बकरे की जगह भेड़ के मटन की क्यों बढ़ रही डिमांड, किसमें होती है ज्यादा ताकत?

नई दिल्ली. भारत में मांसाहार प्रेमियों के बीच हमेशा से ही मटन का मतलब बकरे का मांस रहा है, लेकिन हालिया आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं. पिछले एक दशक में भारतीय बाजार में भेड़ के मीट की मांग में 250% से ज्यादा का जबरदस्त उछाल आया है. यह बदलाव इतना बड़ा है कि अब देश के कई राज्यों खासकर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में भेड़ का मीट बिक्री के मामले में बकरे को पीछे छोड़ रहा है. ऐसे में बहस छिड़ गया है कि बकरे या भेड़ किसका मीट ज्यादा ताकतवर है? क्यों बिरयानी के शौकीनों की पहली पसंद बनता जा रहा है भेड़ का मांस?

आमतौर पर भारत में चिकन यानी मुर्गा सबसे ज्यादा खाया जाता है क्योंकि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध है. लेकिन जब बात रेड मीट की आती है तो अब लोगों का बकरे की मीट की तरफ होता है. लेकिन बीते कुछ सालों से अब लोगों का रुझान भेड़ की मीट की तरफ भी बढ़ रहा है. फूड एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण फैट कंटेंट और स्वाद. भेड़ के मीट में प्राकृतिक रूप से फैट की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, जो खाना पकाते समय पिघलकर मीट को जूसी यानी रसीला बना देती है. विशेष रूप से बिरयानी बनाने के लिए भेड़ का मीट सबसे उपयुक्त माना जा रहा है क्योंकि इसका फैट चावल के साथ मिलकर एक बेहतरीन सोंधापन और स्वाद पैदा करता है.

ताकत के मामले में कौन है बेहतर?

बकरे का मीट (Goat Meat): यह लीन मीट (Lean Meat) की श्रेणी में आता है. इसमें कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट भेड़ के मुकाबले कम होता है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या दिल की सेहत का ध्यान रखते हैं, उनके लिए बकरा बेहतर माना जाता है. इसमें आयरन और पोटेशियम की मात्रा भरपूर होती है.

भेड़ का मीट (Sheep/Lamb Meat): ताकत और ऊर्जा के मामले में भेड़ का मीट आगे निकल जाता है. इसमें कैलोरी और ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है. यह मांसपेशियों के निर्माण (Muscle Building) के लिए बहुत शक्तिशाली माना जाता है. इसमें विटामिन B12 और जिंक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और ताकत को बढ़ाता है.

बाजार का बदलता स्वरूप

दक्षिण भारतीय राज्यों में भेड़ के मांस का उपयोग पारंपरिक व्यंजनों में सदियों से होता आया है, लेकिन अब उत्तर और पश्चिम भारत के बाजारों में भी इसकी पैठ बढ़ गई है. राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां भेड़ पालन एक मुख्य व्यवसाय है, वहां के लोग अब बकरे के बजाय भेड़ के मांस को उसके विशिष्ट स्वाद के कारण प्राथमिकता दे रहे हैं.

बाजार किस नजरिए से देख रहा है?

व्यापार और आर्थिक नजरिए से देखें तो भेड़ों का पालन बकरों की तुलना में थोड़ा आसान और कम खर्चीला होता है, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता भी बढ़ रही है. हाल के वर्षों में 250% की तेजी दर्शाती है कि भारतीय उपभोक्ता अब स्वाद के साथ-साथ पोषण के नए विकल्पों को अपनाने के लिए तैयार है.

कुलमिलाकर अगर आप कम फैट वाला मीट चाहते हैं, तो बकरा आपके लिए सही है. लेकिन अगर आप शारीरिक ताकत, भरपूर ऊर्जा और लजीज, रसीले स्वाद जैसे बिरयानी या स्टू के शौकीन हैं तो भेड़ का मीट एक पावरफुल विकल्प साबित हो रहा है. यही कारण है कि आज भारत के बड़े शहरों के मटन शॉप्स पर भेड़ की डिमांड बकरे पर भारी पड़ रही है.

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