दरअसल सनातन धर्म में देवी-देवातओं की पूजा में मंत्रों का अत्यंत महत्व होता है. प्रार्थना, स्नान, ध्यान या अर्पण जैसी हर विधि से जुड़े खास मंत्र हैं. इनमें क्षमा मंत्र भी शामिल है, जिसे क्षमा प्रार्थना मंत्र के नाम से जाना जाता है.
ऐसे में इस चैत्र नवरात्रि माता की पूजा करने के बाद क्षमा याचना जरूर मांगे ताकि जीवन में आने वाले कष्ट, अशुभ फल और पीड़ा नष्ट हो जाए.
क्षमा मांगना क्यों जरूरी है?
पूजा के दौरान जानबूझकर या अनजाने में गलतियां होना आम बात है, जैसे शब्दों का गलत तरीके से उच्चारण करना, अनुष्ठानों में गलती करना या ध्यान भटक जाना. इसलिए पूजा पूरी होने के बाद भगवान से माफी जरूर मांगे. इसके लिए खास मंत्र निर्धारित है.
क्षमा याचना मंत्र
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्,
पूजं चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।
“मंत्र रहित, कर्म रहित, भक्ति रहित, जनार्दन।”
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे।”
इस मंत्र का मतलब है कि, हे ईश्वर! मुझे नहीं पता कि आपका आह्वान कैसे किया जाए या आपकी पूजा कैसे किया जाए. मुझे पूजा की उचित विधियों का ज्ञान नहीं है. मुझमें मंत्रों, कर्मों और भक्ति का अभाव है. कृपया मेरी भेंट स्वीकार करें और अगर मुझे कोई गलती हो तो मुझे क्षमा करें.
क्षमा मांगने का कारण बेहद सरल है. भगवान की उपासना के दौरान हम आमतौर पर जानबूझकर या अनजाने में गलतियां कर बैठते हैं. इसलिए, उपासना के बाद ईश्वर से क्षमा मांगना बेहद जरूरी है.
जीवन में जब भी हम कोई गलती करते हैं, तो फौरन उसकी माफी मांगना बेहद जरूरी है, चाहे वह ईश्वर से हो या दूसरों से. क्षमा मांगने से अंहकार कम होने के साथ रिश्तों में प्रेम और घनिष्ठता बढ़ती है.
यह प्रथा सच्ची भक्ति और मानवता की भावना को दर्शाती है. इसलिए जब हम अपनी उपासना के अंत में ईश्वर से क्षमा मांगते हैं, तो यह न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि विनम्रता और आत्मचिंतन का भी प्रतीक है.
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