Last Updated:
How to Increase Height Naturally: हर माता-पिता की यही चाहत होती है कि उनका बच्चा न सिर्फ सेहतमंद बल्कि लंबाई में भी बेहतर हो लेकिन कई बार देखा गया है कि कुछ बच्चों की ग्रोथ उम्र के अनुसार नहीं हो पाती, जिससे माता-पिता चिंतित हो जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की लंबाई सिर्फ जेनेटिक कारणों पर निर्भर नहीं करती बल्कि उनकी डाइट, नींद, एक्सरसाइज और मानसिक स्थिति का भी इस पर गहरा असर होता है. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना)
अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो बच्चे की हाइट को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाया जा सकता है. मध्य प्रदेश के सतना की रहने वालीं डायटिशियन ममता पांडे ने लोकल 18 से कहा कि बच्चों की लंबाई बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका पोषण की होती है. बच्चों को ऐसा आहार देना चाहिए, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी और आयरन भरपूर मात्रा में हो.
ये पोषक तत्व न केवल हड्डियों को मजबूत बनाते हैं बल्कि ऊतकों और मांसपेशियों के विकास में भी मदद करते हैं. दूध, दही, पनीर जैसे डेयरी उत्पाद कैल्शियम और विटामिन डी के बेहतरीन स्रोत हैं. वहीं हरी पत्तेदार सब्जियों से आयरन और मैग्नीशियम मिलता है. बच्चों की डाइट में अंडा, दाल, चना और चिकन शामिल करना चाहिए ताकि उन्हें पर्याप्त प्रोटीन मिल सके. इसके अलावा ब्राउन राइस, क्विनोआ और होल व्हीट जैसे अनाज से फाइबर और विटामिन्स मिलते हैं.
जब बच्चा गहरी नींद में होता है, तब उसके शरीर में ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन सबसे ज्यादा सक्रिय होता है. यह हार्मोन लंबाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. शोध बताते हैं कि नियमित और गुणवत्तापूर्ण नींद लेने वाले बच्चों की ग्रोथ तेजी से होती है, इसलिए बच्चों को समय पर सुलाने और जगाने की आदत डालें. सोने का माहौल शांत और आरामदायक रखें ताकि उन्हें नींद में कोई बाधा न आए.
Add News18 as
Preferred Source on Google
बच्चों के शारीरिक विकास के लिए एक्सरसाइज और आउटडोर गेम्स बेहद जरूरी हैं. तैराकी, साइक्लिंग, योग और बास्केटबॉल जैसी गतिविधियां शरीर को लचीला बनाती हैं और हड्डियों को मजबूत करती हैं. इसके अलावा, नियमित स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज रीढ़ की हड्डी को सीधा रखती है, जिससे शरीर का पॉश्चर सही रहता है और लंबाई में सुधार होता है.
ममता पांडे ने कहा कि बच्चों को हमेशा सीधे बैठने और खड़े होने की आदत डालें. झुकी हुई रीढ़ या कंधे न केवल लंबाई को प्रभावित करते हैं बल्कि शरीर के बैलेंस को भी बिगाड़ते हैं. ऐसे में बैक और शोल्डर एक्सरसाइज से उनका पॉश्चर सुधर सकता है.
मोबाइल या टीवी के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की शारीरिक गतिविधि घट जाती है, जिससे विकास रुक सकता है, इसलिए उन्हें बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें. साथ ही बच्चों पर मानसिक दबाव न डालें. तनाव और चिंता से उनका ग्रोथ हार्मोन प्रभावित होता है. माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें और उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाएं.
बच्चों की लंबाई बढ़ाना किसी जादू की तरह नहीं होता बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें सही आहार, नींद, व्यायाम और सकारात्मक माहौल की अहम भूमिका होती है. अगर माता-पिता इन प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं, तो बच्चे की ग्रोथ में स्पष्ट बदलाव देखा जा सकता है.