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शहरीकरण के दौर में घर की छत या बालकनी में खेती समय की मांग बन गई है. यह कृषि का नायाब तरीका अपनाने से न केवल आपके घर में हरियाली बनी रहेगी, बल्कि आपको ताज़े, रसायन-मुक्त फल-फूल और सब्ज़ियां भी आसानी से मिलेंगी. इसके लिए अधिक जगह की भी जरूरत नहीं है.
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच छत या बालकनी में खेती समय की मांग हो गई है. इससे न सिर्फ घर को हरियाली मिलती है, बल्कि ताजी और रसायन-मुक्त सब्जियां भी आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं. छत पर खेती करने से मानसिक तनाव कम होता है और पर्यावरण को भी फायदा पहुंचता है. सीमित जगह और व्यस्त जीवनशैली में यह तरीका लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम करता है. खास बात यह है कि इसके लिए ज्यादा जमीन या भारी-भरकम इंतजाम की जरूरत नहीं पड़ती.

पलामू जिले के पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने लोकल18 को बताया कि लंबे समय से लोग गमलों में पौधे उगाते आ रहे हैं. गमले मजबूत होते हैं और देखने में भी आकर्षक लगते हैं. इनमें मिट्टी, खाद और पौधों को नियंत्रित तरीके से रखा जा सकता है. फूलों और सजावटी पौधों के लिए गमले काफी उपयोगी माने जाते हैं. छत या बालकनी की सुंदरता बढ़ाने में इनका बड़ा योगदान होता है और पौधों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान रहता है.

उन्होंने कहा कि हालांकि गमलों में खेती के कुछ नुकसान भी हैं. गमले भारी होते हैं, जिससे छत पर रखने में वजन की समस्या आती है. टूटने का खतरा भी बना रहता है. इनमें पानी का निकास सही न होने पर जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है. इसके अलावा गर्मी में गमले जल्दी गर्म हो जाते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है. लागत भी अपेक्षाकृत ज्यादा आती है, खासकर अगर बड़ी संख्या में पौधे लगाने हों.
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इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब ग्रो बैग एक आधुनिक और देसी समाधान बनकर सामने आए हैं. ये मजबूत कपड़े, जूट या मोटे प्लास्टिक से तैयार किए जाते हैं. हल्के होने के कारण इन्हें छत, बालकनी या आंगन में कहीं भी आसानी से रखा जा सकता है. ग्रो बैग में मिट्टी और खाद भरकर सीधे पौधे उगाए जाते हैं, जिससे गमले की जरूरत ही खत्म हो जाती है.

ग्रो बैग के लिए महंगे विकल्प जरूरी नहीं हैं. खाद का खाली कट्टा, आटे या चावल का पुराना पैकेट भी ग्रो बैग के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. बस नीचे और किनारों में छोटे छेद कर दें, ताकि पानी निकल सके. यह तरीका कम लागत में गार्डनिंग करने वालों के लिए बेहद फायदेमंद है और घरेलू कचरे का सही उपयोग भी करता है.

उन्होंने कहा कि ग्रो बैग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें आप सब्जियां, फल और फूल—तीनों उगा सकते हैं. टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, पालक जैसी सब्जियों के साथ स्ट्रॉबेरी और नींबू जैसे फलदार पौधे भी अच्छे से उगते हैं. जड़ों को खुलकर सांस लेने का मौका मिलता है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और उत्पादन बेहतर होता है.

ग्रो बैग में पानी का निकास बेहतर होता है, जिससे जड़ों में पानी जमा नहीं होता. साथ ही हवा का प्रवाह बना रहता है और नमी संतुलित रहती है. इसका फायदा यह होता है कि पौधे कम बीमार पड़ते हैं और उनकी जड़ें मजबूत होती हैं. पानी की खपत भी कम होती है, जो आज के समय में एक बड़ी जरूरत है.

ग्रो बैग में पौधों की देखरेख आसान होती है. आप खुद तय कर सकते हैं कि कौन-सी खाद और कौन-सा कीटनाशक इस्तेमाल करना है. रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा मिलता है और नियमित मेहनत भी कम लगती है. यही कारण है कि छत या बालकनी में गार्डनिंग के लिए ग्रो बैग आज सबसे बेहतर और व्यावहारिक विकल्प बनते जा रहे हैं.
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