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Amitabh Bachchan News: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने हाल ही में केबीसी के सेट पर एक ऐसा रहस्योदघाटन किया जिससे हॉट सीट पर बैठी एक डॉक्टर भी दंग रह गईं. डॉक्टर ने जब अमिताभ बच्चन के हाथ में पल्स देखा तो उन्हें पल्स महसूस ही नहीं हुई. तब अमिताभ बच्चन ने इसके पीछे 43 साल पुराना वो खौफनाक सच बताया. पर सवाल यह है कि जब हाथ में पल्स महसूस नहीं हो तो खून हाथ तक कैसे सप्लाई होता है. इस बारे में फोर्टिस अस्पताल नोएडा में इमरजेंसी के डायरेक्टर डॉ. अनुराग अग्रवाल से बात की.
Amitabh Bachchan Pulse News: सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने केबीसी के सेट पर ऐसा रहस्योदघाटन किया जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे. दरअसल, केबीसी के एक एपिसोड में शहंशाह के सामने हॉट सीट पर एक लेडी डॉक्टर बैठी थी. जब उन्होंने अमिताभ बच्चन के हाथ की नब्ज टटोली तो वह हक्का-बक्का रह गई क्योंकि उनके हाथ में पल्स महसूस ही नहीं हो रहा था. जब अमिताभ बच्चन मुस्कुराए और कहा कि देवी जी इसके पीछे एक राज है. वास्तव में पल्स की यह कहानी 43 साल पुराने एक हादसे का वो खौफनाक सच है जिसने महानायक को अजूबा बना दिया था. उन्होंने उस घटना के बारे में बताया. आइए जानते हैं कि यह क्या घटना थी.
क्या थी वो घटना
बात 24 जुलाई 1982 की है. बेंगलुरु में फिल्म ‘कुली’ के सेट पर एक सीन में एक फाइट सीन के दौरान पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ बच्चन के पेट में लग गया था. बिग बी एक स्टील की मेज से जा टकराए थे जिससे उनके पेट की आंतें फट गई थी. पेट में लगी इस गंभीर चोट के बाद अमिताभ बच्चन को क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया गया था. उन्हें बचाने के लिए कई आपातकालीन सर्जरी की गईं. बिग बी ने खुद बताया था कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी कलाई से बार-बार खून निकाला जाता था और कई चीरे लगाए गए थे. इस प्रक्रिया में वहां की रेडियल आर्टरी (खून को उंगलियों के पोर-पोर तक पहुंचाने वाली नली) डैमेज हो गई, जिससे हाथ में पल्स महसूस होना बंद हो गई. यही कारण था कि जब एक डॉक्टर कंटेस्टेंट ने उनकी नब्ज टटोलने की कोशिश की, तो वे भी दंग रह गईं. इस विषय पर न्यूज 18 ने फोर्टिस अस्पताल नोएडा में इमरजेंसी के डॉक्टर अनुराग अग्रवाल से इसका विज्ञान जानने की कोशिश की कि अगर किसी के हाथ में रेडियल आर्टरी बंद हो जाए तो फिर उनकी हथेलियों में खून कैसे पहुंचेगा.
क्या ऐसा संभव है
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि बिल्कुल ऐसा संभव है. उन्होंने बताया कि हाथ में खून की सप्लाई दो आर्टरीज करती है रेडियल आर्टरीज और अल्नर आर्टरीज ulnar artery. ये दोनों आर्टरीज एक दूसरे से जुड़ी होती है और आगे जुड़कर एक आर्च बनाती है जो उंगलियों के पोर-पोर तक पहुंच जाती है. इसी से खून और ऑक्सीजन वहां तक पहुंचती है. इसलिए यदि आपस में जुड़ी आर्टरीज में से एक बंद भी हो जाए तो दूसरी आर्टीरजी काम करने लगती है और उसी से ब्लड सर्कलेशन चलता रहता है. डॉक्टर अनुराग अग्रवाल ने बताया कि हमारा शरीर बहुत स्मार्ट है. जब एक नस बंद होती है, तो कोलैटरल सर्कुलेशन शुरू हो जाता है. यानी हाथ की दूसरी नसें जैसे अल्नार आर्टरीज खून की सप्लाई का जिम्मा संभाल लेती हैं . लेकिन अगर किसी वजह से एक आर्टरीज में थक्का बन जाए. जैसे यदि चोट लग गई या बार-बार वहां पर कैनुला लगाने के कारण ब्लड क्लॉट हो गया तो ऐसी स्थिति में दूसरी अल्नर आर्टरीज काम करने लगती है और उसी से खून की सप्लाई होती रहती है. इसमें इंसान का हाथ बचा रहता है. अगर अमिताभ बच्चन की पल्स नहीं आ रही है तो हो सकता है कि रेडियल आर्टरीज में क्लॉट हो गया हो. हालांकि इसका सटीक कारण क्या है यह तो वे या उनके डॉक्टर ही जानेंगे लेकिन इस तरह के केस में ऐसा हो सकता कि जब रेडियल आर्टरीज काम नहीं करे तो इसकी जगह अल्नर आर्टरीज ले ले. तब हाथ में पल्स का पता नहीं चलता है.
कब है चिंता की बात
डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कुछ केस में रेडियल आर्टरीज और अल्नर आर्टरीज आपस में जुड़ी हुई नहीं होती है. उस केस में अगर एक आर्टरी बंद हो जाए खून का सर्कुलेशन हाथ में कम होगा. इसके कारण हाथ काला भी पड़ सकता है. इस तरह के केस खतरनाक हो सकते हैं. हालांकि अगर मरीज को कुछ भी दिक्कत नहीं हो रहा है तो इसका मतलब है कि अल्नर आर्टरीज अंदर से काम कर रही है लेकिन हाथ सही से काम नहीं कर रहा है, हाथ में सुन्नापन है, हाथ ठंडा रहता है तो इसमें हमलोग सीटी एंजियोग्राफी कराते है, फिर पता लगाते हैं कि असली वजह क्या है. फिर वैकल्पिक रास्ता बनाते हैं.
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18 साल से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा। लक्ष्मी नारायण ने अपने लंबे करियर में डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक के विभिन्…और पढ़ें