दिल्ली के सरकारी अस्पताल में चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोहम्मद नदीम बताते हैं कि इस समय हर 10 में से करीब 6-7 मरीज वायरल फीवर की समस्या के साथ आ रहे हैं. जब भी मौसम में नमी होती है तो मौसमी बुखार या वायरल इन्फेक्शन के केसेज बढ़ते ही हैं. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि बारिश की नमी पाकर वायरल का वायरस तेजी से बढ़ता है और संक्रमण फैलाता है.
. लगातार छींक आना
. हल्का या तेज बुखार
. हाथ-पैरों में या पूरे शरीर में दर्द
. आंखें लाल होना
एंटीबायोटिक की नहीं होती जरूरत
डॉ. नदीम कहते हैं, ‘वायरल फीवर के इन लक्षणों (Viral Fever Symptoms) के लिए किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक नहीं दी जाती. सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज करके ही इसे ठीक किया जा सकता है. यह जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि बहुत सारे लोग वायरल फीवर के लिए इलाज के लिए खुद ही आजीथ्रोमाइसिन आदि एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं, जबकि यह लेनी ही नहीं चाहिए.’
कुछ मामलों में नहीं आ रहा बुखार
वायरल इनफेक्शन के ऐसे मरीज भी देखे जा रहे हैं, जिन्हें बाकी लक्षण तो होते हैं लेकिन बुखार या तो बिल्कुल नहीं होता या फिर 99 डिग्री फारेनहाइट या 100 से कम रहता है. वहीं जिन मरीजों को हाई टेंपरेचर रहता है, वे भी दो दिन के अंदर ठीक होने लगते हैं.
डॉ. नदीम कहते हैं कि बारिश के मौसम में कोई भी वायरस हो वह ह्यूमन बॉडी को जल्दी-जल्दी परेशान करता है. हालांकि वायरल की अधिकतम साइकल लगभग 10 से 12 दिन की होती है. इसके अलावा यह मरीजों के शरीर की क्षमता पर भी निर्भर करता है, कि वे इस वायरस से निपटने में कितने दिन लेंगे. कुछ लोगों का शरीर दो-एक दिन में भी ठीक हो जाता है. कुछ लोगों को नजला खांसी कई दिनों तक बना रहता है.
.