अक्सर पैर हो जाता है सुन्न, दर्द और सूजन से भी हैं परेशान? तो तुरंत कराएं इस चीज की जांच, बच जाएगी जान

Blood Circulation Issues: घर में रहने वाली महिलाएं हों, ऑफिस जाने वाले युवा हों या बड़े-बुजुर्ग, लगभग सभी लोगों में अचानक पैर का सुन्न पड़ जाना, दर्द होना या सूजन आने की समस्या देखने को मिलती है लेकिन अक्सर ही ज्यादातर लोग इन लक्षणों को थकान, मांसपेशियों में खिंचाव या कोई नॉर्मल परेशानी मानकर इग्नोर कर देते हैं. जबकि हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पैरों में दिखने वाले ये लक्षण कभी-कभी रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) की समस्या के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि अगर ब्लड सर्कुलेशन की समस्या का इलाज न किया जाए तो इससे पैरों और पूरे शरीर की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है. कभी कभी यह जानलेवा भी हो सकता है.

दिल्ली के सीके बिरला अस्पताल में वैस्कुलर सर्जरी एवं इंटरवेंशन्स विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर प्रोफेसर दिग्विजय शर्मा का कहना है कि पैरों में रक्त संचार दो चीजों के माध्यम से होता है धमनियां और नसें. धमनियां दिल से ऑक्सीजन से भरपूर खून पैरों तक पहुंचाती हैं, जबकि नसें इस्तेमाल हो चुका खून वापस दिल तक ले जाती हैं. इन दोनों में से किसी एक में भी गड़बड़ी होने पर सूजन, सुन्नपन या दर्द के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

ये है इंटरमिटेंट क्लॉडिकेशन
देखा जाए तो पैरों में दर्द और सुन्नपन अक्सर धमनियों में खून की कमी से जुड़ा होता है. जब पैरों तक खून पहुंचाने वाली धमनियां संकरी हो जाती हैं या उनमें रुकावट आ जाती है, तो मांसपेशियों और ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता. इसका एक आम लक्षण यह है कि कुछ दूर चलने के बाद पैरों में दर्द होने लगता है, जो आराम करने पर ठीक हो जाता है. इसे इंटरमिटेंट क्लॉडिकेशन कहा जाता है. चूंकि यह दर्द लगातार नहीं रहता, इसलिए कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. इसी तरह, कभी-कभी होने वाला हल्का सुन्नपन या झनझनाहट भी अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है, जबकि ये संकेत बताते हैं कि पैरों में खून की सप्लाई सही नहीं है.

नसों की गंभीर समस्या का है संकेत
वहीं, पैरों में सूजन आमतौर पर नसों से जुड़ी समस्या के कारण होती है. नसों को खून को वापस दिल तक पहुंचाने के लिए सही तरीके से काम करना और मांसपेशियों की मदद जरूरी होती है. अगर नसें कमजोर हो जाएं, खराब हो जाएं या उनमें रुकावट आ जाए, तो खून पैरों में जमा होने लगता है, जिससे सूजन हो जाती है. यह सूजन अक्सर शाम के समय ज्यादा दिखती है और आराम करने पर कम हो जाती है, इसलिए लोग इसे मामूली समझ लेते हैं लेकिन अगर सूजन बार-बार हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह नसों की गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है.

डॉ. कहते हैं कि इन लक्षणों को इसलिए भी नजरअंदाज किया जाता है क्योंकि ये लगातार नहीं रहते. चलने पर ही होने वाला दर्द, कभी-कभी होने वाला सुन्नपन या आने-जाने वाली सूजन शुरुआत में गंभीर नहीं लगती. इसी वजह से लोग डॉक्टर से मिलने में देर कर देते हैं और समस्या बढ़ती चली जाती है.

क्या होते हैं गंभीर नुकसान?
डॉ. सिंह आगे बताते हैं कि अगर धमनियों में खून का प्रवाह लंबे समय तक कम बना रहे, तो इससे पैरों के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है. गंभीर मामलों में घाव भरने में दिक्कत, संक्रमण और यहां तक कि पैर को खतरा भी हो सकता है. समय रहते पहचान और इलाज से इन समस्याओं को रोका जा सकता है, साथ ही जीवनशैली में बदलाव भी मददगार होते हैं.

नसों से जुड़ी रक्त संचार की समस्याएं भी खतरनाक हो सकती हैं. इनमें से एक गंभीर समस्या है डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT), जिसमें पैर की गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है. इससे लंबे समय तक सूजन, त्वचा का रंग बदलना, त्वचा की गुणवत्ता खराब होना और चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है. सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब यह थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाए, जिससे पल्मोनरी एम्बोलिज्म नाम की जानलेवा समस्या हो सकती है.

इन चीजों की जांच तुरंत कराएं
अगर पैरों में दर्द, सुन्नपन और सूजन एक साथ दिखाई दें, तो इसे रक्त संचार की गंभीर चेतावनी मानना चाहिए. भले ही इनमें से कोई एक लक्षण ही हो, लेकिन अगर वह बार-बार होता है, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है. डॉ. सिंह कहते हैं कि नसों और धमनियों की सही जांच और परीक्षण से यह पता लगाया जा सकता है कि समस्या कहां है, धमनियों में है, नसों में है या दोनों में है. इसलिए डॉक्टर के पास जाकर इन चीजों की जांच जरूर कराएं.

ध्यान रहे कि पैरों में दर्द, सुन्नपन और सूजन को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये शरीर द्वारा दिए गए शुरुआती संकेत हो सकते हैं कि रक्त संचार ठीक नहीं है. इन लक्षणों पर ध्यान देना और समय पर डॉक्टर की सलाह लेना गंभीर समस्याओं से बचा सकता है, पैरों को सुरक्षित रख सकता है और कई मामलों में जान भी बचा सकता है.

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