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Anesthesia for Eye Surgery: अधिकतर ऑपरेशन में आंखों को सुन्न करने के लिए टोपिकल आई ड्रॉप्स एनेस्थीसिया का यूज किया जाता है. इसमें मरीज की आंखों में ये ड्रॉप्स डाल दिए जाते हैं, जिससे आंखों में सर्जरी के दौरान दर्द नहीं होता है. इसके अलावा कई बार लोकल इंजेक्शन और जनरल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल भी किया जाता है. मरीज की उम्र, सर्जरी की जटिलता के आधार पर सबसे सुरक्षित विकल्प का चुनाव डॉक्टर करते हैं.
कॉमन आई सर्जरी में टॉपिकल आई ड्रॉप्स के जरिए एनेस्थीसिया दिया जाता है.
How Surgeons Numb Your Eyes: ऑपरेशन का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है. अगर ऑपरेशन आंखों का हो, तो मरीजों की डर के मारे हालत खराब होने लगती है. मोतियाबिंद और चश्मा हटाने के लिए की जाने वाली लेसिक सर्जरी सबसे कॉमन हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या इन ऑपरेशन के दौरान आंखों में दर्द होता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो आंखों की सर्जरी में भी सबसे पहले एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि मरीज को किसी तरह का दर्द महसूस न हो. हालांकि यह एनेस्थीसिया शरीर के अन्य अंगों की सर्जरी से काफी अलग होता है. इसका मुख्य उद्देश्य न केवल दर्द को खत्म करना है, बल्कि ऑपरेशन के दौरान आंखों की पुतली को स्थिर रखना भी होता है.
नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि आजकल मोतियाबिंद और लेसिक जैसी सामान्य सर्जरी में टोपिकल एनेस्थीसिया सबसे ज्यादा पॉप्युलर है. इसमें मरीज को कोई इंजेक्शन नहीं लगाया जाता, बल्कि आंखों में एनेस्थेटिक ड्रॉप्स डाली जाती हैं. यह दवा कुछ ही सेकंड में आंख की ऊपरी सतह को सुन्न कर देती है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि मरीज पूरी तरह होश में रहता है और सर्जरी के तुरंत बाद वह बिना किसी पट्टी के घर जा सकता है. यह उन लोगों के लिए वरदान है जो सुई या इंजेक्शन के नाम से घबराते हैं.
डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि जब रेटिना की जटिल सर्जरी या ग्लूकोमा का ऑपरेशन किया जाता है, तब लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. इसमें आंख के निचले हिस्से या आसपास के ऊतकों में एक छोटा इंजेक्शन लगाया जाता है. इसे पेरिबुलबार या रेट्रोबुलबार ब्लॉक कहा जाता है. यह इंजेक्शन न केवल दर्द को रोकता है, बल्कि आंखों की मांसपेशियों को भी अस्थायी रूप से स्टेबल कर देता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान मरीज चाहकर भी अपनी आंख नहीं हिला पाता है.
कई बार मरीज ऑपरेशन थिएटर के माहौल को देखकर अत्यधिक तनाव या घबराहट महसूस करने लगते हैं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर लोकल एनेस्थीसिया के साथ आईवी सिडेशन का उपयोग करते हैं. इसमें नस के जरिए हल्की नींद की दवा दी जाती है, जिससे मरीज गहरी शांति और सुकून महसूस करता है. मरीज पूरी तरह बेहोश नहीं होता और वह डॉक्टर के निर्देशों को सुन सकता है. हालांकि उसे घबराहट महसूस नहीं होती और समय का पता नहीं चलता है.
आंखों के डॉक्टर जनरल एनेस्थीसिया का उपयोग विशेष परिस्थितियों में ही करते हैं. यह मुख्य रूप से छोटे बच्चों के लिए जरूरी होता है, क्योंकि वे सर्जरी के दौरान शांत नहीं बैठ सकते. इसके अलावा अगर कोई मरीज मानसिक रूप से अस्थिर है या उसे कोई ऐसी गंभीर समस्या है, जिसमें वह लंबे समय तक सीधा नहीं लेट सकता, तो उसे पूरी तरह बेहोश किया जाता है. इसमें मरीज को पूरी प्रक्रिया के दौरान नींद में रखा जाता है और एक एनेस्थेटिस्ट उसकी धड़कन और सांस की निगरानी करता है.
डॉक्टर एनेस्थीसिया देने से पहले मरीज का ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और पिछली मेडिकल हिस्ट्री की जांच जरूर करते हैं. ऑपरेशन के दौरान मरीज को किसी भी तरह का दर्द महसूस नहीं होता, बस हल्का दबाव या प्रकाश का अहसास हो सकता है. सर्जरी के बाद जब एनेस्थीसिया का असर खत्म होता है, तो थोड़ी खुजली या भारीपन महसूस होना सामान्य है. डॉक्टर द्वारा सुझाई गई आई ड्रॉप्स और काला चश्मा पहनना रिकवरी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. आंखों की सर्जरी में एनेस्थीसिया का चुनाव मरीज की उम्र, उसकी आंखों की स्थिति और सर्जरी के प्रकार पर निर्भर करता है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें