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Black Garlic Benefits: ब्लैक गार्लिक आम लहसुन को खास तरीके से पकाकर बनाया जाता है. इसका स्वाद मीठा और टेक्सचर जेली जैसा होता है. ये कच्चे लहसुन से ज्यादा जेंटल माना जाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण ज्यादा होते हैं. सीमित मात्रा में इसका सेवन इम्युनिटी, दिल की सेहत और ओवरऑल वेलनेस को सपोर्ट कर सकता है, लेकिन इसे किसी चमत्कारी सुपरफूड की तरह नहीं देखना चाहिए.
Black Garlic Benefits: अगर आपने कभी ब्लैक गार्लिक यानी काले लहसुन का नाम सुना है लेकिन चखा नहीं है, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं. पहली बार सुनने में ही ये थोड़ा अजीब लगता है कि लहसुन काला भी हो सकता है. लेकिन जैसे ही लोग इसे देखते और खाते हैं, हैरानी के साथ दिलचस्पी भी बढ़ जाती है. ये वही आम लहसुन होता है जो हम रोज की किचन में इस्तेमाल करते हैं, बस फर्क इतना है कि इसे खास तरीके से कई हफ्तों तक हल्की गर्मी और नमी में रखा जाता है. इसी प्रोसेस के दौरान इसका रंग काला हो जाता है, टेक्सचर मुलायम और जेली जैसा बन जाता है और स्वाद में हल्की मिठास आ जाती है. सबसे खास बात ये कि इसे खाने के बाद मुंह से तेज लहसुन वाली बदबू भी नहीं आती. यही वजह है कि हेल्थ को लेकर सजग लोग और शेफ दोनों ही इसे पसंद करने लगे हैं.

ब्लैक गार्लिक दिखने में जितना अलग है, उतना ही अलग इसका स्वाद भी है. इसमें न कच्चे लहसुन जैसी तीखापन होती है और न ही जलन. इसका स्वाद थोड़ा सा मीठा, थोड़ा खट्टा और बाल्समिक सॉस जैसा माना जाता है. कई लोग इसे ऐसे ही चबा कर खा लेते हैं, तो कई इसे ब्रेड स्प्रेड, सॉस, सब्जी या फिर खास डिशेज में मिलाते हैं. धीरे धीरे ये वेलनेस फूड की लिस्ट में अपनी जगह बना चुका है.

आखिर बनता कैसे है ब्लैक गार्लिक: ब्लैक गार्लिक कोई अलग किस्म का लहसुन नहीं है. ये वही सफेद लहसुन होता है जिसे एक कंट्रोल्ड माहौल में 60 से 80 डिग्री सेल्सियस के आसपास कई हफ्तों तक रखा जाता है. इस दौरान उसमें नमी भी बनी रहती है. इसे फर्मेंटेशन जैसा प्रोसेस कहा जाता है, हालांकि इसमें किसी तरह का बैक्टीरिया नहीं डाला जाता. इस प्रोसेस से लहसुन के अंदर के नेचुरल शुगर और अमीनो एसिड्स आपस में रिएक्ट करते हैं, जिसे मेलार्ड रिएक्शन कहा जाता है. इसी वजह से इसका रंग काला हो जाता है और स्वाद सॉफ्ट और मीठा बन जाता है. इस प्रोसेस में लहसुन की तीखी गंध देने वाला एलिसिन काफी हद तक बदल जाता है और उसकी जगह ज्यादा स्टेबल एंटीऑक्सीडेंट्स बनते हैं. यही कारण है कि ब्लैक गार्लिक को पचाना कई लोगों के लिए आसान लगता है.
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ब्लैक गार्लिक और कच्चा लहसुन में क्या फर्क है: कच्चा लहसुन अपने तेज स्वाद और स्ट्रॉन्ग खुशबू के लिए जाना जाता है. इसमें एलिसिन नाम का कंपाउंड होता है जो इम्युनिटी और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है. लेकिन यही एलिसिन कुछ लोगों के लिए पेट में जलन, गैस या एसिडिटी की वजह भी बन सकता है.

ब्लैक गार्लिक में एलिसिन काफी हद तक बदलकर एस एलिल सिस्टीन जैसे कंपाउंड में बदल जाता है. ये ज्यादा स्टेबल होता है और शरीर इसे आसानी से एब्जॉर्ब कर पाता है. इसी वजह से जिन लोगों को कच्चा लहसुन सूट नहीं करता, वे ब्लैक गार्लिक को ज्यादा आराम से खा पाते हैं. खासकर जिन लोगों को एसिडिटी या रिफ्लक्स की दिक्कत रहती है, उनके लिए ये एक बेहतर ऑप्शन माना जाता है.

सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है ब्लैक गार्लिक: ब्लैक गार्लिक को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके हेल्थ बेनिफिट्स की होती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है. इसका मतलब ये है कि ये शरीर में सूजन को कम करने और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है.

इम्युनिटी सपोर्ट के मामले में भी ब्लैक गार्लिक को अच्छा माना जाता है. नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर की डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर सकता है. दिल की सेहत के लिए भी इसे फायदेमंद बताया जाता है क्योंकि ये ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट करता है और हार्ट हेल्थ को लेकर पॉजिटिव असर डाल सकता है.

कुछ एक्सपर्ट्स इसे लिवर सपोर्ट और प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कम करने में भी सहायक मानते हैं. हालांकि ये जरूरी है कि इसे किसी दवा या इलाज का विकल्प न समझा जाए. ये सिर्फ एक सपोर्टिव फूड है.

कितना और कैसे खाएं: ब्लैक गार्लिक की सबसे अच्छी बात ये है कि इसे खाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. रोज एक से दो कली काफी मानी जाती है. आप इसे ऐसे ही चबा सकते हैं या फिर सलाद, सब्जी, दाल या ब्रेड स्प्रेड में मिला सकते हैं. कई लोग इसे सॉस की तरह इस्तेमाल करते हैं. आजकल कई रेस्टोरेंट्स में भी ब्लैक गार्लिक से बनी खास डिशेज मिलने लगी हैं. इसका सॉफ्ट टेक्सचर और अलग स्वाद किसी भी डिश को खास बना देता है.

किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए: हालांकि ब्लैक गार्लिक ज्यादातर लोगों के लिए सेफ माना जाता है, लेकिन जो लोग ब्लड थिनर दवाइयां लेते हैं, उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए. बहुत सेंसिटिव पाचन वाले लोगों को भी इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है, जैसे किसी भी दूसरी चीज के साथ होता है.

सुपरफूड के नाम से गुमराह न हों: आजकल हर दूसरी चीज को सुपरफूड कहा जाने लगा है, लेकिन एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि कोई भी एक चीज चमत्कार नहीं कर सकती. ब्लैक गार्लिक हेल्दी जरूर है, लेकिन ये न तो शरीर को डिटॉक्स करता है और न ही किसी बीमारी को ठीक करता है. इसका असर धीरे धीरे और लंबे समय में दिखता है, वो भी तब जब आपकी पूरी डाइट और लाइफस्टाइल बैलेंस्ड हो.

ब्लैक गार्लिक को एक टेस्टी और जेंटल ऑप्शन के तौर पर देखा जाना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो कच्चे लहसुन से परहेज करते हैं. सही मात्रा और नियमितता के साथ इसे अपनी डाइट में शामिल करना समझदारी भरा कदम हो सकता है.