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Success Story: लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाओं ने मात्र एक हजार रुपए से सिलाई का काम शुरू किया और आज लाखों की कमाई कर रही हैं. समूह की महिलाएं घर पर ही सूट, सलवार और अन्य परिधान तैयार कर बाजार में बेचती हैं. हर महिला महीने में 10 से 12 हजार रुपए तक कमा रही है. यह समूह आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं को भी रोजगार और प्रेरणा दे रहा है.
अब महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहीं. आत्मनिर्भर बनने की दिशा में वे लगातार कदम बढ़ा रही हैं. कई महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर न सिर्फ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अच्छी आय भी अर्जित कर रही हैं. ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण है लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, जिसने महज एक हजार रुपए से अपना व्यवसाय शुरू कर आज लाखों रुपए की कमाई का मुकाम हासिल किया है.
12 महिलाओं का मजबूत समूह
लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष आशा ने बताया कि उनके समूह में कुल 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. सभी महिलाएं मिलकर महिलाओं के पहनावे से जुड़े कपड़े जैसे सूट, सलवार और अन्य परिधान तैयार करती हैं. समूह की सभी सदस्य सिलाई का काम जानती हैं और सिलाई मशीन के माध्यम से घर पर ही कपड़े तैयार करती हैं. इससे उन्हें बाहर नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ती और वे अपने परिवार के साथ रहते हुए ही कमाई कर रही हैं.
कपड़े खरीदकर घर पर होता है काम
आशा बताती हैं कि समूह की महिलाएं पहले बाहर से कच्चा कपड़ा खरीदकर लाती हैं. इसके बाद घर पर ही उसकी सिलाई कर सूट-सलवार और अन्य कपड़े तैयार किए जाते हैं. तैयार कपड़ों को स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है. गुणवत्ता और उचित दाम के कारण उनके बनाए कपड़ों की मांग लगातार बढ़ रही है.
एक हजार रुपए से की थी शुरुआत
समूह की शुरुआत को याद करते हुए आशा बताती हैं कि शुरुआत में सभी महिलाओं ने मिलकर सिर्फ एक हजार रुपए जमा किए थे. उसी छोटी सी पूंजी से उन्होंने सिलाई का काम शुरू किया. धीरे-धीरे मेहनत और लगन के दम पर उनका कारोबार बढ़ता गया. आज स्थिति यह है कि समूह की हर महिला महीने में आसानी से 10 से 12 हजार रुपए तक कमा लेती है. कुल मिलाकर समूह की मासिक आय लाखों रुपए तक पहुंच चुकी है.
स्टॉल और घर से होती है बिक्री
समूह की महिलाएं अपने उत्पादों को बेचने के लिए जगह-जगह स्टॉल भी लगाती हैं. इसके अलावा आसपास के लोग सीधे उनके घर से भी कपड़े खरीदने आते हैं. इससे बिक्री और मुनाफा दोनों बढ़ रहा है. सूट-सलवार के साथ-साथ अब वे महिलाओं के अन्य परिधान भी तैयार कर रही हैं.
अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है. यह समूह न सिर्फ अपनी सदस्य महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रहा है कि वे छोटे स्तर से शुरुआत कर अपना स्टार्टअप शुरू करें और आत्मनिर्भर बनें.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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