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कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और जरूरी अंग है, जो न सिर्फ हमें सुनने में मदद करता है बल्कि शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. कई बार संक्रमण, चोट, एलर्जी या फंगल इंफेक्शन की वजह से कान से पीले, सफेद या पानी जैसे तरल पदार्थ का निकलना शुरू हो जाता है. लोग अक्सर इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है.
कान से तरल पदार्थ निकलने का मतलब जानें.
जिस तरह आंख, दिल और दिमाग हमारे शरीर के अहम अंग हैं, उसी तरह कान भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कान केवल सुनने में ही मदद नहीं करते, बल्कि शरीर के संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. इसके बावजूद लोग अक्सर कानों की सफाई और देखभाल को उतनी गंभीरता से नहीं लेते. आमतौर पर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक कान में दर्द या परेशानी शुरू न हो जाए.
कई बार लोगों को कान से पीला, सफेद या पानी जैसा तरल पदार्थ निकलते हुए दिखाई देता है. कुछ लोग इसे सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह कई बार किसी संक्रमण या अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो समस्या और बढ़ सकती है और कान को नुकसान भी पहुंच सकता है.
इन कारणों से हो सकती है यह समस्या
कान से तरल निकलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अक्सर यह समस्या बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण के कारण होती है. इसके अलावा कान का पर्दा फटना, कान में चोट लगना, फंगल इंफेक्शन होना, कान में फुंसी बन जाना या गले में संक्रमण होना भी इसकी वजह बन सकता है. अगर कान से हल्का लाल पानी आए, तेज दर्द हो या लगातार तरल निकलता रहे, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. थोड़ी सी लापरवाही भी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है.
लहसुन का तेल दे सकता है राहत
आयुर्वेद में कान के हल्के संक्रमण और दर्द से राहत पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं. इनमें लहसुन का तेल काफी उपयोगी माना जाता है. लहसुन में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं. इसे बनाने के लिए सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलियां डालकर अच्छी तरह गर्म कर लें. फिर इसे छानकर ठंडा होने दें. हल्का गुनगुना होने पर कान में इसकी दो बूंद डालने से दर्द और संक्रमण में आराम मिल सकता है.
तुलसी और नीम भी हैं फायदेमंद
तुलसी में भी एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो संक्रमण से बचाव में मदद कर सकते हैं. हालांकि तुलसी का रस सीधे कान में नहीं डालना चाहिए, बल्कि कान के आसपास की त्वचा पर हल्का लगाने से लाभ मिल सकता है. इसी तरह नीम का तेल भी एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. इसे कान के बाहरी हिस्से में लगाने से संक्रमण को कम करने में मदद मिल सकती है.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें