सोते वक्त खर्राटे क्यों आते हैं? क्या है इस परेशानी की वजह, कैसे मिलेगा इससे छुटकारा

Snoring Prevention Tips: रात में चैन की नींद सोना जरूरी होता है, क्योंकि इस दौरान हमारा शरीर अपनी मरम्मत करता है. अगर नींद पूरी न हो या बार-बार टूटे, तो इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. कई लोगों को सोते वक्त खर्राटे आते हैं और इसकी वजह से उनकी नींद तो खराब होती है और साथ में उनके आसपास सोने वाले लोग भी परेशान हो जाते हैं. खर्राटों की समस्या को लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह सेहत से जुड़ी कई परेशानियों का संकेत हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जब सोते समय आपकी नाक या गले के माध्यम से हवा का प्रवाह आसानी से नहीं हो पाता, तब खर्राटे आते हैं. जब हवा बाधित मार्ग से गुजरती है, तो आसपास के ऊतक आपस में टकराकर कंपन करने लगते हैं, जिससे खर्राटे की आवाज पैदा होती है. कभी-कभार खर्राटे लेना सामान्य है, लेकिन समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है.

यूएस के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक खर्राटे आने की वजह शरीर के ऊपरी श्वसन तंत्र में रुकावट होती है. जब आप सांस लेते हैं, तो हवा नाक, मुंह और गले के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचती है. अगर आपके तालु, टॉन्सिल, एडिनोइड्स या जीभ में किसी तरह की सूजन या बनावट संबंधी समस्या है, तो हवा के गुजरने पर ये ऊतक आपस में टकराकर घरघराहट या सीटी जैसी आवाज निकालते हैं. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का लचीलापन कम होना और नाक की हड्डी का टेढ़ा होना भी इस रुकावट का प्रमुख कारण बनते हैं. अधिकतर लोग खर्राटे को गहरी नींद की निशानी मानते हैं, जो एक गलत धारणा है. अगर खर्राटे बहुत तेज हैं और इनके साथ सोते समय सांस रुकने के झटके महसूस होते हैं, तो यह स्लीप एपनिया का लक्षण है.

स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) एक गंभीर कंडीशन है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है. इसकी वजह से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है, जिससे दिनभर थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. अगर खर्राटे आपकी नींद की क्लाविटी को प्रभावित कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है. डॉक्टर आपके नाक, मुंह और गले का फिजिकल एग्जामिनेशन करते हैं. अगर उन्हें स्लीप डिसऑर्डर का संदेह होता है, तो वे स्लीप स्टडी की सलाह देते हैं. यह स्टडी घर या स्लीप सेंटर में की जाती है, जहां सोते समय मस्तिष्क की तरंगों, हार्ट रेट, ऑक्सीजन के स्तर और सांस लेने के पैटर्न की निगरानी की जाती है. इससे यह स्पष्ट होता है कि खर्राटे सामान्य हैं या किसी बीमारी का संकेत हैं.

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अब सवाल है कि खर्राटे की वजह क्या होती है? स्लीप एक्सपर्ट्स की मानें तो खर्राटे की बड़ी वजह हमारी लाइफस्टाइल है. शराब और नींद की दवाइयां भी गले की मसल्स को जरूरत से ज्यादा आराम दे देती हैं, जिससे हवा का रास्ता सिकुड़ जाता है. इसके अलावा ओवरवेट, मोटापा, गर्दन के आसपास एक्स्ट्रा फैट भी सोते समय श्वसन मार्ग पर दबाव डालते हैं. पुरुषों में खर्राटे लेने की संभावना महिलाओं की तुलना में अधिक होती है और अक्सर यह समस्या फैमिली हिस्ट्री या आनुवंशिक कारणों से भी जुड़ी हो सकती है. खर्राटों से निजात पाने के लिए लोगों को लाइफस्टाइल और डेली हैबिट्स में भी सुधार करना चाहिए.

खर्राटों के ट्रीटमेंट की बात करें, तो इसके कई विकल्प उपलब्ध हैं. लाइफस्टाइल में बदलाव, वजन कम करना, सोने की पोजीशन बदलना और सोने से पहले शराब से परहेज करने से भी राहत मिलती है. इसके अलावा नेजल स्ट्रिप्स नाक के मार्ग को खोलने में मदद करती हैं. ओरल एप्लायंसेज या माउथ गार्ड जैसी डिवाइस भी डॉक्टर द्वारा सुझाई जाती हैं. ये चीजें सोते समय जबड़े को सही स्थिति में रखती हैं, ताकि हवा का प्रवाह ठीक बना रहे. इसके अलावा कुछ सर्जिकल विकल्प भी होते हैं. गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. इसमें लेजर-असिस्टेड युवुलोपैलेटोप्लास्टी’ (LAUP) या टॉन्सिल निकालने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. इससे भी लोगों को खर्राटों से राहत मिलती है.

खर्राटों से बचाव की बात करें, तो इस समस्या से बचने के लिए नियमित एक्सरसाइज करना, एलर्जी या सर्दी के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवा लेना और सोते समय सिर को थोड़ा ऊपर उठाकर रखना फायदेमंद होता है. समय रहते खर्राटों से निजात पाना न केवल आपकी नींद को बेहतर बनाता है, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियों के जोखिम को भी कम करता है. लोगों को खर्राटों की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलकर अपना ट्रीटमेंट कराना चाहिए.

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