आपने प्राडा (Prada) और वरसाचे (Varsace) का नाम तो सुना ही होगा. बड़े-बड़े अभिनेता और स्टाइल आइकन इन दो ब्रांडों का खूब इस्तेमाल करते रहे हैं. ये दोनों फैशन ब्रांड स्टेटस सिंबल हैं. ऐसा स्टेटस सिंबल की दिल्ली की सरोजनी मार्केट में इनकी सस्ती कॉपीज़ खूब बिकती हैं. आम आदमी इन दोनों ब्रांड्स का फैशन खरीद नहीं सकता, क्योंकि कीमत बहुत अधिक होती है. प्राडा के चश्मे 20,000 रुपये से अधिक पर शुरू होते हैं, परफ्यूम 8-10 हजार का, लेदर बैग 2-3 लाख रुपये में लिस्टेड हैं. इसी तरह वरसाचे भी कोई सस्ता नहीं है. इसकी आम सी घड़ियां डेढ़-दो लाख तक पहुंचती हैं. 8-10 हजार रुपये की रेंज में परफ्यूम बिकते हैं. इसकी पोलो टी-शर्ट लगभग 30 हजार रुपये की रेंज में आती है. सोचिए! कितना महंगा है इनका सामान. 2025 से पहले ये दोनों ब्रांड एक दूसरे के धुर-विरोधी माने जाते थे. लेकिन 2025 में कुछ ऐसा हुआ कि दुनिया अवाक रह गई. ये दोनों ब्रांड मिलकर एक हो गए. प्राडा ने वरसाचे में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली. इसे डील ऑफ द ईयर कहा जा रहा है. इटली के शहर मिलान से उठे ये दोनों ब्रांड आज अलग नहीं है, लेकिन कभी ऐसा समय भी था कि दोनों के बीच तगड़ी राइवलरी थी.
प्राडा और वरसाचे की शुरुआत
प्राडा ग्रुप की कहानी शुरू होती है 1913 से, जब मारियो प्राडा ने मिलान में चमड़े के सामान का एक छोटा-सा स्टोर खोला था. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, और 1978 में जब मारियो की पोती मियूचिया प्राडा (Miuccia Prada) ने कंपनी की कमान संभाली, तो उन्होंने इसे एक नया रूप दिया. मियूचिया एक विचारक थीं, उनकी सोच हमेशा नएपन की तलाश में रहती थी. उन्होंने ऐसे डिजाइन बनाए जो शायद पहली नजर में ‘अगली चिक’ (Ugly Chic) लगते थे, लेकिन जिनमें एक अलग-सी सादगी और क्लास थी. उनका ध्यान कपड़ों की साफ कटिंग और शानदार मटेरियल पर होता था. प्राडा का मतलब था ‘खामोश लग्जरी’, जो बोलता कम था, लेकिन महसूस ज्यादा होता था.
दूसरी तरफ, वरसाचे की कहानी 1978 में जियानी वरसाचे (Gianni Versace) ने शुरू की थी. जियानी एक कलाकार थे, उन्हें भव्यता, रंग और ड्रामा पसंद था. उनका फैशन बोल्ड था, ग्लैमरस था और उसमें एक खुलापन था. ‘मेडुसा’ का उनका लोगो उनकी इसी शाही और नाटकीय स्टाइल को दर्शाता था. जियानी ने दुनिया को वो फैशन दिया, जिसे देखकर आंखें ठहर जाती थीं. एलीजाबेथ हर्ली की वो सेफ्टी पिन ड्रेस या सुपरमॉडल्स के साथ उनका रैंप वॉक, वरसाचे हमेशा चर्चा में रहा.
वरसाचे को पहले कैपरी होल्डिंग ने खरीदा
जियानी वरसाचे की मौत के बाद उनकी बहन डोनाटेला वरसाचे (Donatella Versace) ने ब्रांड को संभाला. डोनाटेला ने अपनी पूरी जान लगा दी, और लंबे समय तक वरसाचे को एक अलग पहचान दी. लेकिन 2018 में अमेरिकी ग्रुप कैपरी होल्डिंग्स (Capri Holdings) ने लगभग 2.1 बिलियन डॉलर में वरसाचे को खरीदा, तो सबको लगा कि अब इसे बड़ी मदद मिलेगी. कैपरी होल्डिंग्स के पास पहले से ही माइकल कॉर्स और जिमी चू जैसे ब्रांड थे.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कोराना काल के दौर में जब दुनिया ‘क्वाइट लग्ज़री’ की तरफ बढ़ रही थी, तब वरसाचे का बोल्ड और मैक्सिमलिस्ट अंदाज थोड़ा फीका पड़ने लगा. कंपनी के रेवेन्यू में वो तेजी नहीं आ रही थी, जिसकी उम्मीद थी. एक तो ब्रांड का ‘ओवरएक्सपोज़र’ हो गया था, यानी उसकी डिस्ट्रीब्यूशन बहुत ज्यादा फैल गई थी, जिससे उसकी एक्सक्लूसिविटी कम हो गई. दूसरा, डिजाइन में वो स्पष्टता नहीं थी, जो पहले थी. नतीजा यह हुआ कि कैपरी होल्डिंग्स कर्ज में डूबने लगी और वरसाचे अपने शानदार इतिहास के बावजूद मार्केट में ‘अंडरपरफॉर्म’ कर रहा था. वरसाचे का नाम तो दुनिया के टॉप-10 सबसे पहचान वाले ब्रांड्स में था, लेकिन कमाई उस हिसाब से नहीं हो रही थी. एक तरह से इटली का वो चमकता सितारा अपनी चमक खो रहा था.
