Last Updated:
आयुर्वेद में त्वचा की देखभाल के लिए केवल क्रीम या लेप ही नहीं, बल्कि भस्म जैसी पारंपरिक औषधियों का भी खास महत्व रहा है. इन्हीं में से एक है रजत भस्म, जो शुद्ध चांदी से तैयार की जाती है. माना जाता है कि यह त्वचा को ठंडक देने, निखार लौटाने और जलन कम करने में मदद करती है.
आयुर्वेद में सदियों से जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक तत्वों के जरिए बीमारियों का इलाज किया जाता रहा है. बहुत कम लोग जानते हैं कि आयुर्वेद में भस्म के माध्यम से भी कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है. इन्हीं में से एक है रजत भस्म. रजत का अर्थ है चांदी और भस्म का मतलब राख. यानी रजत भस्म शुद्ध चांदी से बनी औषधीय राख होती है, जिसे खास पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. आज हम जानेंगे कि रजत भस्म क्या है और यह त्वचा के लिए कैसे औषधि की तरह काम करती है.
रजत भस्म को पूरी तरह शुद्ध चांदी से और पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रक्रिया के तहत बनाया जाता है. इस प्रक्रिया में चांदी का कई बार शोधन किया जाता है और उसमें कुछ विशेष जड़ी-बूटियों का मिश्रण मिलाया जाता है. इसे तैयार करने में जरा सी भी गलती पूरी भस्म को खराब कर सकती है. रजत भस्म एक बेहद महीन पाउडर होती है, जिसका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का ग्रे होता है. इसे न्यूनतम धातु अवशेष के साथ जैव-संगत माना जाता है और आयुर्वेद में इसे पुनर्जीवक यानी रीजुवेनेटर का एक सरल और असरदार तरीका माना गया है.
हालांकि रजत भस्म कई तरह के रोगों में उपयोगी मानी जाती है, लेकिन यहां हम इसके त्वचा से जुड़े फायदों की बात कर रहे हैं. रजत भस्म में शीतल गुण होते हैं, जो त्वचा को ठंडक पहुंचाते हैं. इसके साथ ही इसमें जीवाणुरोधी गुण भी पाए जाते हैं, जो स्किन इंफेक्शन और जलन को कम करने में मदद करते हैं. यही वजह है कि संवेदनशील और परेशान त्वचा के लिए इसे बेहद लाभकारी माना गया है.
अगर आपकी त्वचा का प्राकृतिक निखार कम हो गया है, स्किन रूखी और बेजान दिखने लगी है या फिर हल्की सी चीज से भी जलन और रेडनेस हो जाती है, तो रजत भस्म का लेप फायदेमंद साबित हो सकता है. यह त्वचा की इरिटेशन को शांत करता है, स्किन की ऊपरी परत को मजबूत बनाता है और अंदरूनी परतों तक ऑक्सीजन के संचार को बेहतर करता है. इससे त्वचा धीरे-धीरे हेल्दी और ग्लोइंग नजर आने लगती है.
रजत भस्म का उपयोग करना भी काफी आसान है. इसे बादाम तेल या जैतून के तेल के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है. हफ्ते में दो बार इसका पैक लगाना पर्याप्त होता है. हालांकि इस्तेमाल से पहले अपनी त्वचा का पीएच लेवल और सेंसिटिविटी जरूर जांच लें. इसके लिए पहले चेहरे के किसी छोटे हिस्से पर रजत भस्म का लेप लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें. अगर खुजली, जलन या लाल चकत्ते जैसी कोई समस्या नहीं होती है, तभी पूरे चेहरे पर इसका इस्तेमाल करें.
About the Author
विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
.