Health Tips: आयुर्वेद में बाकुची को कफ-वात शामक औषधि माना गया है. यह दीपन-पाचन को सुधारने वाली, रक्तशोधक और वृष्य यानी प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी के रूप में वर्णित है. इसके अलावा बाकुची का उपयोग यकृत विकार, बवासीर, पेट के कीड़े, घाव और मूत्र संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है. आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि बाकुची विशेष रूप से त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए जानी जाती है. इसके बीजों में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व प्सोरालेन सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने पर त्वचा में मेलानिन के उत्पादन को बढ़ाता है. इसी कारण सफेद दाग (विटिलिगो), सोरायसिस, एक्जिमा, दाद और खुजली जैसी समस्याओं में इसका उपयोग काफी लाभकारी माना जाता है. बाकुची का तेल त्वचा पर लगाने से संक्रमण कम होता है और त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है. बाकुची हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायक मानी जाती है. डॉ. सिंह बताते हैं कि हालिया शोधों में यह संकेत मिले हैं कि बाकुची में मौजूद कुछ तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में सहायक हो सकते हैं. साथ ही यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी मददगार हो सकती है.