कचरे से उठाती है खाना, चटखारे लेकर खाती है महिला, 4 साल से राशन पर खर्चा है जीरो, ऐश से जी रही जिंदगी

Agency:एजेंसियां

Last Updated:

Woman Picks Food From Waste: आमतौर पर हर इंसान कमाता इसलिए है कि वो अपनी थाली में अच्छा खाना ला सके. हालांकि एक महिला है, जो इससे उलट सोचती है. उसने पिछले 4 साल में खाने पर लगभग जीरो खर्च किया है क्योंकि वो कूड़े-कचरे से अपना खाना चुन लेती है और घर लाकर खाती है.

कचरे से खाना लेकर खाती है महिला. (AI Generated)

Woman Picks Food From Waste:  आपने लोगों को खाना कमाने और इसे पकाने में अपनी जिंदगी का ज्यादा वक्त लगाते हुए देखा होगा लेकिन एक ऐसी महिला भी है, जो अपना वक्त खाना जुटाने में लगाती है. जी हां, न तो उसकी कमाई खाने में खर्च होती है और न ही वो इसे पकाने में समय लगाती है. इस महिला क नाम है – सोफी जूल एंडरसन. डेनमार्क के आरहूस शहर में रहने वाली 31 साल की सोफी पिछले चार सालों से सुपरमार्केट के कूड़ेदानों में फेंका गया खाना खाकर ज़िंदगी गुजार रही हैं.

साल 2024 में उन्होंने खाने पर सिर्फ करीब 50 पाउंड यानि करीब 6000 रुपये खर्च किए. इस साल तो हाल यह है कि उन्होंने गिनती तक नहीं रखी. कोई न कोई स्नैक्स, चिप्स या खाने का पैकेट उनके हाथ में थमा ही दिया जाता है और जब सोफी खुद किसी पार्टी में जाती हैं, तो जितना पीती हैं, उससे कहीं ज़्यादा ड्रिंक्स साथ ले जाती हैं. उनका छोटा सा फ्लैट खाने-पीने की चीजों से भरा रहता है, वो भी बिना पैसे खर्च किए. वो बताती हैं कि उन्हें सिर्फ तेल और नमक खरीदना पड़ता है, बाकी कुछ नहीं

कैसे कचरे से खाना शुरू किया?

सोफी के इस सफर की शुरुआत 2021 में ऑस्ट्रेलिया से हुई. एक दोस्त के साथ पहली बार जब उन्होंने कूड़ेदान में झांका, तो जो मिला, वो किसी खजाने से कम नहीं था. वे याद करती हैं कि वे खुद खा रही थीं, दोस्तों को खिला रही थीं और पूरा अपार्टमेंट भी खा रहा था. वे कहती हैं कि शुरुआत में सिर्फ फल और सब्जियां थीं लेकिन धीरे-धीरे उन्हें हर वो चीज मिलने लगी, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. बीयर के डिब्बे, आइसक्रीम, चीज़, ब्रेड, हमस, चिप्स भी उन्हें यहां मिल जाते थे. ऐसे में अब उनका फ्रिज, फ्रीजर और अलमारियां खाने-पीने की चीजों से भरी रहती हैं. कभी दरवाजों के पीछे और बिस्तर के नीचे खाना छिपाना पड़ता है.

क्या कूड़ेदान का खाना खाने से नहीं होती बीमारी?

ये एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब देते हुए वे डेली स्टार को बताती हैं कि शुरुआत में एक सेब से पेट खराब हुआ. इसके बाद अब सोफी बेहद सतर्क रहती हैं, वे सूंघकर, चखकर फैसला करती हैं कि खाना है या नहीं. कूड़ेदान की बदबू, फफूंद और गंदा पानी खतरा बन सकते हैं. ऐसे में सोफी दस्ताने, जैकेट का इस्तेमाल करती हैं लेकिन उन्हें 80 फीसदी खाना बिल्कुल ठीक होता है. सोफी सोशल मीडिया पर अपनी कहानी शेयर करते हुए बताती हैं कि ये सिर्फ सस्ता खाना नहीं, पर्यावरण के संरक्षण लड़ाई है.

About the Author

Prateeti Pandey

News18 में Offbeat डेस्क पर कार्यरत हैं. इससे पहले Zee Media Ltd. में डिजिटल के साथ टीवी पत्रकारिता भी अनुभव रहा है. डिजिटल वीडियो के लेखन और प्रोडक्शन की भी जानकारी . टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के सा…और पढ़ें

homeworld

कचरे से उठाती है खाना, चटखारे लेकर खाती है महिला, राशन पर खर्चा है जीरो

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *