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Nobel Prize 2025: नोबेल पुरस्कारों में गणित शामिल नहीं है. अक्सर ये सवाल उठता है कि नोबेल पुरस्कारों से गणित क्यों गायब है? तो आइए आपको बताते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी…
नोबेल की सोच: सिर्फ वो काम जो दुनिया को सीधा फायदा दे
दुश्मनी वाली कहानी: सिर्फ अफवाह
गणित को पहले से अपना ‘नोबेल’ मिला हुआ था
एक और वजह ये कि नोबेल को लगा गणित पहले से ही मशहूर है.उस जमाने में गणित के लिए अच्छे इनाम थे. जैसे 1936 में शुरू हुआ फील्ड्स मेडल.ये गणित का सबसे बड़ा पुरस्कार है, लेकिन इसमें एक शर्त है.ये सिर्फ 40 साल से कम उम्र वालों को मिलता है और वो भी हर चार साल बाद. नोबेल ने शायद उन क्षेत्रों को बढ़ावा देना चाहा जो कम ध्यान पाते थे और जिन्हें पैसे की ज्यादा जरूरत थी.
फिर भी गणित वाले नोबेल जीतते रहे
गणित का अलग पुरस्कार न होने से गणितज्ञ रुके नहीं. कई ने नोबेल के दूसरे वर्गों में जगह बनाई. मिसाल के तौर पर जॉन नैश को उनकी ‘गेम थ्योरी’के लिए 1994 में अर्थशास्त्र का नोबेल मिला . ये दिखाता है कि जब गणित का काम असल जिंदगी में इस्तेमाल होता है. जैसे अर्थव्यवस्था या विज्ञान में, तो वो नोबेल पा सकता है. लेकिन शुद्ध गणित? वो अभी भी लिस्ट से बाहर है.
गणित का योगदान सबसे अधिक
नोबेल की ये कमी असल में उनकी सोच को बताती है.सिर्फ वो काम जो सीधा फायदा दिखाएं, लेकिन आज हम जानते हैं कि गणित की खोजें सबसे गहरी और लंबे समय तक चलने वाली होती हैं. कंप्यूटर, AI, कोड ब्रेकिंग- सब गणित पर टिके हैं. शायद आने वाले समय में बदलाव हो, लेकिन अभी ये राज बना हुआ है.नोबेल में गणित की कमी महसूस होती है.
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य…और पढ़ें
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