जया एकादशी आज: गुरुवार और एकादशी के योग में करें भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की विशेष पूजा, हल्दी का करें दान

5 घंटे पहले

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आज (गुरुवार, 29 जनवरी) माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इस एकादशी को जया, अजा और भीष्म एकादशी कहते हैं। आज गुरुवार और एकादशी के योग में भगवान विष्णु के साथ ही गुरु ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, एकादशी व्रत से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल खत्म होते हैं। जया एकादशी व्रत से उतना ही पुण्य मिलता है, जितना यज्ञ करने से मिलता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष अभिषेक करना चाहिए। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए। जो लोग व्रत करते हैं, उन्हें अधार्मिक कामों से दूर रहना चाहिए, वर्ना व्रत का पूरा पुण्य नहीं मिलता।

जानिए इस तिथि पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…

आज स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु के सामने एकादशी व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा करें। विधि-विधान से महालक्ष्मी और विष्णु जी का अभिषेक करें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। दक्षिणावर्ती शंख से जल, दूध और पंचामृत चढ़ाएं। पंचामृत के बाद एक बार फिर जल चढ़ाएं।

लक्ष्मी-विष्णु को नए वस्त्र पहनाएं, फूलों से श्रृंगार करें। भोग में तुलसी के पत्तों के साथ मिठाई अर्पित करें। मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें। मौसमी फल अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम, भगवद गीता या विष्णु चालीसा का पाठ करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। परिक्रमा करें। जानी-अनजानी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा याचना करें।

पूजा के बाद पूरे दिन निराहार रहना चाहिए यानी दिनभर अन्न का सेवन न करें। भूखे रहना संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों का सेवन कर सकते हैं।

द्वादशी पर यानी कल (30 जनवरी) व्रत का पारण करें। सुबह भी भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और फिर खुद भोजन करें। इस प्रकार एकादशी व्रत पूरा होता है।

एकादशी की शाम को विष्णु-लक्ष्मी के साथ तुलसी की भी पूजा करें। तुलसी के पास दीपक जलाएं।

एकादशी पर व्रत और पूजा-पाठ के साथ ही दान करने का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंद लोगों को कपड़े, जूते-चप्पल, अन्न, ऊनी वस्त्र, खाना, अनाज और धन का दान करना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए भी दान करें। किसी तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।

गुरुवार और एकादशी के योग में गुरु ग्रह की भी विशेष पूजा करें। गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएं। ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जप 108 बार करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। पीले फूलों से श्रृंगार करें। बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को हल्दी, बेसन, चने की दाल, पीले वस्त्र दान करें।

एकादशी व्रत सेहत के लिए भी है फायदेमंद

व्रत के दौरान अन्न न खाने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं। हल्का और संतुलित आहार आसानी से पच जाता है। व्रत के समय पर्याप्त पानी पीना और फलों का सेवन करना जरूरी होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती रहती है।

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