Iran Attack on Ras Laffan: ईरान का कतर के औद्योगिक शहर और दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब रास लफान (Ras Laffan) पर हमला दुनिया के लिए भयावह साबित हो सकता है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद-अल-काबी का कहना है कि कतर की गैस फेसिलिटीज नी ईरान के ताबड़तोड़ हमले से मिडिल ईस्ट की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की एक्सपोर्ट कैपेसिटी को भारी नुकसान पहुंचेगा. इससे अरबों डॉलर का नुकसान होगा.
ईरान ने कब-कब किया हमला?
ईरान ने पहला हमला 18 मार्च की रात को किया. इस दौरान पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिससे पर्ल जीटीएल (Pearl GTL) को काफी नुकसान पहुंचा. यह एक ऐसा प्लांट है, जो नैचुरल गैस को स्वच्छ डीजल और मिट्टी के तेल जैसे तरल ईंधनों में बदलता है. ईरान के हालिया मिसाइल हमले में इसके पाइपलाइन नेटवर्क और स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाया गया. इससे उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया.
ईरान ने दूसरा हमला 19 मार्च को किया. इसमें कतर की तमाम एलएनजी फेसिलिटीज को निशाना बनाया गया. इसमें रास लफान की दो प्रोडक्शन यूनिट और कुल 14 LNG ट्रांस (गैस को तरल बनाने वाली यूनिट) पर निशाना साधा गया. इस पर QatarEnergy के CEO काबी ने कहा, “मैंने अपने बुरे सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि कतर और यह पूरा क्षेत्र इस तरह के हमले का शिकार होगा. खासकर रमजान के पवित्र महीने में एक ‘भाईचारे वाले’ मुस्लिम देश द्वारा हम पर इस तरह हमला किया जाएगा.” काबी ने कहा कि इन हमलों ने कतर की LNG निर्यात क्षमता का 17 परसेंट हिस्सा पूरी तरह से ठप कर दिया है. इससे अनुमानित तौर पर सालाना राजस्व में 20 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि इनकी मरम्मत कराने की जरूरत है, जिससे 12.8 मिलियन टन LNG का उत्पादन अगले तीन से पांच वर्षों के लिए बाधित रहेगा.
इन देशों पर पड़ेगा असर
भारत- भारत अपनी LNG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा लगभग 40-50 परसेंट कतर से आयात करता है. अब सप्लाई में कमी आएगी, तो जाहिर तौर पर देश में CNG और PNG की कीमतें बढ़ेंगी. ऊपर से LPG का एक बड़ा हिस्सा नैचुरल गैस की प्रॉसेसिंग से आता है. ऐसे में ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमत बढ़ेगी, तो इसका असर घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर भी पड़ने के आसार हैंं.
पाकिस्तान और बांग्लादेश- भारत के ये दो पड़ोसी देश पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे में आपूर्ति कम होने और ग्लोबल मार्केट में कीमतें और बढ़ने से इनकी अर्थव्यवस्था पर और बुरा असर पड़ेगा.
चीन, दक्षिण कोरिया और जापान- ये एशियाई देश भी कतर से बड़े पैमाने पर LNG खरीदते हैं. साल 2025 में कतर के टोटल LNG एक्सपोर्ट में से 90 परसेंट इन्हें ही किया गया. ऐसे में सप्लाई कम होने की दशा में इन देशों को मजबूरन स्पॉट मार्केट से महंगे रेट में गैस खरीदना होगा.
यूरोपीय देश- यूक्रेन में जंग का आगाज होने के बाद से कई यूरोपीय देश गैस के लिए कतर पर काफी हद तक निर्भर हैं. रास लफान पर ईरान के हमले से यूरोप में गैस की कीमतों में 30-35 परसेंट तक का उछाल आ सकता है.
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