80 फीसदी भारतीयों में लिपिड प्रोफाइल नहीं नॉर्मल, क्या है ये टेस्ट और क्यों हार्ट अटैक का बनता है कारण?

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Lipid profile test guidelines and heart attack: अक्‍सर हार्ट अटैक का कार्ड‍ियक अरेस्‍ट के मामले झेलने वाले भारत में 80 फीसदी लोगों का लिपिड प्रोफाइल नॉर्मल नहीं है, यह कहना है ल‍ि‍प‍िड प्रोफाइल गाइडलाइंस बनाने वाले हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स का. उनका मानना है क‍ि लि‍प‍िड की वजह से 50 फीसदी हार्ट अटैक के मामले सामने आते हैं. आइए जानते हैं क्‍या होता है ल‍िप‍िड प्रोफाइल?

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हार्ट अटैक के र‍िस्‍क को कई गुना बढ़ा देने वाला ल‍िप‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट क्‍या होता है, जानें..

What is lipid Profile and how it trigger heart attack: जब भी हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामले सामने आते हैं या मरीज हार्ट अटैक संबंधी लक्षण सामने आने पर डॉक्टरों के पास जाते हैं तो वे पूछते हैं कि क्या आपने लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराया है? भारत हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो 80 फीसदी से ज्यादा भारतीयों का लिपिड प्रोफाइल नॉर्मल नहीं होता है और इनमें से ज्यादातर को इसके बारे में पता भी नहीं होता है कि आखिर यह क्या है और क्यों इसकी जांच जरूरी है? आइए विशेषज्ञों से जानते हैं..

कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से जारी लिपिड गाइडलाइंस के अध्‍यक्ष और सर गंगाराम अस्‍पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्‍टर जेपीएस साहनी ने बताया कि हार्ट अटैक को लेकर अक्‍सर ये कहा जाता रहा है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, तनाव या अन्य कारणों की वजह से हार्ट अटैक होते हैं, लेकिन इसके विपरीत भारत में हार्ट अटैक के लिए सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार जो चीज देखी गई है, वह है डिस्लिपिडेमिया. यानि लिपिड प्रोफाइल जो भारत में 80 फीसदी लोगों में नॉर्मल नहीं है.

50 फीसदी हार्ट अटैक के मामले इसी वजह से
गाइडलाइंस के सह-लेखक और एम्‍स नई दिल्‍ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ.एस रामाकृष्‍णन की मानें तो लिपिड प्रोफाइल की वजह से 50 फीसदी हार्ट अटैक के मामले सामने आते हैं. हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्‍ट के बाद जब मरीजों की जांच की जाती है तो पाया जाता है कि इनका लिपिड प्रोफाइल ठीक नहीं होता.और न ही कभी उन्होंने इसकी कभी जांच कराई होती है. बहुत सारे लोगों पता ही नहीं है कि यह क्या है.

क्या होता है ये लिपिड प्रोफाइल

दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ अस्‍पताल के इंटरवेंशनल कार्ड‍ियोलॉज‍िस्‍ट डॉ. अजय अग्रवाल बताते हैं, ‘लिपिड प्रोफाइल जो हम करवाते हैं, उसमें आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल यानि एलडीएल, गुड कोलेस्ट्रॉल यानि एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड लेवल को देखना जरूरी होता है. ये जो खराब कोलेस्ट्रॉल है अगर बढ़ जाता है और 100 से ऊपर पहुंच जाता है इससे हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है, हालांकि इसे हम प्रॉपर खानपान और दवाओं के जरिए कम रख सकते हैं.

कितना होना चाहिए लिपिड का लेवल?
एचडीएल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा शरीर में 40 से ज्यादा होनी चाहिए. हम एक्सरसाइज के द्वारा एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकते हैं. हालांकि दुर्भाग्य है कि गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने की कोई दवा नहीं है. वहीं ट्राइग्लिसराइड की बात करें तो वह 200 के नीचे होना जरूरी है. ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना भी हमारे खराब खानपान, ज्यादा मीठा और तैलीय खाने और बेतरतीब जीवनशैली से बढ़ता है.हम शुगर लेवल नियंत्रित रखें, एल्कोहॉल न लें और दवाओं के जरिए हम इसे कम रख सकते हैं. एक एक्सटेंडेड लिपिड प्रोफाइल भी होता है, जिसमें लाइपोप्रोटीन ए को देखा जाता है. यह भी एक तरह का खराब कोलेस्ट्रॉल है जो हमारे शरीर में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है.

कब कराना चाहिए लिपिड टेस्ट?
गाइडलांइस कहती हैं कि आज जिस तरह से लाइफस्टाइल चल रही है और हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट के मामले देखने को मिल रहे हैं. 20-25 साल के बाद हर व्यक्ति को अपना लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए. 40 की उम्र तक हर 5 साल में लिपिड की जांच करा सकते हैं. जबकि 40 की उम्र के बाद हर साल एक बार लिपिड प्रोफाइल की जांच जरूर कराएं.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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80 फीसदी भारतीयों में लिपिड प्रोफाइल नहीं नॉर्मल, क्या है ये टेस्ट और हार्ट…

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