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Baby Activity In Womb: अक्सर गर्भवती महिलाएं रात के समय गर्भ में बच्चों की हलचल से परेशान रहती हैं. इसे लेकर कई लोग ये अनुमान लगाते हैं कि बच्चा रात में जगने वाला होगा. लेकिन गायनोलॉजिस्ट ने बताया कि ऐसा बच्चे के मां की पोजीशन, ब्लड फ्लो और डेवलप हो रहे रिदम पर रिस्पॉन्ड करने के कारण होता है.
बड़ा बदमाश है, इसकी मस्ती रात होते ही शुरु हो जाती है…! अक्सर गर्भवती महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह की बातें करती हैं. हालांकि सबकी प्रेग्नेंसी का अलग-अलग पैटर्न होता है, लेकिन आमतौर पर ये देखा गया है कि बच्चे रात के समय गर्भ में ज्यादा एक्टिव रहते हैं. इसके पीछे के कारण को समझने के लिए हमने गायनोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिक्स डॉक्टर आस्था गुप्ता से बात की, जो दिल्ली IVF में आईवीएफ कंसल्टेंट और इंफर्टिलिटी एक्सपर्ट हैं.
एक्सपर्ट ने बताया कि यह एक ऐसा अनुभव हो सकता है जो एक औरत को हैरान कर सकता है, या थका भी सकता है, क्योंकि उसे अपने बच्चे की रात की एक्टिविटी से जूझना पड़ता है, लेकिन यह आमतौर पर काफी नॉर्मल है और प्रेगनेंसी के दौरान मां के शरीर और बच्चे के बीच होने वाले तालमेल से जुड़ा है.
बच्चे के रात में ज्यादा एक्टिव होने के पैटर्न को तय करने वाले मुख्य फैक्टर्स दिन में मां के मूवमेंट से जुड़े होते हैं. दिन में एक प्रेग्नेंट औरत चलने, काम करने और घर के कामों में बिजी रहती है, और वह दिन भर बच्चे को झुलाती रहती है,ठीक वैसे ही जैसे जन्म के बाद बच्चों को सुलाने के लिए झुलाया जाता है. दिन में लगातार झुलाने से बच्चे को आराम मिलता है और वह दिन में काफी सो पाता है.
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जब दिन भर की एक्टिविटी के बाद मां रात में रुक कर लेटती है, तो बच्चा जाग जाता है और अपने आसपास की चीजों के बारे में ज्यादा अवेयर हो सकता है. रात में मां को बच्चे का हिलना, खिंचना और लात मारना महसूस होना कोई अजीब बात नहीं है, इसलिए मां को रात में बच्चे की ज्यादा मजबूत और ज्यादा ध्यान देने लायक हरकतें महसूस होने की संभावना ज्यादा होती है.
हॉर्मोन और ब्लड फ्लो में बदलाव भी बच्चे की एक्टिविटी में हिस्सा लेते हैं. जब कोई प्रेग्नेंट महिला लेटती है, खासकर करवट लेकर तो यूट्रस में ब्लड फ्लो बेहतर होता है, जिससे बच्चे तक ज्यादा ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स पहुंचते हैं, नतीजतन बच्चा ज्यादा मूवमेंट कर सकता है. इसके अलावा रात में रिलैक्स रहने से मां में स्ट्रेस हॉर्मोन कम होते हैं जो बच्चे की मूवमेंट को बढ़ावा देते है.
एक और फैक्टर है बच्चे का सोने-जागने का साइकिल. तीसरी तिमाही तक, बच्चे अपनी सर्काडियन रिदम बनाना शुरू कर देते हैं, लेकिन ये उनकी मां के साथ सिंक नहीं होता है. कुछ बच्चे शाम या रात के समय नैचुरली ज्यादा एक्टिव होते हैं और यह पैटर्न जन्म के बाद शुरुआती महीनों तक जारी रह सकता है, कुछ नए जन्मे बच्चे पहले कुछ हफ्तों तक रात में बहुत अलर्ट रहते हैं.
मां का डाइजेस्टिव सिस्टम भी बच्चे की हरकत पर असर डाल सकती है. रात के खाने के बाद, पाचन तंत्र में खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे मां के खून में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है. ग्लूकोज से बढ़ी हुई एनर्जी बच्चे को ज्यादा एक्टिव बना सकती है, जिससे शाम और रात के समय लात मारने या लुढ़कने की एक्टिविटी ज्यादा महसूस हो सकती है. <span style=”color: currentcolor;”>इसके अलावा, रात में ध्यान भटकाने वाली चीजें कम होती हैं, इसलिए मां को इस समय दिन के मुकाबले हल्की या कम साफ हरकतें महसूस हो सकती हैं. दिन में कम एक्टिविटी तब हो सकती है जब मां बिजी हो, हालांकि, रात में ध्यान भटकाने वाली चीजें कम होने से मां को कम ध्यान देने वाली हरकतें भी ज्यादा बार पता चल जाती हैं.</span>
रात में ज्यादा एक्टिविटी एक एक्टिव और हेल्दी बच्चे की निशानी होती है. हालांकि, होने वाली मां को अपने बच्चे की हरकतों के रेगुलर नेचर के बारे में पता होना चाहिए. अगर मां को अपने बच्चे में नॉर्मल से कम हरकत महसूस होती है या हरकतें पूरी तरह से बंद हो जाती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
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