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Success Story: मुजफ्फरपुर के लखींद्र साह और उनकी पत्नी की कहानी काफी प्रेरणादायक है. 2 हजार रुपये से नर्सरी के व्यापार की शुरूआत की थी. आज 1.5 करोड़ का कारोबार है. संघर्ष के दिनों में कैसे पत्नी का साथ आपको बल देता है ये कहानी उसकी मिसाल है. इस दौरान उनके सपने, लोगों के ताने और दोनों के मजबूत इरादे ने आज सफलता के मुकाम को हासिल किया है. आप भी पढ़े ये प्रेरणा दायक कहानी.
मुजफ्फरपुरः कहते है न पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों तक साथ निभाने वाला होता है. चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो लेकिन पति-पत्नी एक दूसरे के सबसे पहला साथी होते हैं. इस पंक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है मुजफ्फरपुर के तुर्की के रहने वाले लखींद्र साह ने. जिन्होंने पत्नी के साथ मिल कर झोपड़ी से लेकर पक्के की मकान तक के सफर को पूरा किया हैं.
15 की उम्र में पिता की मौत, खाने तक की थी दिक्कत
लखींद्र कहते है कि एक समय था, जब खाने तक की दिक्कत हो गई थी. 15 साल की उम्र में पिता जी की मौत हो गई. फिर घर की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई. तुरंत मेरी शादी भी कर दी गई. शादी से पहले तक बड़ा भाई भी साथ थे, लेकिन शादी होते ही उन्होंने भी घर से अलग कर दिया. तब एक वक्त के लिए ऐसा लगा जैसे सब कुछ यही खत्म हो गया हो. लेकिन इन सब के बावजूद भी मैंने हार नहीं मानी.
2 हजार से की शुरुआत, आज 1.5 करोड़ का कारोबार
पत्नी के साथ मिल कर दो हजार रुपए से 5 आम के पौधा से नर्सरी की शुरुआत की. दिन रात उसी को आगे बढ़ाने लगे. शुरुआत में काफी दिक्कत हुई. कभी मौसम का मार तो कभी बाजार की स्थिति ने आर्थिक रूप से कमजोर किया. लेकिन हौसला और पत्नी की सपोर्ट की बदौलत आज हमारी नर्सरी जिसमें करीब 3 लाख से अधिक पौधा है. लगभग 1.5 करोड़ की संपत्ति खरी कर दी हुई हैं.
जब कोई पूछता नहीं था, तब पत्नी रहीं साथ
लखींद्र कहते है कि जब भी मैं टूटता तो पत्नी हमारी हमेशा मोटिवेट करती थी. कभी-कभी तो पत्नी के सामने आंख से आंसु भी आ जाता था. तब पत्नी ही हमारी दोस्त बनकर हमारा साथ देती रही. आज इस संपत्ति को खरा करने में सबसे बड़ा योगदान हमारी पत्नी का ही हैं. जिस समय कोई नहीं पूछता था, तब हमारी पत्नी ही हमारे साथ खड़ी रहती थी. उस समय सब लोग मजाक बनाते थे.
हम सब जीवन भर एहे झोपड़ी में रहबई की
जब गांव में किसी का पक्का का मकान पत्नी देखती थी, तब कहती थी कि हमरा सब के कहिया छत वाला घर होतई. हम सब जीवन भर एहे झोपड़ी में रहबई की. यह सुन कर मन और टूट जाता था कि हम पत्नी के शौख को पूरा नहीं कर पाते थे. इस बात की दुख होती थी लेकिन हमलोग लगातार मेहनत करते रहे. अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाते रहे. आज उसी का फल है कि आज हमारा इतना बड़ा बिजनेस खड़ा हो पाया हैं. जो लोग कभी मजाक उड़ाते थे, आज वही लोग हमें सबसे पहले घर बुलाते हैं. कुर्सी देते हैं. इस सफर में और इसको साकार करने में सबसे बड़ा योगदान हमारी पत्नी का ही रहा है.
मेहतन के आगे बुरे समय को झुकना पड़ेगा
लखींद्र आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा श्रोत बन गए है जो परिस्थिति खराब होने पर घबरा जाते हैं. अपनी मंजिल से भटक जाते हैं. उन सभी लोगों को लखींद्र यह कहते है कि परिस्थिति खैर जितनी भी विपरीत क्यों न हो आप ईमानदारी से मेहनत करते रहिए एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी. आपकी सच्ची मेहनत के आगे बुरे समय को भी झुकना पड़ेगा.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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