वर्षों तक ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा रहा.
ब्रिटिश मैंडेट (1917-1948) – पहले विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया.
मिस्र का प्रशासन (1948-1967) –1948 के अरब-इजरायल युद्ध के बाद से 1967 तक मिस्र ने गाजा पर शासन किया.
इजरायली कब्जा (1967-2005) – छह-दिवसीय युद्ध के बाद इजरायल ने गाजा पर कब्जा कर लिया. 2005 में अपनी बस्तियां हटाने तक यहां रहा
हमास का शासन (2007 से) – 2007 से गाजा पर हमास का नियंत्रण रहा है. हालांकि इजरायल की जमीन, समुद्र और हवा से सख्त नाकाबंदी थी लेकिन अब इजरायल यहां से सबकुछ खाली करा रहा है. तमाम इमारतों को ध्वस्त कर इलाके को पाटने में लगा है.

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