Chat Recpe : ठंड का मौसम शुरू होते ही छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में गरमा – गरम चाट की चर्चा बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आपको महासमुंद जिले के भंवरपुर गांव की मशहूर चाट का स्वाद मिल जाए, तो सर्दियों का मज़ा दोगुना हो जाता है. यहां स्थित राजा का गुपचुप और चाट सेंटर पूरे जिले में अपने अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है. पिछले 18 वर्षों से राजा लोगों को ऐसी खास चाट परोस रहे हैं, जिसका स्वाद दूर–दूर तक मशहूर है. स्थानीय लोग ही नहीं, आस-पास के गांवों से भी लोग खास तौर पर उनकी चाट खाने पहुंचते हैं.
राजा बताते हैं कि उनकी चाट की खासियत सिर्फ उसका स्वाद नहीं, बल्कि उसकी आसान रेसिपी भी है, जिसे घर पर भी बनाकर इंजॉय किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि चाट बनाने के लिए सबसे पहले आलू और चना को उबालकर बेसन के साथ हल्का भून लिया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को थाली में फैला कर ठंडा होने दिया जाता है. यह बेस ही उनकी चाट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसे तैयार करने के बाद जरूरत और स्वाद के अनुसार चाट को गरम करके प्लेट में परोसा जाता है.
राजा की चाट को जिलेभर में खास बनाने वाला तत्व है उनका घर पर तैयार किया हुआ सीक्रेट मसाला. वे बताते हैं कि इसी मसाले की वजह से स्वाद का स्तर अलग ही बन जाता है. हालांकि, जो लोग घर पर यह चाट बनाना चाहते हैं और इस खास मसाले की रेसिपी नहीं जानते, वे इसके बदले गरम मसाला का उपयोग करके भी अपनी चाट को स्वादिष्ट बना सकते हैं.
परोसते समय राजा चाट में प्याज, हरी धनिया पत्ती, हरी मिर्च, मूंगफली, करी सेव, दही चटनी, मीठी चटनी और इमली की चटनी मिलाते हैं. इन सभी टॉपिंग्स के मिश्रण से चाट का स्वाद दोगुना हो जाता है, और यही वजह है कि यह चाट लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. महासमुंद जिले के इस छोटे से चाट सेंटर में रोज़ाना भारी भीड़ लगी रहती है. राजा बताते हैं कि वे हर दिन कुछ ही घंटों में 150 प्लेट से अधिक चाट बेच लेते हैं. उनकी चाट दो रेट पर उपलब्ध है. 10 रुपये और 20 रुपये प्रति प्लेट. हालांकि, अधिकतर ग्राहक 20 रुपये वाली प्लेट को ही पसंद करते हैं क्योंकि उसमें टॉपिंग्स और स्वाद की भरमार होती है.
राजा बताते हैं कि उनकी चाट नई – नई शादी वाले घरों में तो खास लोकप्रिय है. कई परिवार नए विवाहिता दंपत्ति के लिए टिफिन में चाट पैक करवाकर घर ले जाते हैं और उन्हें खिलाते हैं. परिवारों का मानना है कि राजा की चाट सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि मेहमाननवाजी का भी खास हिस्सा बन चुकी है. भंवरपुर की यह चाट सर्दियों की शामों को और भी खास बना देती है. राजा का 18 साल का अनुभव, उनका खास मसाला और लोगों का प्यार मिलकर इस चाट को महासमुंद की पहचान बना चुके हैं.
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