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Rajasthan deadly cough syrup in Delhi hospitals: राजस्थान में दो बच्चों को मौत के घाट उतार चुकी खांसी की दवा डेक्सट्रोमेथार्फन दिल्ली स्थित केंद्र और राज्य सरकारों के अस्पतालों में भी मरीजों को दी जाती है. सूखी खांसी होने पर डॉक्टर ये दवा देते हैं. आइए डॉ. आरएमएल अस्पताल के डॉक्टर पुलिन गुप्ता से जानते हैं कि यह दवा बच्चों और बड़ों के लिए कितनी सेफ है?
Dextromethorphan in Delhi Hospitals: भरतपुर और सीकर में दो बच्चों की जान ले चुका जानलेवा खांसी का सिरप डेक्सट्रोमेथॉर्फन सिर्फ राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों को दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक सूखी खांसी होने पर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में व्यस्क मरीजों को यह सिरप देना बेहद कॉमन है. इससे मरीजों को जल्दी आराम मिलता है. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो छोटे बच्चों को यह दवा देना खतरे से खाली नहीं है.
डॉ. गुप्ता कहते हैं कि इस सिरप के लिए ही नहीं बल्कि सभी प्रकार की दवाओं और सिरप के लिए यह नियम है कि बच्चों को जो भी दवा दी जाती है वह उनकी उम्र के हिसाब से नहीं बल्कि वजन के अनुसार दी जाती है. बड़ों में तो दवा को एक या दो चम्मच कर देते हैं लेकिन बच्चों में हमेशा बहुत सावधानी से वजन देखकर दवा देनी होती है, अगर मान लीजिए कोई गैर अनुभवी डॉक्टर है तो वह ज्यादा डोज दे सकता है और बच्चों में यही ओवरडोज हो जाती है. या फिर पेरेंट्स भी बिना डॉक्टरी सलाह के या ज्यादा खांसी होने पर यह सोचकर ज्यादा दवा दे देते हैं कि जल्दी आराम होगा, तो ऐसी स्थिति में यह नुकसानदेह हो जाती है.इस दवा को पीते ही नींद आती है, वहीं अगर दवा की मात्रा ज्यादा ली है तो बेहोशी हो सकती है और उसी में जान भी जा सकती है. इस दवा की सामान्य मात्रा नुकसान नहीं पहुंचाती है, बहुत समय से यह इस्तेमाल भी हो रही है.
डॉ. पुलिन ने कहा कि जैसे कि ये कहा जा रहा है कि इस दवा से किडनी भी फेल हो सकती है तो ऐसा इस दवा से होना संभव नहीं है. हां लेकिन अगर दवा को सही तरीके से कोल्ड चेन में स्टोर नहीं किया गया है या मैन्युफैक्चरर के द्वारा इसे बनाते और पैक करते वक्त सभी मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है तो इस दवा में फंगस या बैक्टीरिया भी पैदा हो सकता है और इस वजह से भी यह दवा जानलेवा हो सकती है.
चार साल से कम उम्र के लिए बहुत खतरनाक
डॉ. बताते हैं कि छोटे बच्चों में चार साल से कम उम्र के बच्चों को यह नहीं दी जानी चाहिए. यहां तक कि कई कफ सिरप के ऊपर भी यह चेतावनी लिखी होती है. अक्सर मेडिकल स्टोर्स पर यह दवा मिलती है और कई ब्रांडों में मिलती है तो सबसे बड़ी बात है कि इसे बच्चों को नहीं देना है, या डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार ही देना है.
दिल्ली के अस्पतालों में दी जाती है ये दवा
डॉ. पुलिन कहते हैं कि दिल्ली के लगभग सभी अस्पतालों में यह दवा सामान्य तौर पर व्यस्क मरीजों को दी जाती है. ड्राई कफ होने पर व्यस्कों को इस दवा से आराम होता है और यह उनके लिए पूरी तरह सुरक्षित है. उन लोगों को इससे कोई दिक्कत नहीं होती है. अगर इस दवा की डोज थोड़ी इधर-उधर भी हो जाती है तो भी इससे कोई परेशानी नहीं होती लेकिन अगर 6 महीने या 1-2 साल के बच्चों को आप ये दवा दे रहे हैं तो मुश्किलें हो सकती हैं.
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्… और पढ़ें