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Winter health care tips : हमारे यहां सर्दियां हमेशा से राहत भरी रही हैं, लेकिन कुछ मुसीबतें कभी पीछा नहीं छोड़तीं. सर्दियों में खांसी, खराश और आवाज बैठ जाने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं. हर कोई इनसे परेशान दिखता है. कुछ लोग दवाएं लेकर छुटकारा पाते हैं, लेकिन ये तरीका आगे चलकर किडनी के लिए खतरनाक हो सकता है. फिर क्या करें, आइये डॉक्टर से जानते हैं.
अलीगढ़. सर्दियों में खांसी, खराश और आवाज बैठ जाने जैसी गले से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं. इससे कोई भी परेशान हो सकता है. हर बार दवाएं लेना ठीक नहीं. उस स्थिति में तो बिल्कुल भी नहीं जब उसका आसान सा प्राकृतिक उपचार मौजूद हो. मुलेठी ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधि है. यह स्वाद में हल्की मीठी होती है जो न सिर्फ गले को आराम देती है, बल्कि फेफड़ों को स्वस्थ रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी कारगर साबित होती आई है. आयुर्वेद में इसे सर्दी-जुकाम से लेकर त्वचा रोगों तक के इलाज में एक भरोसेमंद औषधि माना गया है. लोकल 18 ने इसके लाभ और उपयोग करने के तरीकों के बारे में अलीगढ़ के आयुष चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार से बात की.
आसानी से मिल जाएगी यहां
डॉ. राजेश बताते हैं कि आयुर्वेद में मुलेठी का प्रयोग प्राचीन काल से होता आया है. यह पौधा पूरे देश में पाया जाता है, विशेष रूप से हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे ठंडे क्षेत्रों में इसकी अधिकता देखी जाती है. मुलेठी का उपयोग कई प्रकार की बीमारियों में किया जाता है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब गले से संबंधित समस्याएं जैसे गला खराब होना, आवाज बैठ जाना या भारी हो जाना आम हो जाता है. ऐसे में मुलेठी बहुत लाभकारी साबित होती है. यह फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों, खांसी, बलगम और त्वचा रोगों में भी उपयोगी है.
सुबह-शाम इतने ग्राम
डॉ. राजेश के अनुसार, आयुर्वेद में मुलेठी को कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता है, जैसे चूर्ण, काढ़ा और अर्क. चूर्ण की मात्रा एक से तीन ग्राम तक सुबह-शाम ली जा सकती है, जबकि अर्क 30 से 50 मिली तक सुबह और शाम सेवन करना लाभदायक है. जिन लोगों को गले में दर्द, जलन या आवाज भारी होने की समस्या रहती है, वे मुलेठी का एक छोटा टुकड़ा (तीन ग्राम) मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाएं. उसका रस अंदर जाने से तुरंत आराम महसूस होता है.
टॉफी की तरह खा लेंगे बच्चे
सर्दियों में इसकी मांग बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि इस मौसम में ठंड और प्रदूषण का असर सबसे पहले गले पर पड़ता है. मुलेठी गले की खराश, खांसी और जलन में राहत देती है और अपनी हल्की मिठास के कारण बच्चों को भी आसानी से दी जा सकती है. डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, मुलेठी केवल गले की समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी काम करती है. यह लिवर को मजबूत बनाती है, फेफड़ों को स्वस्थ रखती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें