स्मोकिंग करने वालों को ज्यादा खांसी क्यों आती है? बीड़ी-सिगरेट और खांसी का क्या है कनेक्शन, डॉक्टर से समझें

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Constant Cough in Smokers: अक्सर आपने देखा होगा कि स्मोकिंग करने वाले लोग हर वक्त खांसते रहते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो सिगरेट और बीड़ी पीने से फेफड़ों में म्यूकस जमा होता है और सिलिया को नुकसान पहुंचता है. इससे खांसी बढ़ जाती है. लगातार स्मोकिंग से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य फेफड़ों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

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स्मोकिंग की वजह से फेफड़ों को नुकसान होता है और बलगम के कारण खांसी आती है.

Smoking and Cough Connection: सिगरेट और बीड़ी पीना बेहद नुकसानदायक है. यह बात सभी लोग जानते हैं, लेकिन फिर भी करोड़ों की संख्या में लोग रोज स्मोकिंग करते हैं. हर तरह की स्मोकिंग सेहत के लिए खतरनाक है. स्मोकिंग का सबसे ज्यादा असर लोगों के फेफड़ों पर पड़ता है. कई बार आपने देखा होगा कि स्मोकिंग करने वाले लोगों को सामान्य लोगों के मुकाबले खांसी ज्यादा आती है. यह समस्या मिडिल एज और बुजुर्गों में ज्यादा होती है. अब सवाल है कि स्मोकिंग करने वालों को ज्यादा खांसी क्यों आती है? क्या यह सिर्फ धुएं की वजह से होता है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है?

नई दिल्ली के साकेत स्थित डॉक्टर मंत्री रेस्पिरेटरी क्लीनिक के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि जब कोई व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी का धुआं अंदर लेता है, तो उसमें मौजूद निकोटिन, टार और कई जहरीले केमिकल्स सीधे रेस्पिरेटरी सिस्टम में पहुंचते हैं. ये तत्व सांस की नली की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाते हैं. हमारे फेफड़ों में छोटी-छोटी बाल जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें सिलिया कहा जाता है. इनका काम धूल, गंदगी और कीटाणुओं को बाहर निकालना होता है. लगातार स्मोकिंग करने से ये सिलिया कमजोर या नष्ट हो जाते हैं, जिससे गंदगी और बलगम फेफड़ों में जमा होने लगता है. यही जमा हुआ बलगम शरीर खांसी के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है.

डॉक्टर ने बताया कि स्मोकर्स में अक्सर खांसी सुबह ज्यादा होती है. रातभर फेफड़ों में जमा म्यूकस को बाहर निकालने के लिए शरीर ज्यादा खांसी करता है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने से यह खांसी क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस में बदल सकती है, जो क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का हिस्सा है. इस स्थिति में सांस फूलना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी समस्याएं बनी रहती हैं. बीड़ी और सिगरेट दोनों ही खतरनाक हैं, लेकिन बीड़ी में फिल्टर नहीं होता और इसका धुआं ज्यादा हानिकारक हो सकता है. कई लोग यह सोचते हैं कि बीड़ी हल्की होती है, जबकि वास्तव में इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य जहरीले तत्व अधिक मात्रा में हो सकते हैं. लगातार धुआं फेफड़ों की परत में सूजन पैदा करता है, जिससे खांसी बढ़ जाती है.

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एक्सपर्ट की मानें तो स्मोकिंग करने से सिर्फ फेफड़े ही नहीं, गला और वोकल कॉर्ड्स भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं. धुआं गले की म्यूकस मेम्ब्रेन को सुखा देता है और उसमें जलन पैदा करता है. इससे बार-बार खांसी, गले में खराश और आवाज बैठने जैसी शिकायतें होती हैं. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो फेफड़ों के कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. डॉक्टर की साफ सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी आ रही है और वह स्मोकिंग करता है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह शरीर का चेतावनी संकेत हो सकता है. धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही हफ्तों में सिलिया दोबारा काम करना शुरू कर देते हैं और खांसी में धीरे-धीरे कमी आने लगती है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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