सनस्क्रीन लगाने के बाद भी क्यों हो जाती है टैनिंग? इसे सही तरीके से नहीं लगाने पर त्वचा हो

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धूप से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाना जरूरी है, लेकिन कई बार लोग इसे सही तरीके से नहीं लगाते, जिससे टैनिंग हो सकती है. सनस्क्रीन को हमेशा दो उंगलियों के नियम के अनुसार चेहरे, गर्दन और हाथों पर अच्छी तरह लगाना चाहिए. साथ ही बेहतर सुरक्षा के लिए हर 4-5 घंटे के बाद सनस्क्रीन को दोबारा अप्लाई करना भी जरूरी होता है.

धूप से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन कई लोग नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग की समस्या से परेशान रहते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्सर लोग सनस्क्रीन को सही तरीके से या सही मात्रा में नहीं लगाते. केवल चेहरे पर थोड़ा सा सनस्क्रीन लगा लेना पर्याप्त नहीं होता.

केवल चेहरे पर थोड़ा सा सनस्क्रीन लगा लेना पर्याप्त नहीं होता. अगर इसे ठीक से इस्तेमाल न किया जाए तो सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे टैनिंग, सनबर्न और समय से पहले त्वचा बूढ़ी दिखने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इसलिए यह समझना जरूरी है कि सनस्क्रीन का सही उपयोग कैसे किया जाए, ताकि त्वचा को पूरी तरह सुरक्षा मिल सके.

अधिकतर लोग सनस्क्रीन बहुत कम मात्रा में लगाते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार चेहरे के लिए पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन लगाना जरूरी होता है. सनस्क्रीन लगाने का एक आसान तरीका “टू फिंगर रूल” माना जाता है. इसके अनुसार अपनी दो उंगलियों पर सनस्क्रीन को पूरी तरह से लाइन की तरह लगाएं और फिर उसे पूरे चेहरे पर अच्छी तरह फैलाएं.

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इससे चेहरे पर पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन पहुंचती है और त्वचा को बेहतर सुरक्षा मिलती है. इसके अलावा सिर्फ चेहरे पर ही नहीं, बल्कि गर्दन के आगे और पीछे के हिस्से पर भी सनस्क्रीन लगाना चाहिए, क्योंकि यह हिस्सा भी धूप के संपर्क में आता है और जल्दी टैन हो सकता है. कई लोग हाथों पर सनस्क्रीन लगाना भूल जाते हैं, जबकि हाथ भी धूप से उतने ही प्रभावित होते हैं, इसलिए बाहर निकलने से पहले हाथों पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है.

सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग होने का एक बड़ा कारण यह है कि लोग इसे दोबारा अप्लाई नहीं करते. बहुत से लोग सुबह एक बार सनस्क्रीन लगा लेते हैं और पूरे दिन उसे दोबारा लगाने की जरूरत नहीं समझते, जबकि ऐसा करना गलत है.

 इसलिए त्वचा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर चार से पांच घंटे के अंतराल में सनस्क्रीन को फिर से लगाना चाहिए, खासकर तब जब आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं. अगर आप धूप में ज्यादा समय बिताते हैं या पसीना ज्यादा आता है, तो इसे और जल्दी भी दोबारा लगाया जा सकता है.

एक और आम गलती यह है कि लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन केवल तब लगाना चाहिए जब वे घर से बाहर जा रहे हों. जबकि सच यह है कि सनस्क्रीन को रोजाना इस्तेमाल करना चाहिए, चाहे आप घर के अंदर ही क्यों न हों. सूरज की पराबैंगनी किरणें खिड़कियों और दरवाजों से भी अंदर आ सकती हैं, जो धीरे-धीरे त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी भी त्वचा पर प्रभाव डाल सकती है. इसलिए सुबह अपनी स्किनकेयर रूटीन में सनस्क्रीन को शामिल करना जरूरी है, ताकि त्वचा को पूरे दिन सुरक्षा मिल सके.

अगर सनस्क्रीन को सही मात्रा में, सही तरीके से और सही समय पर लगाया जाए तो यह त्वचा को टैनिंग, सनबर्न और कई तरह की स्किन समस्याओं से बचाने में मदद करता है. साथ ही यह त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और ग्लोइंग बनाए रखने में भी सहायक होता है.

इसलिए बेहतर स्किन के लिए सनस्क्रीन को केवल एक विकल्प नहीं बल्कि रोजाना की आदत बनाना चाहिए. नियमित और सही तरीके से सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने से त्वचा धूप के नुकसान से काफी हद तक सुरक्षित रह सकती है.

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