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हरियाणे की मिट्टी का असली स्वाद छुपा है देसी घी में घुले मीठे चूरमे में. चाहे त्योहार हो या रोज़ का खाना, इसका स्वाद हर बार दिल जीत लेता है. सख्त गूंथा आटा, घी की महक और गुड़ की मिठास मिलकर ऐसा जादू रचते हैं कि हर बाइट में बस वाह निकल ही जाता है. आइए जानते है इसकी आसान रेसिपी…
कहते हैं… हरियाणे की मिट्टी में भी स्वाद बसा होता है… और इस बात को सच साबित करता है यहां का मशहूर चूरमा. चाहे बच्चे हों या बड़े, इसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. एक बार खा लिया तो फिर बार-बार खाने का मन होना तय है.

खाने के बाद मीठे में चूरमा हरियाणा की शान माना जाता है. इसकी खुशबू और स्वाद दोनों ही दिल जीत लेते हैं. राजस्थान और बिहार का चूरमा भी अपनी जगह मशहूर है, लेकिन हरियाणे वाले इसमें देसी घी की जो खास महक और richness जोड़ते हैं, वह इसे बाकी जगहों से अलग और बेहद लज़ीज़ बना देती है.

इस चूरमे को बनाने के लिए सिर्फ कुछ ही साधारण सामग्री चाहिए—1 कप गेहूं का आटा, 6 टेबलस्पून देसी घी, 3 टेबलस्पून पिसी हुई चीनी या गुड़ और थोड़ा सा पानी. ये सारी चीज़ें हर घर की रसोई में आसानी से मिल जाती हैं.

सबसे पहले आटे में एक बड़ा चम्मच देसी घी मिलाएं और थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें. ध्यान रहे कि आटा नरम न हो. आटा जितना सख्त होगा, चूरमा उतना ही ज्यादा कुरकुरा और स्वादिष्ट बनेगा.

अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर चपाती की तरह बेल लें. इन्हें मध्यम आंच पर तवे पर गोल्डन ब्राउन होने तक और बिस्कुट जैसी कुरकुरी बनावट आने तक अच्छी तरह भूनें. यही प्रक्रिया चूरमे का असली बेस तैयार करती है, जिससे इसका स्वाद और टेक्सचर बेहतरीन बनता है.

भुनी हुई चपातियों को एक प्लेट में निकालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें. अब इसमें 2–3 बड़े चम्मच देसी घी और पिसी हुई चीनी या गुड़ डालकर अच्छी तरह मिलाएं. बस, आपका लाजवाब हरियाणवी चूरमा तैयार है, सुगंध से भरपूर और स्वाद में एकदम देसी.

अगर आप मोटे तले वाले तवे का इस्तेमाल करते हैं, तो चूरमा और भी बढ़िया और कुरकुरा बनेगा. इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर 2–3 दिन तक आराम से स्टोर किया जा सकता है. चाहे त्योहार का मौका हो या रोज़मर्रा का खाना हरियाणवी चूरमा हर बार दिल जीत लेता है.
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