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UGC New Equity Rule Impact on Students: यूजीसी ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम बनाए हैं, जिन्हें लेकर विवाद चल रहा है. इस मामले में जनरल कैटेगरी के लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ छात्रों को यूजीसी के नए नियमों के दुरुपयोग का डर भी सता रहा है. ऐसे में सवाल है कि क्या कॉलेज स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ इससे कितना प्रभावित होगी? एक्सपर्ट्स की मानें तो जब किसी व्यक्ति के मन में किसी चीज का डर बैठ जाता है, तब एंजायटी बढ़ने लगती है.
UGC New Rules and Mental Health: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम बनाए हैं. इन नियमों के अनुसार हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी, जो एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों को सुनकर उनका निपटारा करेगी. नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार को भेदभाव माना जाएगा. ऐसे मामलों की शिकायत इक्विटी कमेटी से की जा सकती है और दोषी स्टूडेंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों के सामने आने के बाद देशभर में जनरल कैटेगरी के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर भी जनरल कैटेगरी के छात्र इन नियमों को वापस लेने के लिए विरोध जता रहे हैं और कई शहरों में प्रदर्शन भी हो रहा है. जनरल कैटेगरी के छात्र-छात्राओं को डर है कि नए नियमों का दुरुपयोग करके उन्हें फंसाया जा सकता है, जिससे उनका करियर खराब हो सकता है. कई छात्रों का मानना है कि ये नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर की भावना के खिलाफ हैं और भेदभाव को कम करने के बजाय बढ़ा सकते हैं. तमाम छात्र अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं. इन नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इन नियमों से छात्रों की मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ सकता है? इस बारे में नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती से जानेंगे कि कब छात्रों की मेंटल हेल्थ बिगड़ सकती है और इससे कैसे बचा जाए.
मेंटल हेल्थ पर एक्सपर्ट की क्या है राय?
डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती ने बताया कि जब स्टूडेंट्स के मन में किसी तरह का डर रहेगा, तो इससे उनकी मेंटल हेल्थ प्रभावित होगी. जब भी किसी को डर होता है, तो उससे स्ट्रेस, एंजायटी, घबराहट जैसी परेशानियां बढ़ने लगती हैं. लॉन्ग टर्म में ये समस्याएं डिप्रेशन समेत कई गंभीर मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह बन सकती हैं. ऐसी कंडीशन में स्टूडेंट्स खुद को रिजर्व रखेंगे और अपने क्लासमेट्स से डिफेंसिव रिलेशंस बनाएंगे. इससे पूरे क्लास रूम का माहौल बदल सकता है और सभी छात्र-छात्राओं की मेंटल हेल्थ पर फर्क पड़ सकता है. इससे उनके सीखने-समझने और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है. स्टूडेंट्स तभी बेहतर कर सकते हैं, जब वे अच्छे माहौल में पढ़ाई करें और उनके मन में किसी तरह का डर न हो.
मेंटल प्रॉब्लम्स से कैसे बच सकते हैं स्टूडेंट्स?
साइकेट्रिस्ट ने बताया कि स्टूडेंट्स को अपनी मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए मन से सभी तरह की शंकाएं और डर दूर करना होगा. किसी भी तरह की अफवाहों से बचना होगा. इससे उनका स्ट्रेस लेवल और एंजायटी कम हो सकती है. आजकल सोशल मीडिया भी स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है. स्टूडेंट्स को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना होगा और सोशल मीडिया से दूरी बनानी होगी. अगर किसी तरह की शंका हो, तो इस बारे में अपने पैरेंट्स या दोस्तों से बात करनी चाहिए. अगर परेशानी ज्यादा हो, तो इस कंडीशन में मेडिकल प्रोफेशनल्स की मदद भी ली जा सकती है. ऐसे मामलों में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, काउंसलिंग और दवाओं के जरिए मेंटल प्रॉब्लम्स से निजात मिलती है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें