ठंड में क्यों नहीं दिखते सांप? दिन या रात कब लेते हैं नींद, हैरान कर देगा जवाब!

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गर्मी और बरसात के मौसम में सांपों की गतिविधि तेज हो जाती है. ऐसे में लोगों को इस जहरीले जानवर से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या आपने गौर किया है कि ठंड के दिनों में सांप गायब हो जाते हैं. आखिर ये कहां जले जाते हैं, मौसम में बदलाव के साथ इनके व्यवहार में बदलाव क्यों आते हैं. (रिपोर्ट:वंदना रेवांचल तिवारी/रीवा)

सांपों के रहस्यमयी जीवन के बारे में हमेशा लोगों में जिज्ञासा बनी रहती है. आमतौर पर लोग यह जानना चाहते हैं कि सांप दिनभर क्या करते हैं, कैसे सोते हैं, या फिर ठंडे मौसम में उनका व्यवहार कैसा होता है. इंसानों की तरह वे भी आराम करते हैं, लेकिन नींद और गतिविधियों के मामले में सांप काफी अलग माने जाते हैं.

फाइल

रीवा के बिटनरी हॉस्पिटल के प्रोफेसर एंड हेड डॉ. एके मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि सांप एक शीत रक्त प्राणी है, ठंड के मौसम में उसके शरीर में रक्त जम जाता है जिससे उसके में हलचल कर पाना मुश्किल होता है, यहां तक की भूख होने पर भी भोजन नहीं कर पाते सांप, और यह प्रक्रिया उसके शरीर में बहुत कष्टदायक होती है.

इसलिए सर्दी के मौसम में सांपों की मानसिक स्थित अक्रामक होती है. ठंड में सांप धूप होते ही शीत पीने लगते हैं जिससे उनको नशा सा होता है. पूरा समय गर्म स्थान पर लेट कर बताते हैं बिल्कुल शांत अवस्था में लेकिन गलती से भी सांप के ऊपर पैर पड़ जाए तो एक डस से दातों का सारा जहर इंसान के काटने वाली जगह पर छोड़ देते हैं.

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असल में ठंड के मौसम में उनके शरीर का मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय दर काफी धीमा हो जाता है. चयापचय धीमा होने का मतलब है कि उनका शरीर कम ऊर्जा पैदा करता है. ऐसे में वे न तो तेजी से भाग सकते हैं और न ही आसानी से शिकार कर पाते हैं. इसलिए वे अपने आप को सुरक्षित जगह पर छिपाकर आराम करने में ही भलाई समझते हैं.

सामान्य दिनों में भी लंबे समय तक सोने की आदत रखते हैं. औसतन एक सांप 24 घंटे में 16 घंटे तक आराम करता है. यह सुनने में हैरानी भरा लगता है, लेकिन उनके शरीर की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से यह बिल्कुल सामान्य है. कम ऊर्जा खर्च करने वाले इन जीवों के लिए ज्यादा नींद लेना आवश्यक माना जाता है.

इस अवस्था को हाइबरनेशन या शीतनिद्रा कहते हैं. यह बिल्कुल वही प्रक्रिया है जो भालू जैसे कुछ अन्य जीवों में भी पाई जाती है. हाइबरनेशन की स्थिति में सांप अपने शरीर का तापमान वातावरण के हिसाब से ढाल लेता है और खाने-पीने की ज़रूरत बहुत कम हो जाती है. यही कारण है कि ठंडी ऋतु में सांपों को ढूंढ पाना भी कठिन होता है.

जब ठंड बढ़ जाती है, तो सांप अपने लिए एक सुरक्षित कोना तलाश लेते हैं. यह कोना कोई भूषे वाली जगह, धान के पैरेली, इन स्थानों पर वे कई-कई घंटे सोते रहते हैं. दिन के अधिकांश समय उनका शरीर निष्क्रिय रहता है और वे पिछली बार किए गए शिकार से मिली ऊर्जा का उपयोग कर जीवित रहते हैं.

सांप

सर्दी का मौसम आते ही सांपों का व्यवहार और भी बदल जाता है. जब तापमान गिरता है तो वे ज्यादातर समय गर्म स्थान और गुफाओं में छिपकर गुजारते हैं. इस दौरान वे बाहर निकलने से बचते हैं और लम्बी नींद में चले जाते हैं. ठंड के दिनों में सांप 20 से 22 घंटे तक भी सो सकते हैं. खासकर अजगर जैसे बड़े सांप तो कई दिनों तक बिना हिले-डुले आराम करते रहते हैं.

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