वरसाचे फिर बिकने आया, प्राडा ने लपका
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कैपरी होल्डिंग्स ने वरसाचे को बेचने का मन बनाया. पहले बातचीत एक अमेरिकी ग्रुप टैपेस्ट्री (Tapestry) के साथ चल रही थी. लेकिन जैसे ही एंटीट्रस्ट रेग्युलेटर्स ने उस डील पर सवाल उठाए और वो टूट गई. लेकिन यहां प्राडा ग्रुप के लिए अवसर बन गया.
प्राडा ग्रुप के चेयरमैन पैट्रिज़ियो बेर्टेली (Patrizio Bertelli) और उनकी पत्नी मियूचिया प्राडा के बेटे लोरेंजो बेर्टेली (Lorenzo Bertelli) इस ब्रांड को लंबे समय से चाहते थे. लोरेंजो ने ही इस अधिग्रहण के लिए सबसे ज़्यादा जोर दिया. उन्हें पता था कि वरसाचे सिर्फ एक ब्रांड नहीं है, बल्कि इटली की फैशन विरासत का एक मजबूत हिस्सा है. लोरेंजो ने इंटरव्यू में बताया था कि कोविड के समय से ही हमारी बात चल रही थी, “जब कैपरी की वो डील टूटी, तो हम वापस आए और काम को जल्दी बढ़ाया.” यह सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि एक इमोशनल मूव था. इटली के गौरव को अपने ही हाथों में रखना था.
अप्रैल 2025 में वो पल आया, जब प्राडा ग्रुप ने कैपरी होल्डिंग्स के साथ वरसाचे को खरीदने का एक पक्का एग्रीमेंट साइन किया. कीमत रखी गई लगभग 1.25 बिलियन यूरो (यानी 1.375 बिलियन डॉलर). कैपरी होल्डिंग्स ने वरसाचे में नुकसान झेलकर इसे प्राडा को बेचा. यह वो पल था, जब मिलान के दो विरोधी, दो अलग मिजाज वाले, हमेशा प्रतिद्वंद्वी रहे ब्रांड एक छत के नीचे आ गए.
इत्तेफाक: 2 दिसंबर को पूरी हुई डील
दिसंबर 2025 में सभी जरूरी सरकारी मंज़ूरियों के बाद प्राडा ने आधिकारिक तौर पर वरसाचे का अधिग्रहण पूरा कर लिया. डील के पूरा होने की तारीख 2 दिसंबर थी और इत्तेफाक से इस दिन जियानी वरसाचे का जन्मदिन भी था.
प्राडा ग्रुप ने जो सबसे बड़ा दांव खेला, वो था वरसाचे की ‘क्रिएटिव डीएनए’ को बदलने की कोशिश न करना. प्राडा ने कहा कि वरसाचे अपनी ‘सांस्कृतिक प्रामाणिकता’ और ‘बोल्ड एस्थेटिक’ को बरकरार रखेगा. फिर सवाल उठा कि यह अधिग्रहण काम कैसे करेगा?
वरसाचे की पहचान बनाए रखने की रणनीति
- ऑपरेशनल पॉवर: प्राडा दुनिया की सबसे बेहतरीन फैशन कंपनियों में से एक है. उनके पास अपना शानदार मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम है. उन्होंने फैसला किया कि वरसाचे को भी अपने इसी मजबूत सिस्टम में शामिल करेंगे. इससे वरसाचे की क्वालिटी और ‘उत्पादन की तेजी’ बेहतर होगी, और लागत कम होगी.
- ब्रांड रिवाइवल: वरसाचे की जो एक्सक्लूसिविटी खो गई थी, उसे वापस लाना. इसके लिए, प्राडा धीरे-धीरे वरसाचे के वितरण चैनलों को कम करेगा और अपने सीधे कंट्रोल वाली रिटेल स्टोर्स और ई-कॉमर्स पर ज्यादा ध्यान देगा.
- यंग लीडरशिप: लोरेंजो बेर्टेली, जो पहले से ही प्राडा ग्रुप में मार्केटिंग और सस्टेनेबिलिटी संभाल रहे थे, उन्होंने वरसाचे के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की कुर्सी संभाली. उनका काम था वरसाचे को आज के युवा और डिजिटल मार्केट के लिए फिर से प्रासंगिक बनाना.
इस अधिग्रहण ने प्राडा ग्रुप को लग्ज़री की दुनिया में एक नई पहचान दी है. यह अब केवल एक ‘मिलान-बेस्ड’ ब्रांड नहीं रहा, बल्कि एलवीएमएच (LVMH) और केरिंग (Kering) जैसे फ्रांसीसी दिग्गजों से टक्कर लेने वाला एक मजबूत ‘इटैलियन पॉवरहाउस’ बन गया है. 1.375 बिलियन डॉलर की इस डील ने कैपरी होल्डिंग्स को अपना कर्ज चुकाने में मदद की और प्राडा को एक ऐसा ब्रांड दे दिया, जिसे वह बरसों से चाहता था. आज, वरसाचे और प्राडा दोनों एक ही परिवार का हिस्सा हैं, लेकिन अपने-अपने ‘क्रिएटिव स्पेस’ में आजाद हैं.
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