मैकेनिक के चक्कर लगाना भूल जाइए! अब घर बैठे ठीक होंगे TV–Fridge, 12 वीं के छात्र का स्टार्टअप मचा रहा धूम

सहरसा: बिहार के युवाओं की प्रतिभा और उनके अनोखे कामों की चर्चा अक्सर पूरे देश में होती रहती है. मेहनत, लगन और नवाचार के दम पर बिहार के युवाओं ने कई बार वह कर दिखाया है, जिसकी गूंज देश-विदेश तक सुनाई देती है. इसी कड़ी में अब सहरसा का एक और युवा चर्चा का केंद्र बना हुआ है. यह युवा है मीर टोला सहरसा के रहने वाले मो. दिलशाद, जिन्होंने 12वीं पास होने के बावजूद ऐसा काम कर दिखाया है. जिसकी खूब सराहना हो रही है. दिलशाद ने रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले होम अप्लायंसेज की मरम्मत के लिए एक अनोखा ऐप तैयार किया है.

अब घर बैठे ठीक होंगे होम एप्लायंसेज

दरअसल, घरों में रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन अक्सर खराब हो जाते हैं और उन्हें ठीक कराने के लिए लोगों को सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़ते हैं. इससे समय भी बर्बाद होता है और लोगों को काफी परेशानी भी झेलनी पड़ती है. लेकिन अब इस समस्या का आसान समाधान मिल गया है. बिना घर से बाहर निकले ही अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत कराई जा सकती है, वह भी सिर्फ एक मोबाइल ऐप के जरिए.

ऐप का नाम है HC CARE

सहरसा के 12वीं पास युवक मो. दिलशाद ने ऐसा ही एक बेहद उपयोगी ऐप तैयार किया है जिसका नाम है HC CARE. इस ऐप के माध्यम से लोग अपने मोबाइल पर ही शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जिसके बाद टेक्नीशियन स्वयं उनके घर पहुंचकर खराब पड़े टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत कर देते हैं. दिलशाद ने यह ऐप मात्र 5000 रुपये की लागत से तैयार किया है. यह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

यहां से आया ये आइडिया

दिलशाद बताते हैं कि 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ADCA कोर्स किया था. इसके बाद वे अपने भाई के सर्विस सेंटर में जाते थे, जहां उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मरम्मत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां हासिल कीं.  वहीं से उन्हें यह आइडिया आया कि क्यों न एक ऐसा ऐप तैयार किया जाए, जिससे लोगों को घर बैठे सर्विस मिल सके और टेक्नीशियन को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हों. इसी सोच के साथ उन्होंने ऐप बनाने की दिशा में काम शुरू किया. कई महीनों तक रिसर्च और मेहनत के बाद आखिरकार HC CARE ऐप तैयार हो गया.

आज इस ऐप से लगभग 500 लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें कई प्रशिक्षित टेक्नीशियन भी शामिल हैं. इन टेक्नीशियनों को भी रोजगार का एक नया माध्यम मिला है. वे महीने में 30 से 40 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. फिलहाल यह सेवा सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों में उपलब्ध है, लेकिन दिलशाद का कहना है कि बहुत जल्द वे इस सर्विस को पूरे बिहार में विस्तार देंगे.

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

दिलशाद की यह पहल न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि सीमित संसाधनों और कम उम्र के बावजूद बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं. उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी सोच और मेहनत से बदलते बिहार का सपना देखते हैं. उनकी कहानी इस बात को साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है.

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