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Belly Fat In Old Age: बुढ़ापे तक आते-आते लगभग हर व्यक्ति का पेट निकल जाता है. ऐसा सिर्फ ओवर लोगों के साथ ही नहीं बल्कि पतले-दुबले लोगों के साथ भी होता है. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बताते हैं कि इसका कारण हार्मोन है, जो उम्र के साथ अंसतुलित होकर चर्बी को बढ़ाने का काम करते हैं.
उम्र बढ़ने के साथ पेट के आसपास फैट जमा होना एक आम समस्या है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह सिर्फ दिखने से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि शरीर में हो रहे कई अंदरूनी बदलावों का संकेत भी हो सकता है. खासतौर पर 30 साल के बाद यह बदलाव ज्यादा दिखाई देने लगता है.
डॉ. भूषण भोले, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पीएसआरआई अस्पताल दिल्ली बताते हैं कि इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है मेटाबॉलिज्म का धीमा होना. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता कम हो जाती है. पहले जितनी मात्रा में खाना खाकर शरीर उसे आसानी से ऊर्जा में बदल देता था, वही प्रक्रिया धीरे-धीरे धीमी पड़ जाती है. इसका परिणाम यह होता है कि अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है, और यह फैट सबसे ज्यादा पेट के आसपास दिखाई देता है.
एक्सपर्ट बताते हैं कि उम्र के साथ शरीर में कई हार्मोन्स का संतुलन बदलने लगता है. महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटता है, जिससे फैट का वितरण बदल जाता है और पेट के आसपास जमा होने लगता है. वहीं पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी भी पेट की चर्बी बढ़ाने का कारण बनती है. इसके अलावा तनाव से जुड़ा हार्मोन कॉर्टिसोल भी अगर लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो यह पेट की चर्बी बढ़ाने में योगदान देता है.
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उम्र के साथ लोग अक्सर कम सक्रिय हो जाते हैं. लंबे समय तक बैठकर काम करना, एक्सरसाइज की कमी और आलसी जीवनशैली शरीर में फैट जमा होने का रास्ता आसान बना देती है. जब शरीर कम चलता है, तो कैलोरी खर्च नहीं होती और वह धीरे-धीरे पेट के आसपास जमा होने लगती है. मसल्स मास यानी मांसपेशियों में कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है. उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. मसल्स शरीर में कैलोरी बर्न करने में मदद करती हैं, लेकिन जब इनकी मात्रा कम होती है, तो शरीर की ऊर्जा खर्च करने की क्षमता भी घट जाती है. इससे फैट तेजी से बढ़ने लगता है, खासकर पेट के हिस्से में.
खानपान पेट की चर्बी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं. ज्यादा तली-भुनी चीजें, मीठा, प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड का सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा करता है. इसके अलावा अनियमित समय पर खाना, देर रात तक खाना और ओवरईटिंग भी इस समस्या को बढ़ा देते हैं. अगर खानपान संतुलित न हो, तो उम्र के साथ इसका असर पेट पर साफ दिखाई देता है.
लगातार तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ते हैं जो फैट को जमा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं. वहीं पर्याप्त नींद न लेने से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाने लगता है. यह आदत धीरे-धीरे पेट की चर्बी को बढ़ाती है.जेनेटिक कारण भी कुछ हद तक जिम्मेदार हो सकते हैं. अगर परिवार में पहले से ही पेट के आसपास फैट जमा होने की प्रवृत्ति रही है, तो यह समस्या आगे भी देखने को मिल सकती है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि पेट के आसपास जमा होने वाला फैट केवल बाहरी नहीं होता, बल्कि अंदरूनी अंगों के आसपास भी जमा हो सकता है. इसे विसरल फैट कहा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है. यह दिल की बीमारियों, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है. इसलिए जरूरी है कि उम्र बढ़ने के साथ अपनी जीवनशैली पर ध्यान दिया जाए. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करना पेट की चर्बी को कम करने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है.