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Pneumonia Cases in Winter: निमोनिया फेफड़ों का एक खतरनाक इंफेक्शन है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से फैल सकता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए निमोनिया ज्यादा घातक हो सकता है. सर्दियों में शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे निमोनिया का रिस्क बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए लोगों को हर साल फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए. पहले से सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को समय-समय पर अपनी जांच करानी चाहिए और पल्मोनोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए.
Pneumonia Causes and Prevention: सर्दियों का मौसम आते ही निमोनिया (Pneumonia) के मामलों में उछाल देखने को मिलता है. निमोनिया फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, जो कई मामलों में मौत की वजह बन जाती है. अक्सर बच्चे और बुजुर्ग इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं और उन्हें ठीक होने में भी लंबा वक्त लगता है. कई बार लोग निमोनिया के लक्षणों को पहचान भी नहीं पाते हैं और कंडीशन लगातार खराब होने लगती है. इसकी वजह से तमाम लोग ICU में भर्ती कराने पड़ते हैं. चलिए डॉक्टर से जान लेते हैं कि निमोनिया क्या है, इसके लक्षण क्या होते हैं, इसका ट्रीटमेंट क्या है और इससे किस तरह बचाव किया जा सकता है.
नई दिल्ली के साकेत स्थित मंत्री रेस्पिरेटरी क्लीनिक के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि निमोनिया लंग्स का एक गंभीर इंफेक्शन है, जो वायरस, बैक्टीरिया और फंगस के कारण हो सकता है. निमोनिया की वजह से लोगों को खांसी के साथ बलगम, सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना और बुखार आने जैसे लक्षण नजर आते हैं. कई बार निमोनिया की वजह से लोगों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और इस कंडीशन में लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट देनी पड़ती है. निमोनिया रेस्पिरेटरी डिजीज के मरीज, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक होता है. सर्दियों में कई कारणों से निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है.
सर्दियों में क्यों बढ़ता है निमोनिया का खतरा?
पल्मोनोलॉजिस्ट के मुताबिक सर्दी के मौसम में ठंडी हवा, वायरल-बैक्टीरियल ग्रोथ और कमजोर इम्यूनिटी के कारण निमोनिया के मामले बढ़ जाते हैं. इस मौसम में ज्यादातर लोग घरों के अंदर ज्यादा रहते हैं, जिसकी वजह से यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. निमोनिया के लक्षणों को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि यह इंफेक्शन सीवियर हो सकता है. निमोनिया में सही समय पर इलाज न मिलने से मौत हो सकती है. सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में एयर पॉल्यूशन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जो निमोनिया के लिए एक रिस्क फैक्टर हो सकता है. जहरीली हवा रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स के अलावा निमोनिया का खतरा बढ़ाती है.
कैसे किया जाता है निमोनिया का इलाज?
डॉक्टर मंत्री ने बताया कि निमोनिया के लक्षण दिखने पर बलगम और ब्लड टेस्ट की जांच की जाती है. इसके साथ ही चेस्ट एक्सरे भी किया जाता है, ताकि निमोनिया डायग्नोज हो सके. इन सभी टेस्ट से पता चलता है कि वायरल निमोनिया है या बैक्टीरियल है. दरअसल वायरल निमोनिया में लोगों को एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं, जबकि बैक्टीरियल निमोनिया की कंडीशन में एंटीबायोटिक दवाओं से ट्रीटमेंट किया जाता है. फंगस की वजह से निमोनिया होता है, तो उसके अनुसार ट्रीटमेंट किया जाता है. यही वजह है कि निमोनिया की सही जांच जरूरी है, ताकि सही वजह का पता लग सके.
निमोनिया से बचने के लिए किया करें?
पल्मोनोलॉजिस्ट की मानें तो निमोनिया से बचने के लिए हर साल डॉक्टर से कंसल्ट करके फ्लू वैक्सीन लगवाएं और हैंड हाइजीन का विशेष खयाल रखें. हाथों के जरिए यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है. निमोनिया से बचने के लिए घर में सही वेंटिलेशन होना भी जरूरी है. अगर किसी को अस्थमा, COPD या सांस से जुड़ी अन्य समस्या है, तो ऐसे लोग बिल्कुल भी रिस्क न लें और पल्मोनोलॉजिस्ट से मिलकर कंसल्ट करें. अगर किसी तरह की परेशान नजर आए, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. ध्यान रखें सही समय पर इलाज करवाना शुरू कर देंगे, तो 5-7 दिनों में रिकवर कर सकते हैं. अगर इंफेक्शन सीवियर हो जाए, तो इससे रिकवर होने में 4 सप्ताह यानी एक महीने का वक्त भी लग सकता है. जितना जल्दी इलाज कराएंगे, उतना जल्दी ठीक होंगे.
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें