Natural Gas Price Forecast: भारत में नैचुरल गैस की खपत तेजी से बढ़ रही है. चाहे वह CNG और PNG की बढ़ती डिमांड हो या इंडस्ट्रीज में गैस का ज्यादा इस्तेमाल, इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है. भारत में नैचुरल गैस की खपत साल 2030 तक सालाना 103 अरब घन मीटर (BCM) तक पहुंचने का अनुमान है, जो मौजूदा स्तर से 60 परसेंट ज्यादा है. इन्हीं सबके बीच अब लोग यह जानने की फिराक में हैं कि अगले 5 सालों में नैचुरल गैस की कीमतें कहां तक पहुंचेंगी?
कितनी बढ़ जाएगी नैचुरल गैस की कीमत?
भारत में नैचुरल गैस की कीमत अभी 280-290 रुपये प्रति MMBtu के आसपास है. MCX पर यह लगभग 281-289 प्रति MMBtu पर कारोबार कर रहा है. तेज डिमांड और ग्लोबल सप्लाई में कमी के चलते हो सकता है कि भारत को आगे आने वाले समय में LNG इम्पोर्ट में ज्यादा खर्च करने पड़े इसलिए साल 2030 तक कीमत के 340–420 रुपये प्रति MMBtu पर पहुंचने की संभावना है. जैसे-जैसे सरकार की तरफ से सहयोग तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे इंफ्रास्ट्रक्चर भी डेवलप हो रहा है. इससे गैस की खपत में और तेजी आ रही है. नतीजतन, 2027 तक कीमत 350–440 रुपये प्रति MMBtu के करीब होने की संभावना है.
2030 तक कितना हो जाएगा भाव?
साल 2028 तक LNG की बढ़ी हुई कैपेसिटी से सप्लाई में बेशक मदद मिलेगी, लेकिन डिमांड का दबाव बना रहेगा इसलिए कीमत भी 360–460 रुपये प्रति MMBtu के रेंज में बने रहने की संभावना है. लंबे समय तक डिमांड बने रहने और इम्पोर्ट पर निर्भरता कीमतों को और बढ़ा सकती है इसलिए 2029 तक ये 370–480 रुपये के रेंज में कारोबार कर सकते हैं.
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि 2030 तक भारत में गैस की खपत लगभग 60 परसेंट तक बढ़ सकती है, जिससे कीमतों को लंबे समय तक सपोर्ट मिलेगा. उस दौरान ये 380-500 रुपये के रेंज में कारोबार करेंगे.
क्या होगा असर?
जाहिर सी बात है कि गैस की कीमतें बढ़ेंगी, तो ट्रांसपोर्टेशन, बिजली और रोजमर्रा की जरूरत की चीज़ें महंगी हो सकती हैं. इसका असर मिडिल क्लास परिवारों के बजट और छोटे बिजनेस के ऑपरेटिंग खर्चों दोनों पर पड़ता है. इसके अलावा, पावर प्लांट और फर्टिलाइजर, स्टील और केमिकल जैसे उद्योग नेचुरल गैस पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. कीमतें बढ़ने से प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे बिजली की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ता है.
कुल मिलाकर, भारत में नेचुरल गैस की कीमतें आने वाले सालों में कई बातों पर निर्भर करेंगी जैसे ग्लोबल मार्केट, बढ़ती घरेलू मांग और LNG इंपोर्ट वगैरह. पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि गैस की कीमतें स्थिर नहीं रहतीं इसलिए इससे जुड़े किसी भी इन्वेस्टमेंट पर फैसला लेने से पहले मार्केट की चाल को समझना और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना जरूरी है.
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