ज़ायका-ए-हैदराबाद: सहरी के वो 5 शाही पकवान, जिनके बिना अधूरा है रमज़ान, हलीम से निहारी तक जानिए पूरी लिस्ट

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Hyderabad Sehri Special Dishes: रमज़ान के पवित्र महीने में सहरी का विशेष महत्व होता है, और हैदराबाद की सहरी अपने खास पकवानों के लिए देशभर में मशहूर है. ज़ायका-ए-हैदराबाद में ऐसे पांच लज़ीज़ व्यंजन शामिल हैं, जिनके बिना रमज़ान की सुबह अधूरी मानी जाती है. इनमें हलीम, खिचड़ी, पाया, निहारी और शीर खुरमा जैसे पारंपरिक पकवान प्रमुख हैं. ये व्यंजन न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि रोजेदारों को दिनभर ऊर्जा भी प्रदान करते हैं. हैदराबादी खानपान में मसालों और दक्खनी परंपरा का खास प्रभाव देखने को मिलता है, जो रमज़ान के दौरान और भी खास बन जाता है.

हैदराबाद की सहरी अपने नवाबी ज़ायके और रवायतों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां रमज़ान की रातों में पुरानी शहर की गलियां खाने की खुशबू से महक उठती हैं. सहरी में सिर्फ पेट भरना मकसद नहीं होता बल्कि ऊर्जा से भरपूर व्यंजनों का लुत्फ उठाना एक संस्कृति है. खिचड़ी-खट्टा-कीमा से लेकर निहारी-कुल्चा तक यहां का दस्तरख्वान विविधता और स्वाद का बेजोड़ संगम पेश करता है.

खिचड़ी, खट्टा और कीमा: यह हैदराबाद का सबसे पारंपरिक और लोकप्रिय सहरी नाश्ता है. खिचड़ी जो चावल और मूंग की दाल से बनी होती है और खट्टा जो इमली, मूंगफली और तिल से बना एक तीखा और खट्टा सूप होता है और कीमा बारीक कुटा हुआ मसालेदार मांस होता है. इन तीनों का कॉम्बिनेशन सहरी के लिए बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि यह पेट भरने वाला और ऊर्जा से भरपूर होता है.

भेजा फ्राई: हैदराबादियों को सहरी में नॉन-वेज काफी पसंद आता है. भेजा फ्राई को मक्खन और ढेर सारे मसालों के साथ तवे पर तैयार किया जाता है. इसे अक्सर तंदूरी रोटी या रुमाली रोटी के साथ खाया जाता है.

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निहारी और कुल्चा: हालांकि निहारी पूरी रात मिलती है लेकिन सहरी के वक्त इसका क्रेज बढ़ जाता है. धीमी आंच पर रात भर पका हुआ गोश्त और उसका गाढ़ा शोरबा, गर्मागर्म चारकोनी कुल्चे के साथ परोसा जाता है.

तला हुआ गोश्त: यह एक सादा लेकिन बेहद लजीज व्यंजन है. मटन के छोटे टुकड़ों को अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और करी पत्ते के साथ तब तक भूना जाता है. जब तक वह कुरकुरा न हो जाए. इसे अक्सर खिचड़ी या दाल-चावल के साथ साइड डिश के तौर पर खाया जाता है.

मलाई और नन खटाई: सहरी का अंत अक्सर कुछ मीठे के साथ होता है. पुरानी शहर की गलियों में ताजी मलाई को चीनी या पराठे के साथ खाया जाता है. ब्रेड से बना शाही टुकड़ा जो दिन भर की भूख के लिए शरीर को जरूरी कैलोरी देता है.

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