क्या यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देगा अमेरिका? क्या बदल सकता है युद्ध का रुख?

Tomahawk Missiles: क्या अमेरिका रूस में अंदर तक हमला करने के लिए यूक्रेन को टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें देगा. यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति करने से उसकी मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. जिससे वह रूसी क्षेत्र के भीतर स्थित सैन्य ठिकानों, रसद केंद्रों, हवाई अड्डों और कमान केंद्रो सहित उन लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हो सकेगा जो वर्तमान में उसकी पहुंच से बाहर हैं.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार यह विषय वर्तमान में ट्रंप प्रशासन के भीतर चर्चा का मुद्दा है. यह बात यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की द्वारा संयुक्त राष्ट्र के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद सामने आयी है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लगातार निराश होते जा रहे हैं. जबकि ट्रंप ने सत्ता संभालते ही यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे के भीतर समाप्त करने की बात कही थी. ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन युद्ध पर अपना रुख पलटते हुए दावा किया है कि कीव रूस से अपना सारा क्षेत्र वापस ले सकता है. 

लेकिन टॉमहॉक मिसाइलों के बारे में हम क्या जानते हैं? क्या अमेरिका उन्हें यूक्रेन को देगा? और क्या इससे युद्ध में कोई बदलाव आ सकता है?

क्या है टॉमहॉक मिसाइल?
टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है, जिसे आमतौर पर गहरे हमले वाले अभियानों में लक्ष्यों पर हमला करने के लिए समुद्र से दागा जाता है. सटीक मार्गदर्शन वाली टॉमहॉक क्रूज मिसाइल 1,000 मील (1,600 किलोमीटर) दूर से यहां तक कि कड़ी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में भी लक्ष्य पर प्रहार कर सकती है. यह मिसाइल 20 फीट (6.1 मीटर) लंबी है, इसके पंखों का फैलाव 8.5 फीट है और इसका वजन लगभग 3,330 पाउंड (1,510 किलोग्राम) है. प्रत्येक मिसाइल 454 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है. 

कई संघर्षों में हुआ इस्तेमाल
इस मिसाइल को सबसे पहले जनरल डायनेमिक्स और बाद में रेथियॉन ने विकसित किया था. इसकी शुरुआत शीत युद्ध के समय से हुई थी, जब अमेरिका एक लंबी दूरी की मिसाइल बनाना चाहता था जो पारंपरिक या परमाणु पेलोड ले जा सके. इसे पहली बार 1983 में सेवा में शामिल किया गया था. संघर्ष के दौरान इसका पहला ऑपरेशन उपयोग 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म के दौरान हुआ था. तब से इसका इस्तेमाल कई अमेरिकी संघर्षों में किया गया है, जिनमें ऑपरेशन इराकी फ्रीडम, सूडान और अफगानिस्तान में ऑपरेशन इनफिनिट रीच, लीबिया में ऑपरेशन ओडिसी डॉन और सीरिया में ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व शामिल हैं. हालांकि, ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के दौरान नेविगेशन संबंधी समस्याओं के कारण मिसाइल की मार्गदर्शन प्रणाली में पुनः बदलाव करना पड़ा.

वर्तमान मिसाइलों से कैसे अलग टॉमहॉक्स
यूक्रेन के पास वर्तमान में कई घरेलू निर्मित और पश्चिमी देशों द्वारा आपूर्ति की गई लंबी दूरी की मिसाइलें हैं.

फ्लेमिंगो  यूक्रेनी कंपनी फायर पॉइंट ने हाल ही में फ्लेमिंगो मिसाइल विकसित की है, जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अपने देश का सबसे सफल हथियार बताया है. इसकी मारक क्षमता 1,000 मील से ज्यादा है और यूक्रेन ने बताया है कि इसका पहला इस्तेमाल अगस्त 2025 में किया गया..

नेपच्यून: यूक्रेन ने नेपच्यून एंटी-शिप मिसाइल विकसित की और 2015 में इसका अनावरण किया. इसके बाद के संस्करणों की रेंज 600 मील से थोड़ी अधिक है.

हार्पून : अमेरिका में बोइंग द्वारा निर्मित हार्पून सभी मौसमों में काम करने वाली जहाज-रोधी मिसाइल है. यह सक्रिय रडार होमिंग का उपयोग करती है और रक्षा से बचने के लिए पानी के ठीक ऊपर उड़ती है. इसे जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों या तटीय बैटरियों से लॉन्च किया जा सकता है और इसकी मारक क्षमता 75 समुद्री मील है.

क्या टॉमहॉक्स से बदलेगा रुख?
यूक्रेन लंबे समय से रूस पर पलटवार करने के लिए अपने सहयोगियों से ऐसे लंबी दूरी के हथियारों की मांग कर रहा है. दरअसल, ट्रंप के पूर्ववर्ती जो बाइडन ने अपने कार्यकाल के अंत में यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलें देने से इनकार कर दिया था. कीव के पास ऐसा हथियार होने से वह खुद मास्को को निशाना बना सकता है – जिसे रूस एक खतरनाक बढ़त के रूप में देखेगा. ट्रंप अब तक यूक्रेन को केवल ‘रक्षात्मक हथियार’ दिए जाने पर अड़े रहे हैं. हालांकि, हाल ही में ट्रंप ने नाटो और यूरोपीय देशों को हथियार बेचने पर सहमति जतायी है, जो इन्हें यूक्रेन को दे सकते हैं. 

यूक्रेनी सुरक्षा एवं सहयोग केंद्र के अध्यक्ष सेरही कुज़ान ने बताया, “तर्क सरल और समझने योग्य है. अगर रूस के पास लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें हैं तो यूक्रेन के पास भी उतनी ही गहराई पर स्थित लक्ष्यों पर हमला करने की वैसी ही क्षमताएं होनी चाहिए.” यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के पूर्व सलाहकार कुज़ान ने आगे कहा, “अगर कोई कहता है कि यह असंभव है तो मैं आपको याद दिला दूं कि हाल ही में हमें टैंक देने से मना कर दिया गया था और F-16 विमानों की आपूर्ति पर सहमति बनने में काफी समय लगा. हमारा लक्ष्य बदला नहीं है. सभी उपलब्ध प्रकार के हथियार जल्द से जल्द यूक्रेन को पहुंचाए जाएं.” विशेषज्ञों का कहना है कि कम से कम इससे पुतिन को सौदेबाजी की मेज पर लाया जा सकता है.

क्रेमलिन ने दिया क्या जवाब
रूस ने कहा कि वह इस बात का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करेगा कि यूक्रेन को आपूर्ति की जाने वाली अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलें अमेरिका द्वारा उपलब्ध कराए गए लक्ष्यीकरण डेटा का उपयोग करके तो नहीं दागी गई थीं. वेंस की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस उनका सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने कहा, “पहले की तरह सवाल यह है कि इन मिसाइलों को कौन दाग सकता है…? क्या सिर्फ यूक्रेनियन ही इन्हें दाग सकते हैं, या अमेरिकी सैनिकों को भी ऐसा करना होगा? इसका बहुत गहन विश्लेषण जरूरी है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले कहा था कि यदि पश्चिमी देश यूक्रेन को रूस के भीतर तक मिसाइलें दागने में सक्षम बनाने के लिए हथियार उपलब्ध कराते हैं तो वे स्वयं को युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से भागीदार बना लेंगे.

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